लागत 3, मुनाफा 60…35 दिन में बन जाओगे ‘राजा’, बाराबंकी के किसान ने उगाई ऐसी तोरई
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Agri Tips : खेती के ऑर्गेनिक तरीके से न केवल मिट्टी की सेहत सुधरती है बल्कि फसलों की गुणवत्ता भी अच्छी हो जाती है. अरो तोरई की खेती भी ऑर्गेनिक तरीके से होती है. बाजार में इसकी उपलब्धता कम होने के कारण कीमत अधिक मिलती है. बाराबंकी के किसान श्याम कुमार ने इस बार एक बीघे में अरो तोरई उगाई है. लोकल 18 से किसान श्याम कहते हैं कि इसकी खेती साल में दो बार की जा सकती है. उगाना बहुत ही आसान है. बुवाई के 35 से 40 दिन बाद फसल निकलना शुरू हो जाती है.
बाराबंकी. ऑर्गेनिक खेती का रकबा बढ़ता जा रहा है. इससे न केवल मिट्टी की सेहत सुधरती है बल्कि सब्जियों की गुणवत्ता भी बेहतर होती है. कुछ सब्जियां ऐसी भी हैं जिनकी खेती के लिए न ज्यादा लागत की जरूरत होती है और न ही किसी आधुनिक तकनीक की. पारंपरिक तरीके से उगाई जाने वाली ये फसलें भी किसानों को अच्छा मुनाफा दे सकती हैं. ऐसी ही एक सब्जी है अरो तोरई, जिसकी खेती फिलहाल कम किसान करते हैं. बाजार में इसकी उपलब्धता कम होने के कारण कीमत अन्य सब्जियों के मुकाबले अधिक मिलती है.
इसकी खेती बहुत ही सरल है. अरो तोराई उगाने के लिए बलुई और दोमट मिट्टी उपयुक्त है. इसकी अच्छी पैदावार लेने के लिए अच्छी जल निकास वाली भूमि होनी चाहिए. जनपद बाराबंकी के फतहाबाद गांव के रहने वाले किसान श्याम कुमार ने करीब एक बीघे में अरो तोरई उगाई है. एक फसल पर 50 से 60 हजार रुपये मुनाफा आराम से हो जाता है.
इसके स्वाद का जवाब नहीं
किसान श्याम कुमार कहते हैं कि वे सब्जियों की खेती 4-5 साल से करते आ रहे हैं. इस समय एक बीघे में अरो तोराई लगाई है. लागत एक बीघे में 3 से 4 हजार रुपये आती है. मुनाफा 50 से 60 हजार रुपये तक हो जाता है. अरो तोरई हाइब्रिड में नहीं आती है, जिस वजह से इसकी डिमांड बाजार में अधिक रहती है. यह खाने में दूसरी किस्मों के मुकाबले काफी स्वादिष्ट होती है. इसकी खेती बहुत कम किसान करते हैं जिस वजह से ये काफी महंगी बिकती है. इसकी खेती साल में दो बार की जा सकती है.
ये रहा खेती का तरीका
किसान श्याम के मुताबिक, अरो तोराई की खेती करना बहुत ही आसान है. पहले खेत की दो तीन बार गहरी जुताई की जाती है. फिर इसमें गोबर और अन्य खादों का छिड़काव किया जाता है. इसके बाद पूरे खेत मे मेड बनाकर उस पर मल्च बिछाई जाती है. फिर उसमें थोड़ी-थोड़ी दूरी पर छेद करके अरो तोराई के बीजों की बुवाई की जाती है. जब पौधा निकल आता है तो इसमें बास डोरी का मचान तैयार कर उस पर इसकी बेल को चढ़ा दिया जाता है. इससे बारिश के पानी से इसके पौधे को नुकसान नहीं होता और पैदावार अच्छी होती है. बुवाई करने के 35 से 40 दिन बाद फसल निकलना शुरू हो जाती है.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें