शलजम की खेती कर शुभावरी ने किया कमाल, बेचकर कमा रही 10 गुना मुनाफा

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शलजम की खेती कर शुभावरी ने किया कमाल, बेचकर कमा रही 10 गुना मुनाफा


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Saharanpur News: यूपी के सहारनपुर की रहने वाली शुभावरी चौहान बीए की पढ़ाई के साथ ही किसानी कर रही हैं. वह ऑर्गेनिक खेती कर अन्य किसानों के लिए मिसाल बन गई हैं. उनके द्वारा ऑर्गेनिक शलजम की खेती की गई है. जो कि…और पढ़ें

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उत्पादन भले ही हो रहा हो कम लेकिन ऑर्गेनिक में है दम, साबित कर रही यह लड़की

हाइलाइट्स

  • शुभावरी चौहान ऑर्गेनिक खेती से 10 गुना मुनाफा कमा रही हैं.
  • शलजम की खेती में जैविक खाद और गोमूत्र का उपयोग करती हैं.
  • शलजम 60 रुपए किलो में बिक रही है, दिल्ली तक सीधा पहुंचती है.

सहारनपुर: यूपी के सहारनपुर के किसान विभिन्न प्रकार की खेती करना काफी पसंद कर रहे हैं. जहां एक और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं. वहीं, सहारनपुर की विधानसभा बेहट के छोटे से गांव कोठड़ी बहलोलपुर की रहने वाली शुभावरी चौहान 9 साल की उम्र से खेती करती आ रही है. शुभावरी ऑर्गेनिक खेती करने को लेकर देशभर में अपनी एक अलग पहचान बन चुकी हैं.

सब्जियों की खेती से हो रहा बंपर मुनाफा

छात्रा शुभावरी शुभावरी चौहान सहारनपुर के मुन्नालाल डिग्री कॉलेज से ग्रेजुएशन कर रही है. ऑर्गेनिक खेती में शुभावरी विभिन्न सब्जियां लगाती है. वहीं, शुभावरी के द्वारा लगाई गई ऑर्गेनिक तरीके से सभी सब्जियां मार्केट में अन्य सब्जियों से कई गुंना अधिक दाम पर बिकती हैं. इस बार शुभावरी चौहान ने अपने खेत में ऑर्गेनिक तरीके से शलजम लगाई है.

सबसे खास बात यह है कि शुभावरी के खेत में लगी शलजम खेत से ही 10 गुना अधिक दाम पर बिक रही है. शुभावरी चौहान अपनी फसल पर गाय के गोमूत्र से तैयार जीवामृत और खाद के रूप में गोबर का इस्तेमाल करती है. ऑर्गेनिक तरीके से खेती करती आ रही शुभावरी ऑर्गेनिक में भी अच्छा उत्पादन ले रही हैं. शुभावरी को देखकर आसपास के किसान भी ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा दे रही हैं. ऑर्गेनिक खेती करने को लेकर शुभावरी मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित भी हो चुकी हैं.

शलजम की 60 रुपए किलो में होती है बिक्री

शुभावरी चौहान ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि वह अपने आधा एकड़ खेत में शलजम लगाई हैं, जिसको वह ऑर्गेनिक तरीके से उगा रही हैं. इस शलजम का स्वाद काफी मीठा है. वह अपनी खेती में जैविक खाद का इस्तेमाल करती हैं. उनके पास 20 से अधिक देसी गाय हैं, जिनके गोमूत्र से जीवामृत तैयार करती हैं. साथ ही उनके गोबर का देसी खाद बनाकर फसलों में इस्तेमाल किया जाता है.

उनके खेत में लगी शलजम उनके खेत से सीधा दिल्ली जाती है. बीच में किसी भी प्रकार के बिचौलिए की आवश्यकता नहीं पड़ती है. khetibadi.com सहित खेतों के ऐप हैं. उसके माध्यम से उनके खेत में खड़ी सब्जी सीधा खेत से घर तक पहुंचती है. साथ ही मार्केट प्राइस से 10 गुना अधिक दाम पर उनकी शलजम बिक रही है. वहीं, लोग ऑर्गेनिक होने के चलते इस शलजम को 60 रुपए किलो में खरीद रहे हैं.

हालांकि ऑर्गेनिक में उत्पादन कम होता है, लेकिन दाम उतना ही अधिक मिलता है. शुभावरी बताती हैं कि उनको इस बात की खुशी है कि वह लोगों को खाने के लिए शुद्ध सब्जी दे रहे हैं, जिसमें किसी भी प्रकार के पेस्टिसाइड का इस्तेमाल नहीं किया गया है.

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