हुनर ऐसा कि देखते रह जाएंगे! गोरखपुर के इन ऑटो हब में पुरानी गाड़ियों को मिलता है नया लुक, वो भी बजट के अंदर
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गोरखपुर शहर अब केवल अपनी धार्मिक पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पुरानी गाड़ियों को नया जीवन देने वाले एक बड़े तकनीकी केंद्र के रूप में उभर चुका है. गोलघर से लेकर पुलिस लाइन रोड तक, यहां के मैकेनिकों के हाथों में ऐसा जादू है कि वे खराब पुरानी गाड़ियों को भी लग्जरी लुक दे देते हैं. चाहे इंजन का जटिल काम हो या बुलेट का मॉडिफिकेशन, इन इलाकों में न केवल आसपास के जिलों से बल्कि नेपाल तक से लोग खिंचे चले आते हैं. जानिए गोरखपुर के उन खास अड्डों के बारे में, जहां पुरानी गाड़ी को नई पहचान मिलती है वो भी बेहद किफायती दाम में.
गोरखपुर: उत्तर प्रदेश का गोरखपुर शहर अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता के साथ-साथ अब उत्तर भारत के एक बड़े ऑटो रिपेयरिंग हब के रूप में पहचाना जाने लगा है. यहां की गलियों में सुबह से शाम तक गाड़ियों की ऐसी रौनक रहती है कि कहीं इंजन खुल रहा होता है, तो कहीं सर्विसिंग और मॉडिफिकेशन का काम युद्ध स्तर पर चलता है. शहर के कुछ खास इलाके तकनीकी कारीगरी के लिए दुनिया भर में मशहूर हो चुके हैं.
गोलघर का काली मंदिर क्षेत्र मॉडिफिकेशन के शौकीनों के लिए सबसे पसंदीदा जगह है. यहां के मैकेनिक पुरानी बाइक और स्कूटर का पूरा हुलिया बदलने में माहिर हैं. यहां गाड़ी की सिर्फ मरम्मत नहीं होती, बल्कि ग्राहकों की पसंद के अनुसार उनमें एलईडी लाइट्स, डिजिटल मीटर और कस्टम पेंटिंग जैसे बदलाव किए जाते हैं. युवाओं के बीच यह इलाका इसलिए लोकप्रिय है क्योंकि यहां पुरानी से पुरानी गाड़ी को भी लेटेस्ट मॉडल जैसा लुक दे दिया जाता है.
अगर गाड़ी के इंजन में कोई बड़ी समस्या है, तो विजय चौक के मैकेनिकों का कोई सानी नहीं है. यहां इंजन के पुर्जे-पुर्जे को खोलकर उसे दोबारा इस तरह असेंबल किया जाता है कि गाड़ी शोरूम जैसी कंडीशन में आ जाती है. यहां की साख इतनी मजबूत है कि देवरिया, कुशीनगर, बस्ती और सिद्धार्थनगर जैसे जिलों के अलावा पड़ोसी देश नेपाल से भी ग्राहक अपनी गाड़ियां लेकर पहुंचते हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि ग्राहकों के सामने ही किफायती दाम में काम पूरा कर दिया जाता है.
गोरखपुर के इस इलाके में बुलेट बनती है बिल्कुल नई
पुलिस लाइन रोड की पहचान खास तौर पर बुलेट बाइक की सर्विसिंग और मॉडिफिकेशन के लिए है. यहां के मैकेनिक सदरे आलम बताते हैं कि अगर कोई गाड़ी पूरी तरह खराब हालत में भी दुकान तक पहुंच जाए, तो उसे नया बनाना उनका काम है. यहां सड़ी-गली बुलेट को पूरी तरह खोलकर उसमें डिस्क ब्रेक, नए सस्पेंशन और अपडेटेड टेक्नोलॉजी जोड़कर बिल्कुल फ्रेश लुक दिया जाता है. यह काम इतनी बारीकी से होता है कि अंतर करना मुश्किल हो जाता है.
इन ऑटो हब्स की लोकप्रियता की सबसे बड़ी वजह यहां का भरोसा और किफायती खर्च है. एक नई गाड़ी खरीदने की तुलना में काफी कम पैसों में पुरानी गाड़ी को एक नया और स्टाइलिश रूप मिल जाता है. यही कारण है कि इन इलाकों में साल भर ग्राहकों का तांता लगा रहता है. गोरखपुर के ये मैकेनिक अपनी तकनीकी कला और हुनर से न केवल लोगों का पैसा बचा रहे हैं, बल्कि शहर को ऑटो इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक नई पहचान भी दे रहे हैं.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें