समंदर से उठेगा तूफान? 80KM की विनाशकारी रफ्तार, 13 राज्यों में IMD का अलर्ट

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समंदर से उठेगा तूफान? 80KM की विनाशकारी रफ्तार, 13 राज्यों में IMD का अलर्ट


Today Weather Live: अप्रैल महीने में मौसम अलग ही रंग में है. देश की राजधानी दिल्ली से लेकर पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकता तक मौसम का अलग रूप देखने को मिल रहा है. पटना से लेकर भोपाल और जयपुर तक अप्रैल महीने में बारिश और तेज हवाओं का असर साफ दिख रहा है. मौसम इस समय जहां लोगों को तपाती है वहीं फिलहाल मौसम सुहावना बना हुआ. तेज हवाएं, भारी बादल और लगातार बदलते दबाव के सिस्टम मिलकर एक बड़े मौसमीय बदलाव की ओर इशारा कर रहे हैं. सवाल यही है कि क्या समुद्र से उठने वाली नमी और उत्तर-पश्चिम से आ रहे सिस्टम मिलकर किसी बड़े तूफान को जन्म देने वाले हैं. मौसम विभाग यानी IMD ने 13 राज्यों के लिए अलर्ट जारी कर दिया है, जो इस बात का संकेत है कि आने वाले दिन सामान्य नहीं रहने वाले हैं. देश के लगभग हर हिस्से में इसका असर दिख रहा है, जहां एक ओर लोगों को गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर खतरे की घंटी भी बज चुकी है. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह सीधे तौर पर चक्रवाती तूफान नहीं है. लेकिन कई सिस्टम एक साथ सक्रिय हैं. पश्चिमी विक्षोभ और समुद्री नमी के कारण मौसम अस्थिर है.

लातार आंधी-बारिश से तापमान में गिरावट जरूर आई है, इससे लोगों को कुछ राहत महसूस हुई है, लेकिन इसके साथ ही बिजली गिरने और तेज हवाओं से नुकसान का खतरा भी कई गुना बढ़ गया है. खासकर किसानों के लिए यह समय बेहद चिंताजनक है क्योंकि खेतों में खड़ी फसलें इस अचानक बदले मौसम की मार झेल रही हैं. मौसम विभाग का साफ कहना है कि यह स्थिति अभी खत्म नहीं हुई है और आने वाले कुछ दिन और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं, ऐसे में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है.

पूर्वोत्तर भारत में मौसम सबसे ज्यादा सक्रिय बना हुआ है.
  • पिछले कुछ दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज तेजी से बदला है. पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से उत्तर भारत में लगातार आंधी-बारिश और ओलावृष्टि का दौर जारी है. इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी से उठने वाली नम हवाएं पूर्वी और मध्य भारत में पहुंचकर वातावरण में नमी बढ़ा रही हैं. इन दोनों सिस्टम के आपसी टकराव ने मौसम को अस्थिर बना दिया है, जिससे अचानक तेज हवाएं, गरज-चमक और भारी बारिश जैसी घटनाएं बढ़ गई हैं. यही कारण है कि एक ही समय में देश के कई हिस्सों में अलग-अलग तरह के मौसमीय प्रभाव देखने को मिल रहे हैं.
  • मौसम विभाग के अनुसार 11 अप्रैल के आसपास एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है, जो पहले से बने सिस्टम के साथ मिलकर मौसम को और ज्यादा प्रभावी बना सकता है. इसका मतलब यह है कि जो बदलाव अभी दिख रहा है, वह आगे और तेज हो सकता है. अगले 3 से 4 दिन इसलिए बेहद अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि इसी दौरान यह तय होगा कि मौसम सामान्य होगा या और ज्यादा बिगड़ेगा. इस पूरे घटनाक्रम को देखते हुए विशेषज्ञ लगातार निगरानी कर रहे हैं और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं.

