सरकार गई थी सुनवाई के लिए, कोर्ट ने उल्टा ठोंक दिया 50 हजार का जुर्माना
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सरकार पर नाराजगी जताई है. राज्य सरकार की तरफ से 25 हज़ार रुपये से भी कम रकम के लिए 13 साल से भी अधिक समय के बाद अपील दाखिल की गई थी, जिसको लेकर कोर्ट नाराज हो गया. हाईकोर्ट ने सरकार की अपील को खारिज करते हुए सरकार पर 50 हज़ार रुपए का हर्जाना भी लगा दिया.
इलाहाबाद हाईकोर्ट.
लखनऊः इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सरकार पर नाराजगी जताई है. राज्य सरकार की तरफ से 25 हज़ार रुपये से भी कम रकम के लिए 13 साल से भी अधिक समय के बाद अपील दाखिल की गई थी, जिसको लेकर कोर्ट नाराज हो गया. हाईकोर्ट ने सरकार की अपील को खारिज करते हुए सरकार पर 50 हज़ार रुपए का हर्जाना भी लगा दिया. कोर्ट ने कहा कि हर्जाने की रकम को सरकार जिम्मेदार अफसरों से वसूल सकती है. हाईकोर्ट ने डीएम खीरी और दो अन्य की ओर से दाखिल द्वितीय अपील पर आदेश दिया है.
24966 रुपये के भुगतान का है केस
मामले में प्रतिवादी पक्ष से सरकार ने 1992 में ईटों की खरीद की थी. उस खरीद के एवज में कुल भुगतान में से 24966.50 का भुगतान प्रतिवादी को नहीं किया गया था, जिस पर प्रतिवादी ने सिविल कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया. उस मुकदमे का फैसला वर्ष 2000 में प्रतिवादी के पक्ष में आया. इस फैसले के खिलाफ 16 महीने बाद एडीजे कोर्ट में सरकार की ओर से अपील दाखिल की गई. सरकार की अपील वर्ष 2003 में खारिज हो गई.
कोर्ट का समय खर्च कराया- कोर्ट
इसके 9 महीने की देरी से सिविल रिवीजन दाखिल किया गया जो वर्ष 2015 में खारिज हुआ. इसके बाद फरवरी 2017 में सरकार ने 24966.50 रुपए के भुगतान के वर्ष 2000 और 2003 के आदेशों के खिलाफ दूसरी अपील हाईकोर्ट में दाखिल की. हाईकोर्ट लखनऊ बेंच ने अपील को खारिज करते हुए कहा कि यह मामला एक विशिष्ट उदाहरण है, जिसमें 25 हज़ार रुपए से छोटी धनराशि की डिक्री के खिलाफ सरकार ने डिक्री की गई धनराशि से अधिक खर्च कर दिया. कोर्ट ने कहा कि सरकार ने कोर्ट का बहुमूल्य समय भी खर्च कराया.
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प्रशान्त राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं. प्रशांत राय पत्रकारिता में पिछले 8 साल से एक्टिव हैं. अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए प्रशांत राय फिलहाल न्यूज18 हिंदी के साथ पिछले तीन …और पढ़ें