अमेठी में जनसुनवाई व्यवस्था; शिकायतें बढ़ीं, समाधान गायब, कोई सेना का जवान तो कोई किसान सब परेशान
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Amethi latest news : जिले में जनता की समस्याओं को दूर करने के लिए संपूर्ण समाधान दिवस, जनसुनवाई और थाना स्तर पर नियमित बैठकों की व्यवस्था तो बनाई गई है लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट है. जिले में शिकायतों के निस्तारण के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है.
अमेठी: यूपी के अमेठी जिले में हर महीने के पहले और तीसरे शनिवार को तहसील स्तर पर संपूर्ण समाधान दिवस आयोजित किया जाता है. वहीं दूसरे और चौथे शनिवार को कोतवाली और थानों पर समाधान दिवस रखा जाता है. इसके अलावा सभी सरकारी कार्यालयों में प्रतिदिन जनसुनवाई की जिम्मेदारी तय है. लेकिन इन व्यवस्थाओं का लाभ जनता को मिल नहीं पा रहा है. पूरा अमला अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कागजों में करते हुए नजर आता है जबकि जमीनी स्थिति बिल्कुल अलग है.
चार तहसीलें और 13 कोतवाली, हर जगह फरियादियों की लंबी कतारें
अमेठी जिले में चार तहसीलें और 13 से अधिक कोतवाली क्षेत्रों में रोजाना सैकड़ों लोग अपनी अलग-अलग शिकायत लेकर पहुंचते हैं. इनमें किसान, महिलाएं, बुजुर्ग, मजदूर, सेना के जवान और आम नागरिक शामिल हैं. सभी को उम्मीद होती है कि उनकी समस्या का समाधान होगा लेकिन उन्हें मिलता है सिर्फ तारीख. जनता बताती है कि शिकायत पत्र लेने के बाद महीनों तक कोई कार्रवाई नहीं की जाती. शिकायतें फाइलों में दब जाती हैं और फरियादी बार-बार लौटकर आने को मजबूर होता है.
जमीन पर कब्जे की बढ़ीं घटनाएं, फरियादी परेशान
सोनरी गांव के निवासी अमित कुमार सिंह बताते हैं कि दबंग उनकी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं. कई बार शिकायत करने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई. उप अधिकारियों के आदेश कागजों में ही रह जाते हैं. उन्हें खेती से रोका जा रहा है जिससे उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है. इसी तरह कोरारी गांव के एक सेना के जवान की जमीन पर भी दबंगों ने कब्जा कर लिया है. रास्ता तक बंद कर दिया गया है. जवान का कहना है कि वह दिल्ली में तैनात हैं और छुट्टी मिलना भी मुश्किल होता है. लेकिन जमीन बचाने के लिए उन्हें बार-बार नौकरी छोड़कर आना पड़ रहा है. दो साल से शिकायत चल रही है लेकिन अभी तक समाधान नहीं हुआ.
अधिकारियों की सफाई, जल्द होगा निस्तारण
इस पूरे मामले पर अपर जिलाधिकारी अर्पित गुप्ता ने बताया कि जो भी शिकायतें आ रही हैं उनके निस्तारण के लिए विभागीय अधिकारियों, पुलिस और राजस्व कर्मियों को आवश्यक दिशानिर्देश दिए गए हैं. लंबित मामलों की जांच की जाएगी और जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी होगी. उन्होंने दावा किया कि जल्द ही सभी शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.
जनता को समाधान नहीं, सिर्फ आश्वासन मिल रहा है
अमेठी में जनसुनवाई की बनाई गई पूरी प्रणाली व्यवस्था के अनुसार तो सही है लेकिन अमल में कमजोर साबित हो रही है. फरियादी बार-बार चक्कर काटते हैं और अधिकारी बार-बार आश्वासन देते हैं. ऐसे में जिले की न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं. जनता का भरोसा भी टूटने लगा है क्योंकि समाधान दिवस का उद्देश्य पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा है.