दिल्ली-NCR में फिर चलेंगी तेज हवाएं

दिल्ली-NCR में मौसम लगातार बदलते मिजाज के साथ लोगों को हैरान कर रहा है. हाल ही में हुई बारिश और गरज-चमक के कारण तापमान में गिरावट आई है, इससे गर्मी से राहत मिली है और वायु गुणवत्ता (AQI) में भी सुधार दर्ज किया गया है. हालांकि यह राहत स्थायी नहीं है. 9 अप्रैल को मौसम साफ रहने की संभावना जरूर है, लेकिन 10 और 11 अप्रैल को एक बार फिर तेज हवाएं चल सकती हैं. इस दौरान हवा की रफ्तार 30 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. दिन का तापमान 30 डिग्री के आसपास बना रहेगा, लेकिन मौसम पूरी तरह स्थिर नहीं होगा. अचानक बादल छाने, हल्की बारिश या तेज हवा चलने जैसी स्थितियां कभी भी बन सकती हैं.

उत्तर प्रदेश में बिजली-बारिश

  • उत्तर प्रदेश में मौसम का असर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है. पिछले कुछ दिनों से राज्य के कई हिस्सों में आंधी-बारिश और ओलावृष्टि का दौर जारी है. अलीगढ़, आगरा, मथुरा और आसपास के इलाकों में तेज हवाएं 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हैं, इससे जनजीवन प्रभावित हुआ है. कई जगहों पर ओलावृष्टि की खबरें भी सामने आई हैं, जिसने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. इसके साथ ही बिजली गिरने की घटनाओं में भी बढ़ोतरी हुई है, जिससे लोगों को खासतौर पर खुले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी गई है.
  • मौसम विभाग के अनुसार राज्य में तापमान में 2 से 4 डिग्री तक गिरावट दर्ज की जा सकती है, जो फिलहाल राहत की खबर है, लेकिन यह राहत जोखिम के साथ आ रही है. पश्चिमी विक्षोभ के कारण बने इस मौसमीय बदलाव ने फसलों को नुकसान पहुंचाने का खतरा बढ़ा दिया है. गेहूं और अन्य रबी फसलों के लिए यह समय बेहद संवेदनशील होता है, ऐसे में तेज हवाएं और ओलावृष्टि सीधे नुकसान पहुंचा सकती हैं.
हिमाचल प्रदेश में भी 9 और 10 अप्रैल को मौसम खराब रहने की संभावना है.

बिहार में मौसम 72 घंटे अहम

  • बिहार में भी मौसम ने अचानक करवट ली है और अगले 72 घंटे को बेहद अहम माना जा रहा है. दरभंगा, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और आसपास के जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है. इसके साथ ही तेज हवाएं और वज्रपात का खतरा भी बना हुआ है. मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और खराब मौसम के दौरान घरों में रहने की सलाह दी है, क्योंकि बिजली गिरने की घटनाएं इस दौरान ज्यादा होती हैं.
  • मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी और पश्चिमी विक्षोभ के असर से यह स्थिति बनी है. इन दोनों सिस्टम के मिलन से वातावरण में अस्थिरता बढ़ी है, इससे अचानक मौसम बदल रहा है. तापमान में गिरावट जरूर होगी, जिससे गर्मी से राहत मिलेगी, लेकिन यह राहत ज्यादा समय तक टिकेगी नहीं. मौसम का यह अनिश्चित रूप लोगों के लिए चुनौती बना रहेगा.

राजस्थान में गरजेंगे बादल

राजस्थान में भी मौसम ने अपना रंग बदला है. कोटा, जयपुर, बीकानेर और उदयपुर जैसे क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बारिश का दौर जारी है. कई इलाकों में बादलों की गर्जना और बिजली गिरने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं. मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए अलर्ट जारी किया है, जिसमें ओलावृष्टि और तेज आंधी की संभावना जताई गई है. हालांकि 9 अप्रैल के बाद मौसम धीरे-धीरे साफ हो सकता है, लेकिन उसके बाद तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होने की भी आशंका है, इससे एक बार फिर गर्मी का असर बढ़ सकता है.

