आखिर क्या है ये ‘सहफसली खेती’, जिसकी मदद से गोंडा की छात्रा कर रही अच्छी कमाई?

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आखिर क्या है ये ‘सहफसली खेती’, जिसकी मदद से गोंडा की छात्रा कर रही अच्छी कमाई?


गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले विकासखंड मुजेहना की एक छात्रा पढ़ाई के साथ-साथ खेती करके एक नई मिसाल पेश कर रही है. जहां एक तरफ वह अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान देती है, वहीं दूसरी ओर सहफसली खेती (एक साथ कई फसलें उगाना) करके अच्छी आमदनी भी कमा रही है.

छात्रा ने पारंपरिक खेती के बजाय सहफसली खेती को अपनाया. इस पद्धति में एक ही खेत में अलग-अलग फसलें एक साथ उगाई जाती हैं, जैसे सब्जियां, दालें और कुछ फलदार पौधे. इससे जमीन का बेहतर उपयोग होता है और जोखिम भी कम हो जाता है. अगर एक फसल खराब हो जाए, तो दूसरी फसल से नुकसान की भरपाई हो जाती है.

क्या है क्वालिफिकेशन?
लोकल 18 से बातचीत के दौरान छात्रा नंदिनी वर्मा बताती हैं कि उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर ली है और आगे भी तैयारी कर रही हैं. पढ़ाई के साथ-साथ वो सहफसली की खेती कर रही हैं, क्योंकि उनका बचपन से ही खेती-किसानी का काफी शौक था.

नंदिनी वर्मा बताती हैं कि हमको सहफसली खेती का आइडिया यूट्यूब से मिला है. पहले हम पारंपरिक तरीके से खेती करते थे, जिसमें लागत अधिक लगता था और मुनाफा कम होता है. फिर हमें सहफसली खेती के बारे में जानकारी मिली. फिर मैंने काफी रिसर्च किया और हमे पता चला कि एक ही खेत में एक साथ कई प्रकार के फसल की खेती को सहफसली खेती कहते हैं.

एक ही खेत में सात फसलों की खेती का सफल प्रयोग
नंदिनी वर्मा बताती हैं कि हम इस समय लहसुन के साथ लौकी, कद्दू, खीरा, तोरई, ककड़ी और धनिया की खेती कर रहे हैं. इससे हमें यह फायदा हो रहा है कि एक ही लागत में हमारी सारी फसल तैयार हो रही है. जैसे ही लहसुन की हार्वेस्टिंग होगी, खाली पड़ी जमीन में लौकी, खीर, तोरई, ककड़ी और कद्दू की लता फैल जाएगी और हमारी लागत लहसुन से ही निकल आएगी और मुनाफा लौकी, खीर, तोरई, ककड़ी, कद्दू और धनिया से हो जाएगा.

सहफसली खेती का मतलब है एक ही खेत में एक साथ कई फसलों की खेती करना. इससे जमीन का बेहतर उपयोग होता है और किसान को अलग-अलग फसलों से कमाई का मौका मिलता है. अगर एक फसल में नुकसान हो भी जाए, तो दूसरी फसल से उसकी भरपाई हो जाती है. नंदिनी वर्मा बताती हैं कि लहसुन का हार्वेस्टिंग होने के बाद मचान लगा दिया जाएगा और लता वर्गीय फसलें मचान पर फैल जाएंगी. फिर जमीन में हम कोई और फसल उगा पाएंगे.



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