आखिर क्यों महाकुंभ में लग रही है बार बार आग । क्यों हो रहा है रोज एक कांड क्या है कारण?
जैसा कि प्रयागराज में महाकुंभ मेला लगा हुआ है। इसी के दौरान करोड़ों श्रद्धालु कुंभ स्नान करने प्रयागराज आए हुए हैं।
बताया जाता है कि यह महाकुंभ 144 वर्ष बाद आया हुआ है। इसी के चलते करोड़ों श्रद्धालु महाकुंभ स्नान करने आए थे।
इसी दौरान कुंभ में 19 जनवरी 2025 दिन रविवार को हुआ एक भीषण हादसा – तुलसी मार्ग सेक्टर 19 के रेलवे पुल के नीचे आग लग गई। जिसके बाद गीता प्रेस गोरखपुर के कई शिविर जो है वह आग की जद में आ गए।
इसके बाद आग इतनी ज्यादा विकराल हो गई कि, उसपर काबू नहीं पाया गया। और देखते ही देखते कई टेंट कई शिविर आग की चपेट में आ गए। और जल कर राख हो गए। कुछ ही मिनट में दर्जनो टेंट और शिविर जल गए।
जिसमें रखा गृहस्ती का समान जलकर राख हो गया। जिस दौरान आग लगी इस समय पुल के ऊपर ट्रेन जा रही थी। गनीमत यह रही की ट्रेन तक लपक नहीं पहुंची। जिससे ट्रेन सही सलामत निकल गई ।
आग के अफरा- तफरी में एक व्यक्ति घायल
जिसमें मची भगदड़ में एक व्यक्ति भी घायल हो गया इस दौरान लोगों में अफरा तफरी मच गई।
बताया जा रहा है की घटना स्थल पर जले सिलेंडर भी बरामत हुए हैं। घटना के बारे में जानकारी मिलते ही फायर ब्रिगेड एक्टिव हुआ ,और मौके पर आग बुझाने के लिए पहुंच गया।
इस दौरान लोगों की भीड़ घटना स्थल पर मौजूद हो गई। जिसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी भी मौके पर पहुंचे, और उन्होंने इस घटना का जायजा लिया वहां पर मौजूद लोगों ने बताया कि आग एक स्थान पर लगी, और फिर देखते ही देखते जब आग पर काबू नहीं पाया गया। तो आग बढ़ती चली गई बताया गया कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई सभी सुरक्षित रहे ।
मौनी अमावस्या वाले दिन हुआ भयानक हादसा
प्रयागराज महाकुंभ मेला के दौरान मौनी अमावस्या वाले दिन एक दर्दनाक हादसा हो गया।
आइए जाने हादसा के बारे में;
जैसा की मेला के क्षेत्र में भीड़ मची थी। और मौनी अमावस्या वाले दिन भीड़ दोगुनी हो गई। उससे भी कई अधिक भीड़ हो गई। जिसके चलते पोल नंबर 155 पर आराम कर रहे कुछ श्रद्धालु जो की भगदड़ मचने के दौरान अपनी जान गवा बैठे हैं
बताया जाता है कि
रात 1 से 2:00 बजे के करीब यह हादसा हुआ जब भारी भीड़ बैरियर तोड़ के संगम स्थल पहुंची तो यह हादसा हुआ।
मौनी अमावस्या;
2025 में महाकुंभ के दौरान भगदड़ की घटना हुई थी। इस भगदड़ में कई लोग घायल हुए थे। हालांकि इसके बावजूद रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया था।
मौनी अमावस्या पर भगदड़ की घटना
- मौनी अमावस्या के दिन संगम तट के पास भीड़ था। दबाव बढ़ने से भगदड़ मच गई थी।
- भगदड़ की वजह संगम तट के कुछ दूर पहले बेन द्वार पर आने- जाने वाले श्रद्धालुओं को टकराना था।
- इसके बाद आगे निकलने के लिए धक्का -मुखी शुरू हो गई और भगदड़ मच गई।
- भगदड़ में कई लोग घायल हुए थे।
मौनी अमावस्या पर स्नान
- मौनी अमावस्या वाले दिन महाकुंभ मेले में 7.64 करोड़ श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में स्नान किया था।
- इस दिन हेलीकॉप्टर से श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा की गई थी।
- मौनी अमावस्या वाले दिन स्नान करने से पापों का प्रायश्चित हो जाता है।
मौनी अमावस्या का महत्व
- मौनी अमावस्या को मौन रहने और आत्मचिंतन के लिए विशेष दिन माना जाता है
- इस दिन व्रत रखने से सभी ग्रह दोष समाप्त होते हैं और व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि आती है
भगदड़ के दौरान कितने श्रद्धालुओं ने जान गंवाई
प्रयागराज के महाकुंभ में मौनी अमावस्या वाले दिन भगदड़ के दौरान 30 लोगों की मौत हो गई थी। यह हादसा संगम न्योज़ के पास हुआ था।
इस भगदड़ में 36 लोग घायल हुए हैं यह संख्या प्रशासन की पुष्टि की थी ।
क्यों लग गया सड़को पर जाम ?
