सांसद-विधायक होते हुए भी बेसहारा गांव! पीलीभीत में ग्रामीण जान जोखिम में डालकर पार कर रहे नदी

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सांसद-विधायक होते हुए भी बेसहारा गांव! पीलीभीत में ग्रामीण जान जोखिम में डालकर पार कर रहे नदी


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Pilibhit News: पीलीभीत के बेरी गांव के लोग रोज़ाना अपने जीवन और सुरक्षा को जोखिम में डालकर देवहा नदी पर बने अस्थाई लकड़ी के पुलों से शहर की ओर जाते हैं. वर्षों से प्रशासन की अनदेखी के कारण यह समस्या जस की तस बनी हुई है, और आम आदमी को अपने रोजमर्रा के कामों के लिए खतरनाक रास्तों पर निर्भर रहना पड़ता है.

जान खतरे में डालकर पुल पार करते ग्रामीण

पीलीभीत: जब भी शहर से लगे बेरी गांव की तरफ रुख किया जाए, तो सबसे पहले नजर आती है देवहा नदी, और उसके ऊपर बने अस्थाई लकड़ी के पुल. यह छोटे-छोटे पुल गांव वालों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं. लोग हर दिन इन जोखिम भरे पुलों का सहारा लेते हैं. यहां से गुजरना न सिर्फ खतरनाक है, बल्कि कई बार यह लोगों की जेब पर भी असर डालता है. पढ़िए न्यूज 18 की ये रिपोर्ट.

ये स्थिति है तहसील से मात्र 5 किलोमीटर दूर बसे बेरी गांव की. यहां नदी पार करने के लिए गांव के लोगों ने थोड़ी-थोड़ी दूरी पर तीन लकड़ी के पुल बना रखे हैं. इनकी चौड़ाई मात्र 4 फीट है. स्कूल से डीएम ऑफिस की दूरी सिर्फ 6 किलोमीटर है और सदर तहसील और एसडीएम ऑफिस की दूरी लगभग 5 किलोमीटर है. बावजूद इसके जिला प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है.

मंत्री भी नहीं दे रहे ध्यान
यहां के सांसद जितिन प्रसाद केंद्रीय मंत्री हैं और सदर विधायक संजय सिंह गंगवार प्रदेश सरकार में गन्ना विकास एवं चीनी मिल राज्य मंत्री हैं. संजय सिंह गंगवार पिछले 8 साल से विधायक हैं, लेकिन फिर भी यहां आम लोगों की दिक्कतें जस की तस बनी हुई हैं. इन लकड़ी के अस्थाई पुलों का उपयोग बरेली और उत्तराखंड जाने वाले लोग भी करते हैं, क्योंकि यह शहर से नजदीक है. स्थानीय लोग लगातार मांग कर रहे हैं कि सरकार इस दिशा में ध्यान दे और इस स्थान पर एक स्थायी पुल का निर्माण कराए.
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एक पुल बनाने में आया 50 हजार खर्च
नदी पर अस्थाई पुल बनाने वाले लोग बताते हैं कि उन्होंने आम जनता की सुविधा के लिए यह पुल बनाया है. एक पुल बनाने में लगभग 50 हजार रुपए का खर्च आया. लोग अपनी सुविधा अनुसार इस पुल पर 10 रुपए का भुगतान करते हैं. यहां सुबह 5 बजे से लेकर रात 7 से 8 बजे तक लगातार आवागमन रहता है. जिनके पास पैसा नहीं होता, उनके लिए स्कैनर की व्यवस्था भी की गई है, ताकि वे आसानी से पुल पार कर सकें.

दुर्घटना का बना खतरा
हालांकि यह पुल लोगों की सुविधा के लिए बना है, लेकिन इसके चलते दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है. गांव वाले अपने जोखिम पर इन पुलों का उपयोग करते हैं. सरकारी अधिकारी, नेता और प्रशासनिक लोग आते-जाते हैं, लेकिन वर्षों से दर्जनों गांव के लोग इस कठिनाई को झेल रहे हैं, जिस पर किसी का ध्यान नहीं जाता.

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Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मैने शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 ( नेटवर्क 18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News 18 (नेटवर्क 18) के साथ जुड़ी हूं…और पढ़ें

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मैने शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 ( नेटवर्क 18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News 18 (नेटवर्क 18) के साथ जुड़ी हूं… और पढ़ें

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पीलीभीत में ग्रामीण जान जोखिम में डालकर पार कर रहे नदी, पढ़ें रिपोर्ट



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