अब बेल पर भी उगेंगे टमाटर, झांसी की इस यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने दिखाया कमाल

0
अब बेल पर भी उगेंगे टमाटर, झांसी की इस यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने दिखाया कमाल


Last Updated:

Rani Laxmi Bai central agricultural university: टमाटर की क्यारी में वह फूल गोभी, बंद गोभी और रंगीन गोभी की भी फसल पैदा कर रहे हैं. इसमें ड्रिप सिस्टम से हर दूसरे दिन….

फाइल फोटो 

झांसी: हाथ में हुनर और कुछ करने की इच्छा हो तो इस दुनिया में कुछ भी असम्भव नहीं है. रानी लक्ष्मीबाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों ने इस बात को सच कर दिखाया है. अब तक जिस टमाटर के पौधे को जमीन में बिछाया जाता था या बिखरा दिया जाता था अब उसे अन्य बेल वाली सब्जियों में लटकाया जा सकता है. बुन्देलखण्ड की कंकरीली जमीन पर वैज्ञानिकों ने लौकी, कद्दू, सेम की तरह बेल फैला दी और इसमें टमाटर को गुच्छों की तरह लटका लिया. कई किस्मों के बीज को मिलाकर नई प्रजाति तैयार करने वाले वैज्ञानिकों का दावा है कि इस बीज से किसान कम कीमत में 4 से 5 गुणा अधिक कमाई कर सकता है. यह सारा प्रयोग विश्वविद्यालय में बने पॉलीहाउस में किया जा रहा है.

किसान ले रहे ट्रेनिंग
केन्द्रीय विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की इस खोज का पता चलने के बाद अब तमाम महाविद्यालयों के विद्यार्थियों के साथ प्रगतिशील कृषक और उत्सुक लोग यहां पहुंच रहे हैं. इन सभी लोगों को विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एके सिंह से लेकर वैज्ञानिक विस्तार से बता रहे हैं और बुन्देलखण्ड की भूमि पर कम खर्च में अधिक उपज करने की ट्रेनिंग भी दी जा रही है.

आसानी से बना सकते हैं पॉलीहाउस
नेचुरल पॉलीहाउस कोई भी किसान किसी भी छोटे से टुकड़े में तैयार कर सकता है. कॉलिज ऑफ हॉर्टिकल्चर एण्ड फॉरिस्ट के डीन मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि 200, 500 या 1000 स्क्वॅयर फीट में पॉलीहाउस तैयार किया जा सकता है. पॉलीहाउस के निर्माण में आने वाली लागत में 50 फीसदी का अनुदान उत्तर प्रदेश सरकार देती है. उन्होंने बताया कि 200 स्क्वॅयर फीट का पॉलिहाउस 3 से 4 लाख रुपये, 500 स्क्वॅयर फीट का 6 से 7 लाख और 1,000 स्क्वायर फीट का पॉलीहाउस 8 से 10 लाख रुपये में बनकर तैयार हो जाता है. एक बार पॉलीहाउस बनकर तैयार हो गया तो इसके लोहे का ढांचा 20 से 25 साल और पॉलिथिन 5 से 7 साल तक चलती है.

अन्य सब्जियों की भी होती है खेती
नेचुरल पॉलीहाउस में केवल एक फसल तक वैज्ञानिक सीमित नही हैं कई प्रयोग कर रहे हैं. टमाटर की क्यारी में वह फूल गोभी, बंद गोभी और रंगीन गोभी की भी फसल पैदा कर रहे हैं. इसमें ड्रिप सिस्टम से हर दूसरे दिन पानी लगाया जाता है. एक घंटे के अंदर 1,000 स्क्वॅयर फिट की सिंचाई हो जाती है. इसी तकनीक से पौधों तक दवा और खाद पहुंचाई जाती है.

homeuttar-pradesh

झांसी की यूनिवर्सिटी का कारनामा, अब बेल पर भी उगा सकते हैं टमाटर



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *