अक्टूबर माह में किसान करें मूली की खेती, एक सीजन में होगी लाखों की कमाई

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अक्टूबर माह में किसान करें मूली की खेती, एक सीजन में होगी लाखों की कमाई


भारत में मूली एक लोकप्रिय और आम सब्जी है. जिसे लगभग हर मौसम में उगाया जा सकता है. इसका स्वाद हल्का तीखा और कुरकुरा होता है, साथ ही यह स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद है.मूली में फाइबर, विटामिन सी, कैल्शियम और पोटैशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है. यही कारण है कि किसान इसकी खेती कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.

कृषि के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव रखने वाले रायबरेली जिले के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के प्रभारी अधिकारी शिव शंकर वर्मा (बीएससी एग्रीकल्चर डॉ राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद ) लोकल 18 कहा हैं कि मूली की खेती आसान और कम खर्चीली है. सही मौसम और देखभाल से किसान अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं.यह फसल न सिर्फ घरेलू उपयोग के लिए बल्कि बाजार में भी अच्छे दाम दिला सकती है.

मौसम और समय
मूली की खेती सामान्यतः शिव शंकर वर्मा के मुताबिक ठंडे मौसम में अधिक सफल होती है.उत्तर भारत में इसे खरीफ, रबी और ग्रीष्म – तीनों ही सीजन में बोया जा सकता है.खरीफ में जून-जुलाई से लेकर सितंबर तक, रबी में अक्टूबर से दिसंबर तक और गर्मी में फरवरी से अप्रैल तक इसकी बुवाई की जाती है. हालांकि, सबसे अच्छी फसल अक्टूबर से दिसंबर में बोने पर मिलती है, क्योंकि इस समय जलवायु अनुकूल रहती है.

भूमि और तैयारी
मूली की खेती के लिए दोमट और रेतीली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है.खेत की मिट्टी भुरभुरी और जल निकासी वाली होनी चाहिए. खेत की अच्छी तरह जुताई करके उसमें गोबर की खाद या कम्पोस्ट डालना लाभकारी होता है. बीज बोने से पहले मिट्टी को हल्की नमी देना जरूरी है ताकि अंकुरण जल्दी हो सके.

बीज और बुवाई
मूली की बुवाई कतारों में की जाती है. कतार से कतार की दूरी लगभग 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 5 से 7 सेंटीमीटर रखनी चाहिए. बीजों को 1.5 से 2 सेंटीमीटर गहराई में बोना उपयुक्त रहता है. समय पर सिंचाई करने से फसल की गुणवत्ता अच्छी मिलती है.

सिंचाई और देखभाल
खरीफ सीजन में बारिश के आधार पर सिंचाई कम करनी पड़ती है, लेकिन रबी और गर्मियों में 6-7 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई आवश्यक होती है.खरपतवार को हटाने के लिए निराई-गुड़ाई समय-समय पर करनी चाहिए.साथ ही, फसल को कीट और रोगों से बचाने के लिए जैविक दवाइयों का प्रयोग बेहतर होता है.

फसल उत्पादन
मूली की फसल किस्म के अनुसार 40 से 60 दिनों में तैयार हो जाती है.जड़ें जब उचित आकार की हो जाएं.तो उन्हें खींचकर निकाल लेना चाहिए, वरना ज्यादा देर होने पर स्वाद कड़वा हो सकता है.एक हेक्टेयर खेत से औसतन 200- 250 क्विंटल मूली का उत्पादन लिया जा सकता है.



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