हिमाचल ही नहीं, यूपी में भी हो सकती है सेब की खेती.. कौशांबी के किसान का कमाल
कौशांबी: सेब को शीतलहरी फल कहा जाता है, क्योंकि इसकी खेती ठंडे मौसम और पहाड़ी इलाकों में ही अच्छी मानी जाती है. यही वजह है कि सेब की बागवानी ज़्यादातर हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में की जाती है. लेकिन उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के शाहजहांपुर गांव के रहने वाले किसान बनवारी लाल ने सेब की खेती से अलग पहचान बना रखी है. किसान बनवारी लाल ने गर्म इलाके में सेब की खेती कर एक नई मिसाल कायम की है.
क्या है सेब की खेती का तरीका
गर्मियों में तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. उस समय चाहे मनुष्य हो या हरे भरे पौधे चिलचिलाती गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पाते है, लेकिन किसान बनवारी लाल की कड़ी मेहनत से सेब की अच्छी बागवानी कर रहे हैं और बाग में पेड़ अच्छी तरह फल दे रहे हैं. आधुनिक तकनीक, सही किस्म के पौधे और वैज्ञानिक तरीके से देखभाल के कारण उनकी बागवानी सफल हो रही है.
दो सालों से कर रहे हैं बागवानी
किसान बनवारी लाल लगभग 50 वर्षों से ही खेती किसानी कर रहे हैं, लेकिन उन्हें नई-नई तकनीक की खेती करने में अलग ही आनंद आता है. इसलिए, वह खोज कर नई-नई प्रजाति की खेती कर रहे हैं और उन्हें अच्छा मुनाफा भी हो रहा है. बनवारी लाल दो सालों से से की बागवानी भी कर रहे हैं. उन्होंने कौशांबी की धरती पर 40 से 42 तापमान में भी अच्छी तरह से सब की पैदावार कर रहे हैं.
कौशांबी जैसे गर्म इलाके में सेब की खेती संभव
किसान बनवारी लाल बताते हैं कि शुरुआत में लोगों को यकीन नहीं था कि कौशांबी जैसे गर्म इलाके में सेब की खेती संभव है. लेकिन मेहनत और लगन से नई तकनीक से आज उनके बाग में सेब की अच्छी पैदावार हो रही है.
किसान बनवारी लाल ने बताया कि सेब की खेती पिछले दो वर्षों से कर रहे हैं इन्होने पहली बार सेब की अच्छी पैदावार किये है. शुरुआत में ही हिमाचल प्रदेश से 20 पौधे मंगाए गए थे जो आज सभी पौधे जीवित है और फल भी दे रहे हैं. बनवारी लाल ने कहा अगर कोई भी किसान सेब की खेती करना चाहता है तो यहां बहुत ही आसानी से कर सकता है. क्योंकि 40 से 42 तापमान में भी यहां की जलवायु मिट्टी सेब की खेती के लिए सूट कर जाता है. पिछले वर्ष एक बार सेब की फसल की तोड़ाई कर चुका हूं उस समय एक सेब का फल 200 ग्राम के थे. और इस वर्ष दूसरी फसल पुष्प अवस्था में है.
तैयार होने में लगता है 1 साल
इस बागवानी को तैयार करने में 1 साल पूरा लग जाता है और दूसरे वर्ष पौधों में फूल निकलने शुरू हो जाते हैं. इन पौधों को लगाने का सही समय होता है नवंबर और दिसंबर में है इसकी पौधे की रोपाई कर देना चाहिए. ताकि अच्छे समय पर पौधे तैयार हो जाए और फल निकलना शुरू हो जाए.
बरतनी होती है सावधानी
सेब के पौधे में फरवरी और मार्च में ही फूल निकलना शुरू हो जाता है और जून के महीने में फल बन जाते हैं. जब भी फूल निकलना शुरू करें, तो उसे समय पौधों पर बहुत ध्यानपूर्वक ध्यान देना चाहिए, क्योंकि फूल झड़ने की भी संभावना रहती है. अगर फूल झड़ते हैं तो पौधों में कीटनाशक दबाव का जरूर इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि फूल को झड़ने से बचाए और फलों की पैदावार अधिक हो. अगर पुष्प अवस्था में ध्यान दे दिया जाए तो फल निकालने के बाद कितना भी तूफान आ जाए फल नहीं झड़ते हैं. क्योंकि इसकी टहनी बहुत ही मजबूत होती है. इसलिए किसान बनवारी लाल ने बताया कि जब कौशांबी की धरती जलवायु में सेब पैदावार हो सकती है तो अन्य किस भी इसकी बागवानी अच्छे से कर सकते हैं और अच्छा मुनाफा भी कमा सकते हैं.