आप भी इस बार नहीं उगाना चाहते धान? गोरखपुर के प्रोफेसर ने बताया कम पानी में खेती का तरीका

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आप भी इस बार नहीं उगाना चाहते धान? गोरखपुर के प्रोफेसर ने बताया कम पानी में खेती का तरीका


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आप भी नहीं उगाना चाहते धान? गोरखपुर के प्रोफेसर ने बताई कम पानी वाली खेती

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Less Water Crop : पानी की किल्लत और ज्यादा लागत के कारण क्या आप भी इस बार धान की जगह कोई और फसल उगाना चाहते हैं. गेहूं की कटाई अंतिम चरण में है. थोड़े दिनों बाद किसान धान उगाने की तैयार में लग जाएंगे, लेकिन लगातार गिरता भूलजल स्तर किसानों की मुसीबत बढ़ा रहा है. ऐसे में अब खेती के पैटर्न में बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है. इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए गोरखपुर एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट ने एक अहम रिसर्च किया है. इस शोध में कम पानी में भी अच्छे उत्पादन के तरीके बताए गए हैं.

गोरखपुर. यूपी के ज्यादातर किसान गेहूं की कटाई के बाद धान की खेती करते हैं. धान की फसल में अधिक पानी की जरूरत होती है, जिससे लगातार गिरते भूजल स्तर के बीच किसानों की मुश्किलें बढ़ रही हैं. कई बार पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण फसल खराब हो जाती है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे में अब खेती के पैटर्न में बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है. इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए गोरखपुर एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के प्रोफेसर दूबे ने एक अहम रिसर्च किया है. इस शोध में उन्होंने ऐसे विकल्प सुझाए हैं, जिनमें कम पानी में भी बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है. उनका कहना है कि गेहूं के बाद धान की जगह दलहन, तिलहन और कुछ सब्जियों की खेती किसानों के लिए ज्यादा लाभकारी साबित हो सकती है.

लोकल 18 से प्रोफेसर दूबे कहते हैं कि मूंग और उड़द जैसी दलहन फसलें कम समय में तैयार हो जाती हैं. इन्हें ज्यादा पानी की जरूरत भी नहीं होती. ये मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाती हैं, जिससे अगली फसल के लिए जमीन और बेहतर हो जाती है. तिल की खेती भी कम पानी में आसानी से की जा सकती है और बाजार में इसकी अच्छी मांग रहती है.

जोखिम कम, कीमत ज्यादा

गर्मी के मौसम में भिंडी, लौकी जैसी सब्जियों की खेती भी किसानों के लिए आय का अच्छा जरिया बन सकती है. इन फसलों में सिंचाई की जरूरत कम होती है और जल्दी उत्पादन मिलने के कारण किसान कम समय में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. कम पानी वाली इन फसलों को अपनाने से किसानों को कई तरह के फायदे मिलते हैं. सिंचाई पर खर्च कम होता है, जोखिम घटता है और बाजार में अच्छी कीमत मिलने से आय बढ़ती है. यह तरीका जल संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम है.

गोरखपुर के कई किसान अब इस नई पद्धति को अपनाने लगे हैं और उन्हें इसका सकारात्मक परिणाम भी मिल रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बड़े स्तर पर इस मॉडल को अपनाया जाए, तो यह न सिर्फ किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करेगा, बल्कि क्षेत्र में जल संकट की समस्या को भी काफी हद तक कम कर सकता है.

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Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें



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