मध्य प्रदेश में साइक्लोनिक सर्कुलेशन असर

मध्य प्रदेश में साइक्लोनिक सर्कुलेशन और पश्चिमी विक्षोभ के संयुक्त प्रभाव से मौसम अस्थिर बना हुआ है. भोपाल, ग्वालियर, सागर, रीवा और आसपास के जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. हवाओं की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, इससे पेड़ गिरने और बिजली बाधित होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं. तापमान में गिरावट से लोगों को राहत जरूर मिलेगी, लेकिन यह बदलाव अस्थायी है और मौसम का यह उतार-चढ़ाव आगे भी जारी रह सकता है.

उत्तराखंड और हिमाचल का मौसम

  • उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी की संभावना बनी हुई है. तेज हवाएं 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक चल सकती हैं, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा भी बढ़ गया है. देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में भी मौसम बदला हुआ है, जहां तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है.
  • हिमाचल प्रदेश में भी 9 और 10 अप्रैल को मौसम खराब रहने की संभावना है. शिमला, कांगड़ा और कुल्लू जैसे क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी का अनुमान है. मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है और पर्यटकों व स्थानीय लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है. लगातार बदलते मौसम के कारण सड़क और हवाई यातायात पर भी असर पड़ सकता है.

दक्षिण भारत में मौसम का बदलाव

दक्षिण भारत में साइक्लोनिक सर्कुलेशन के असर से तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में बारिश का दौर जारी है. समुद्री तटीय क्षेत्रों में तेज हवाओं और भारी बारिश का खतरा बना हुआ है. मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है, क्योंकि समुद्र में ऊंची लहरें और तेज हवाएं खतरनाक साबित हो सकती हैं. इसके साथ ही कुछ इलाकों में हीटवेव की स्थिति भी बनी हुई है, जिससे एक ही समय में दो तरह के मौसमीय प्रभाव देखने को मिल रहे हैं.

नॉर्थ ईस्ट में भारी बारिश

पूर्वोत्तर भारत में मौसम सबसे ज्यादा सक्रिय बना हुआ है. असम, मेघालय, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है. हवाओं की रफ्तार 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, इससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है. कुछ इलाकों में ओलावृष्टि और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना भी जताई गई है. लगातार बारिश के कारण भूस्खलन और बाढ़ जैसे हालात बनने का खतरा बढ़ गया है, जिससे प्रशासन भी अलर्ट मोड पर है.

क्या यह मौसम बदलाव किसी बड़े तूफान का संकेत है?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह सीधे तौर पर चक्रवाती तूफान नहीं है, लेकिन कई सिस्टम एक साथ सक्रिय हैं. पश्चिमी विक्षोभ और समुद्री नमी के कारण मौसम अस्थिर है. इससे तेज हवाएं और भारी बारिश हो सकती है, जो स्थानीय स्तर पर तूफानी हालात पैदा कर सकती है.

किन राज्यों में सबसे ज्यादा असर रहेगा?

उत्तर भारत के राज्यों जैसे यूपी, बिहार, दिल्ली, राजस्थान और मध्य प्रदेश के अलावा पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में भी असर देखने को मिलेगा. कुल मिलाकर करीब 13 राज्यों में मौसम का प्रभाव रहेगा.

क्या गर्मी से राहत मिलेगी?

फिलहाल बारिश और हवाओं के कारण तापमान में गिरावट आई है, इससे गर्मी से राहत मिली है. लेकिन जैसे ही यह सिस्टम कमजोर होगा, तापमान फिर बढ़ सकता है और हीटवेव की स्थिति बन सकती है.

किसानों के लिए यह मौसम कितना खतरनाक है?

आंधी, बारिश और ओलावृष्टि फसलों के लिए नुकसानदायक होती है. खासकर गेहूं और अन्य खड़ी फसलों को नुकसान हो सकता है. इसलिए किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है.

लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

खराब मौसम के दौरान खुले में न जाएं, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें, और मौसम विभाग के निर्देशों का पालन करें. अनावश्यक यात्रा से बचें और सुरक्षित स्थानों पर रहें.



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