आधी रात सुनाई देता तेज हवा का शोर, पर पत्ते तक नहीं हिलते, क्या सच में आते हैं इंद्र देव?

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आधी रात सुनाई देता तेज हवा का शोर, पर पत्ते तक नहीं हिलते, क्या सच में आते हैं इंद्र देव?


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शिव नगरी शाहजहांपुर में स्थित प्राचीन सुनासीर नाथ धाम भक्तों की गहरी आस्था का केंद्र है. बंडा क्षेत्र गोमती नदी के किनारे बसे इस मंदिर को त्रेतायुग कालीन माना जाता है. मान्यता है कि यहां भगवान शिव पाताल में विराजमान हैं. ऐसा कहा जाता है कि आज भी राजा इंद्र रोज सबसे पहले यहां आकर शिवलिंग पर पूजा-अर्चना करते हैं. आइए जानते हैं सबकुछ.

शाहजहांपुर जिले में भगवान शिव के अनेक प्रसिद्ध मंदिर मौजूद हैं, लेकिन गोमती नदी के तट पर स्थित सुनासीर नाथ धाम का महत्व सबसे अलग है. यह मंदिर एक बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है और यहां रोजाना दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मंदिर को लेकर लोगों की मान्यता है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने पर भगवान शिव मनोकामनाएं पूरी करते हैं. यही कारण है कि यह स्थान आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.

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सुनासीर नाथ मंदिर के महंत रमेश गिरी बताते हैं कि यह शिव मंदिर सदियों पुराना है और इसे त्रेतायुग का बताया जाता है. उनका कहना है कि इस धाम में भगवान शिव आज भी पाताल लोक में विराजमान हैं. मंदिर परिसर में मौजूद शिवलिंग पर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. यहां आने वाले भक्तों का विश्वास है कि भगवान शिव उनकी हर मनोकामना पूर्ण करते हैं और संकटों को दूर करते हैं.

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महंत रमेश गिरी ने मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा साझा करते हुए बताया कि त्रेतायुग में राजा इंद्र ने गौतम ऋषि की पत्नी के साथ छल किया था. इस घटना से क्रोधित होकर गौतम ऋषि ने इंद्र को श्राप दे दिया. श्राप के प्रभाव से इंद्र का पूरा शरीर विकृत हो गया था. अपनी गलती का एहसास होने पर इंद्र ने पापों से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की शरण लेने का निर्णय किया.

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कथा के अनुसार श्राप से पीड़ित राजा इंद्र ने सुनासीर नाथ धाम में आकर तपस्या शुरू की. उन्होंने यहां जल समाधि लेकर कठोर तप किया और भगवान शिव से प्रार्थना की कि वे उनके पापों को क्षमा करें. इंद्र ने भगवान शिव का आवाहन करते हुए कहा कि वह उन्हें श्राप से मुक्त करें. कई दिनों तक चली इस तपस्या के बाद शिव की कृपा हुई और इसी स्थान पर चमत्कार घटित होने की मान्यता है.

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महंत के अनुसार राजा इंद्र के आवाहन के बाद भगवान शिव यहां स्थित जल कुंड में प्रकट हुए. भगवान शिव ने इंद्र को उनके विकृत शरीर से मुक्त कर दिया. इसी कारण इस स्थान का नाम सुनासीर पड़ा, जिसका अर्थ बताया जाता है, शरीर से मुक्त कर देना. महंत रमेश गिरी ने कहा कि भगवान शिव के इस चमत्कार के बाद राजा इंद्र को उनके पापों से मुक्ति मिली और वे शिवभक्ति में लीन हो गए.

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मंदिर में एक और मान्यता प्रचलित है कि राजा इंद्र की आत्मा आज भी यहां मौजूद है. महंत रमेश गिरी के अनुसार राजा इंद्र का शरीर अब पीपल के पेड़ के रूप में मंदिर परिसर में स्थित है. श्रद्धालु इस पेड़ को विशेष महत्व देते हैं और इसे पवित्र मानते हैं. लोग यहां आकर पीपल की पूजा करते हैं और भगवान शिव के साथ-साथ राजा इंद्र की कथा को याद कर आस्था प्रकट करते हैं.

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सुनासीर नाथ धाम को लेकर सबसे रहस्यमयी मान्यता यह है कि राजा इंद्र आज भी रोजाना यहां पूजा करने आते हैं. कहा जाता है कि सुबह होने से पहले शिवलिंग पर दूध और फल चढ़े मिलते हैं. महंत के अनुसार, आधी रात के बाद तेज हवा जैसी आवाज सुनाई देती है, लेकिन पेड़ों के पत्ते नहीं हिलते. लोगों का विश्वास है कि इसी समय राजा इंद्र भगवान शिव की पूजा करने आते हैं.



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