अक्टूबर से ठंड गायब! मंडरा रहा धान, मूंग की फसलों पर संकट; खतरे में आलू और सरसों की बुवाई

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अक्टूबर से ठंड गायब! मंडरा रहा धान, मूंग की फसलों पर संकट; खतरे में आलू और सरसों की बुवाई


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Farming Tips : एएमयू के असिस्टेंट प्रोफेसर ताहिर मोहम्मद चौहान ने बताया कि अक्टूबर में भी ठंड का असर नहीं दिख रहा है, जिससे खरीफ फसलों जैसे धान और मूंग को नुकसान पहुंच रहा है. वहीं, सरसों और आलू की बुवाई भी प्रभावित होने लगी है, जो किसानों के लिए चिंता का सबब बन गई है.

अलीगढ़. उत्तर प्रदेश में मौसम का मिज़ाज लगातार करवट ले रहा है. सितंबर में जहां तेज गर्मी ने लोगों और किसानों को परेशान किया, वहीं अब अक्टूबर की शुरुआत में बारिश का दौर जारी है. इस बार अक्टूबर की शुरुआत में ठंड का एहसास लगभग गायब है, जिससे खरीफ सीजन की फसलों और सब्जियों की बुवाई दोनों पर असर पड़ रहा है. बेमौसम बारिश और असामान्य गर्मी ने खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाया है, जबकि नई बुवाई का सही समय भी बिगड़ गया है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम का यह बदलाव और जलवायु परिवर्तन किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रहा है.

एएमयू के एग्रीकल्चर संकाय के CAE में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर ताहिर मोहम्मद चौहान ने जानकारी दी कि कृषि से जुड़ी सभी गतिविधियां डीन प्रोफेसर आर.यू. खान और CAE के कोऑर्डिनेटर प्रोफेसर इक़बाल अहमद के दिशा-निर्देश में संचालित होती हैं. उन्होंने कहा कि इस बार अक्टूबर के महीने में अपेक्षित ठंड महसूस नहीं हो रही, जिसका सीधा असर फसलों पर पड़ रहा है. चौहान के अनुसार, जलवायु परिवर्तन आज किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है. पहले मानसून का समय तय रहता था, लेकिन अब बारिश का पैटर्न बदल गया है. कभी ज़रूरत न होने पर बारिश हो जाती है और जब ज़रूरी होती है तब आसमान सूखा रह जाता है.

किसानों की उम्मीदों पर मौसम ने फेरा पानी
डॉ. चौहान ने बताया कि अक्टूबर महीने में किसान भाइयों ने बुवाई और कटाई का काम पहले से तय कर रखा था, लेकिन मौसम के अचानक बदलते मिज़ाज ने उनकी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया. बाजरा, मूंग और धान जैसी फसलें हार्वेस्टिंग और थ्रेशिंग स्टेज पर थीं, जिन पर बेमौसम बारिश का सीधा नकारात्मक असर पड़ा है. खेतों में कटी हुई फसलें भारी मात्रा में खराब हो गईं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.

आलू और सरसों की फसलों होंगी प्रभावित
डॉ. चौहान ने आगे बताया कि अलीगढ़ क्षेत्र में सामान्यतः अक्टूबर के पहले और दूसरे हफ्ते में सरसों की बुवाई की जाती है और यह किसानों के लिए सबसे ज़्यादा मुनाफ़ा देने वाली फसल मानी जाती है. लेकिन इस बार मौसम में आए बदलाव की वजह से सरसों की बुवाई देर से हो रही है. इसका सीधा असर यह होगा कि सरसों के साथ-साथ गार्डन पी (सब्जी वाली मटर) और आलू जैसी फसलें भी लगभग एक ही समय पर बाजार में पहुंचेंगी. ऐसे हालात में किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने में दिक़्क़त होगी.

मक्का बन सकता है विकल्प
डॉ. चौहान ने सुझाव दिया कि ऐसी स्थिति में किसान कटी हुई फसल को तुरंत खेतों से निकालकर सुरक्षित स्थान पर रखें, ताकि नुकसान कम से कम हो. उन्होंने बताया कि अक्टूबर के मध्य तक सरसों की बुवाई संभव है, लेकिन यदि देरी हो जाए तो किसान विकल्प के तौर पर मक्का बो सकते हैं. इसके बाद गेहूं, चना और मसूर जैसी रबी फसलें बोई जा सकती हैं. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि इस बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन को देखते हुए थोड़ी सावधानी बरतें, ताकि उन्हें फसलों के बड़े नुकसान का सामना न करना पड़े.

मृत्‍युंजय बघेल

मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु…और पढ़ें

मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु… और पढ़ें

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