महाकुंभ में भीड़ को देखते हुए 5 फरवरी तक संगम नगरों में VIP प्रोटोकॉल को बंद कर दिया गया था। लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी के 5 फरवरी के संगम स्नान में स्नान के बाद में लगातार VIP मूवमेंट बैंड गया है हर रोज कोई ना कोई VIP संगम स्नान के लिए पहुंच रहा है।
VIP प्रोटोकॉल लागू होने के कारण शहर में जाम जैसे स्थित बन रहे हैं। बताया जाता है कि 25 किलोमीटर तक जाम का सामना करते हुए को श्रद्धालु पैदल चलकर स्नान किए थे ।
बताया जाता है कि महाकुंभ में सारे रिकॉर्ड टूटे बताया
गया की 300 किलोमीटर लंबा जाम लग गया जो कि अपने आप में बहुत बड़ा रिकॉर्ड है।
1954 में हुआ प्रयागराज के कुंभ में एक कांड
साल 1954 में मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज की कुंभ में बिल्कुल यही कांड हुआ।
बताया जाता है कि 1954 में मौनी अमावस्या वाले दिन प्रयागराज की कुंभ मेले में भगदड़ मचने के करीब 800 लोगों की मौत हो गई थी।
यह आजादी के बाद का पहला महाकुंभ था। इस घटना को एक त्रियासदी के तौर पर भी याद किया जाता है
इस घटना के बारे में जरूरी बातें
- 3 फरवरी 1954 को मौनी अमावस्या थी।
- इस दिन पवित्र स्नान के लिए लाखों लोग संगम पहुंचे थे।
- 2 और 3 फरवरी को दरमियानी रात को गंगा में अचानक बहुत पानी बढ़ गया था
- संगम किनारे साधु संतों के आश्रम में पानी पहुंचने लगा था।
- इस घटना से लोग घबरा गए और अफरा – तफरी मच गई।
- इस घटना के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के न्यायुभूति कमलाकांति वर्मा की अध्यक्षता में जांच हुई।
- एक कमेटी बनाई गई थी ।उन्होंने नेताओं और अति विशिष्ट लोगों से स्नान पर वहां पर कुंभ ना जाने की अपील की थी।
बताया जाता है की साल 2001 में महाकुंभ के दौरान प्रयागराज का फाफामऊ पीपा का पुल टूटा था ।
सोशल मीडिया पर इस बारे में फर्जी खबरे फैलाई गई थी ।
पुलिस ने बताया था की सभी पीपा पुल सुरक्षित है।
श्रद्धालुओं की आवा – जाही सामान्य है।
महाकुंभ हिंदू धर्म का एक बड़ा धार्मिक आयोजन है। यह हर 12 साल में लगता है। इस मेले का आयोजन हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक में होता है।
बताया जाता है की अमृत की चार बूंदे यह चार जगहों पर गिरी थी। वही पर यह होने लगा । इन चारों में से प्रयागराज में लगने वाला महाकुंभ सबसे भव्य होता है।
क्या है ? फैसला योगी आदित्यनाथ का इस दौरान।
उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने महाकुंभ के भगदड़ से बहुत उदास हैं। उन्होंने भगदड़ हादसे में मरने वाले के लिए मुआवजे का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि हादसे में मरने वालों के परिजनों को 25 – 25 लाख रुपए दिए जाएंगे।
साथ ही मुख्यमंत्री ने घटना की न्यायविक जांच का भी आदेश दिया है। बताया कि इस घटना की सख्त से सख्त करवाई होनी चाहिए । मौत की संख्या बताते समय योगी आदित्यनाथ भावुक भी हो गए थे।
योगी आदित्यनाथ 36 घायल लोगों का निशुल्क इलाज भी
करवा रहे हैं ।
“यही कहना है योगी आदित्यनाथ का भगदड़ हादसे में”