अलीगढ़ के ब्लाइंड मोहम्मद समर ने AMU से उर्दू में पीएचडी पूरी की, अब प्रोफेसर

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अलीगढ़ के ब्लाइंड मोहम्मद समर ने AMU से उर्दू में पीएचडी पूरी की, अब प्रोफेसर


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अलीगढ़ के दृष्टिहीन मोहम्मद समर ने एएमयू से उर्दू में पीएचडी (2024) पूरी कर मिसाल कायम की. परिवार के समर्थन से उन्होंने तमाम मुश्किलों को पार किया और अब प्रोफेसर बनने का सपना है.

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जानिए अलीगढ़ के ब्लाइंड मोहम्मद समर का संघर्ष से कामयाबी तक का सफर

हाइलाइट्स

  • मोहम्मद समर ने एएमयू से उर्दू में पीएचडी पूरी की.
  • दृष्टिहीन होने के बावजूद समर ने तालीम जारी रखी.
  • अब समर का प्रोफेसर बनने का सपना है.

अलीगढ़: अलीगढ़ के मोहम्मद समर ने दिखा दिया कि अगर मन में कुछ करने की ठान लो तो कोई भी मुश्किल रोक नहीं सकती. समर जन्म से ही देख नहीं सकते थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. पढ़ाई में कभी पीछे नहीं हटे और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से उर्दू में पीएचडी पूरी करके सबको अपनी लगन और मेहनत का कायल बना दिया. 2024 में उन्होंने अपनी पीएचडी पूरी की. समर ने अपनी कामयाबी से ये साबित कर दिया है कि अगर इरादे बुलंद हों तो सब कुछ मुमकिन है.

समर ने AMU से उर्दू में पीएचडी की
मोहम्मद समर ने बताया कि वो अलीगढ़, उत्तर प्रदेश के ऊपरकोर्ट के रहने वाले हैं. उन्हें बचपन से दिखाई नहीं देता. उनकी पढ़ाई-लिखाई नर्सरी से लेकर पीएचडी तक अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से ही हुई है. उन्होंने 2024 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग से उर्दू विषय में पीएचडी पूरी की है. उन्होंने बताया कि नर्सरी से लेकर 10वीं तक की पढ़ाई उन्होंने एएमयू के अहमदी स्कूल से की. इसके बाद 12वीं की पढ़ाई एएमयू के ही मोंटू सर्कल स्कूल से की. ग्रेजुएशन उन्होंने एएमयू से ही अंग्रेजी साहित्य में किया. इसके बाद एएमयू से ही उर्दू में एमए और फिर उर्दू में ही पीएचडी की.

अब प्रोफेसर बनने का सपना
मोहम्मद समर बताते हैं कि उनके परिवार में उनके माता-पिता के अलावा 4 भाई और 3 बहनें हैं. उनके पिता कबाड़ का काम करते हैं. समर को पीएचडी के दौरान पढ़ाई का सामान जुटाने में बहुत दिक्कत हुई क्योंकि ये चीजें ब्रेल लिपि में नहीं मिलती, छपी हुई ही मिलती हैं. ऐसे में एक नेत्रहीन छात्र के लिए पढ़ाई का सामान इकट्ठा करना बहुत मुश्किल होता है. समर बताते हैं कि उन्हें अपनी जिंदगी में कई बार अपनी कमी का एहसास हुआ लेकिन उन्हें अपने जैसे और भी बहुत लोग मिले जो शारीरिक रूप से कमजोर थे. उन्हें देखकर समर को हिम्मत मिली और वो अपनी पढ़ाई में आगे बढ़ते गए. इस काम में उनके परिवार ने उनका पूरा साथ दिया. अब पीएचडी पूरी होने के बाद समर लेक्चरर बनना चाहते हैं. वो प्रोफेसर बनकर अपने जैसे बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं.

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