विन्ध्यपर्वत पर महात्रिकोण का संयोग, महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली का संगम

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विन्ध्यपर्वत पर महात्रिकोण का संयोग, महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली का संगम


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मां विंध्यवासिनी धाम में त्रिकोण दर्शन करने से भक्तों को हजारों अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है. महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली के दर्शन से जीवन के हर संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यह दिव्य यात्रा अज्ञानता के पाप भी समाप्त कर देती है और इच्छाशक्ति, ज्ञानशक्ति व क्रियाशक्ति प्रदान करती है.

मिर्जापुर. विंध्यक्षेत्र में मां की ऐसी त्रिकोण शक्ति विराजमान है, जिसके दर्शन करने से हज़ारों अश्वमेध यज्ञ के बराबर का फल मिलता है. मां विंध्यवासिनी मां लक्ष्मी के रूप में मां अष्टभुजा मां सरस्वती के रूप में और मां कालीखोह महाकाली के रूप में विराजमान है. तीनों महाशक्ति के दर्शन करने से भक्तों के जीवन के हर संकट टल जाते हैं. मां की कृपा बरसती है और हर मनोकामना पूर्ण होती है. अगर आप भी मां विंध्यावासिनी धाम आ रहे हैं तो त्रिकोण दर्शन करना न भूले.

विंध्यधाम के विद्यवान आचार्य पं. अनुपम महाराज ने बताया कि विंध्यक्षेत्र दिव्य स्थान है. यह स्थान मणिद्वीप माना जाता है. यह ऐसा स्थान है, जहां पर पराअम्बा सशरीर विराजमान है. पुराणों में भी वर्णन है कि विंध्यक्षेत्र के जैसा स्थान पूरे ब्रह्मण्डलोक में नहीं है. यहां पर पराअम्बा स्वयं विराजमान है. मां के तीन रूपों की यहां पर पूजा व अर्चना होती है. महालक्ष्मी, महासरस्वती व महाकाली तीनों रूपों में पूजा होती है, जिसमें एक त्रिकोण बनता है. मां विंध्यवासिनी से त्रिकोण प्रारंभ होता है. उसके बाद थाने पर भैरव के दर्शन करते हैं. नंगे पाव जय माँ दुर्गा जय माँ तारा दयामयी कल्याण करो. इस मंत्र का जाप करते हुए बिना चिंता और भय के महाकाली मंदिर में दर्शन करते हैं.

यहां करें दर्शन
पं. अनुपम महाराज ने बताया कि महाकाली मंदिर में दर्शन करने के बाद भगवती के नाम से कपूर जाने के बाद भैरव मंदिर में दर्शन कर सकते हैं. महाकाली मंदिर से निकलने के बाद मां अष्टभुजा के दर्शन कर सकते हैं. गुफा में विराजमान महासरस्वती की अवतार का चरणस्पर्श दर्शन कर सकते हैं. वहां से निकलने के बाद मां तारा मंदिर में दर्शन कर लें. मां तारा मंदिर में दर्शन के बाद रामेश्वरम मंदिर में दर्शन कर सकते हैं. वहां पर दर्शन के बाद मां विंध्यवासिनी धाम में दर्शन कर सकते हैं.

अश्मेघ यज्ञ के बराबर मिलेगा फल
पं. अनुपम महाराज ने बताया कि इस त्रिकोण यात्रा का विशेष फल है, अश्मेघ यज्ञ से ज्यादा फल मिलता है. हजारों अश्वमेध यज्ञ के बराबर का फल एक त्रिकोण दर्शन का फल मिलता है. अज्ञानता में किया गया पाप भी इस त्रिकोण परिक्रमा के बाद खत्म हो जाता है. त्रिकोण यात्रा करने के बाद इच्छाशक्ति, ज्ञानशक्ति व क्रियाशक्ति की प्राप्ति होती है. तीनों शक्ति तीनों देवी के दर्शन से प्राप्त होते हैं.

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Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें



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