आलू से कमाना है मोटा मुनाफा? तो एक्सपर्ट के इन टिप्स को न करें इग्नोर, अच्छे मिलेंगे दाम
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Potato Farming Profit Tips: अलीगढ़ मंडल में करीब एक लाख हेक्टेयर में आलू की खेती होती है. उद्यान विभाग के उप निदेशक बलजीत सिंह ने बताया कि वैज्ञानिक तरीके से खाद का उपयोग और चिप्स वाली किस्मों का चुनाव किसानों की लागत कम कर सकता है. कोल्ड स्टोरेज की सुविधा और एफपीओ (FPO) के माध्यम से कंपनियों से सीधे जुड़ाव से किसान बाजार के जोखिम से बच सकते हैं. जानिए आलू की खेती में किस्मों का सही चयन और मार्केटिंग की जानकारी कैसे आपका मुनाफा बढ़ा सकती है.
अलीगढ़: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मंडल में आलू की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है और इसे यहां की प्रमुख फसलों में गिना जाता है. पूरे मंडल में करीब एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की खेती होती है, जिसमें अलीगढ़ और हाथरस जिले सबसे आगे हैं. यहाँ किसानों के पास भंडारण की भी अच्छी व्यवस्था है, क्योंकि पूरे मंडल में लगभग 306 कोल्ड स्टोरेज मौजूद हैं. उद्यान विभाग के उप निदेशक बलजीत सिंह का कहना है कि यदि किसान सही तकनीक और संतुलित लागत के साथ खेती करें, तो कम खर्च में भी अच्छा लाभ कमा सकते हैं.
खाद का संतुलित उपयोग और लागत प्रबंधन
अलीगढ़ उद्यान विभाग के अनुसार आलू की खेती में सबसे जरूरी है कि किसान उर्वरकों का इस्तेमाल वैज्ञानिक तरीके से करें. अक्सर देखा जाता है कि किसान सिफारिश से अधिक खाद डाल देते हैं, जिससे लागत बढ़ जाती है लेकिन उत्पादन में उतना फायदा नहीं मिलता. आलू की फसल के लिए लगभग 120 से 150 किलोग्राम नाइट्रोजन, 80 से 100 किलोग्राम फास्फोरस और लगभग इतनी ही मात्रा में पोटाश की जरूरत होती है. यदि किसान इसी संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करें, तो लागत कम रखते हुए अच्छी पैदावार ली जा सकती है.
किस्मों का सही चयन दिलाएगा मुनाफा
फसल सुरक्षा के मामले में किसानों को जरूरत के अनुसार ही दवाओं का प्रयोग करना चाहिए. मौसम में बदलाव होने पर लेट ब्लाइट और कॉमन स्कैब जैसी बीमारियों का खतरा रहता है. कॉमन स्कैब से बचाव के लिए फसल चक्र (क्रॉप रोटेशन) अपनाना एक कारगर तरीका है. किस्मों के चयन की बात करें तो सब्जी के लिए कुफरी बहार, ख्याति, आनंद और सिंदूरी जैसी किस्में उपयुक्त हैं. वहीं, प्रोसेसिंग यानी चिप्स और फ्रेंच फ्राई बनाने के लिए चिपसोना-1, चिपसोना-3 और लेडी रोसेटा जैसी किस्में काफी लोकप्रिय हैं. इन किस्मों की बाजार में मांग अधिक रहती है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिल सकती है.
एफपीओ और डायरेक्ट मार्केटिंग की भूमिका
किसानों को सलाह दी गई है कि वे फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (एफपीओ) से जुड़ें. एफपीओ के माध्यम से प्रोसेसिंग कंपनियों के साथ सीधे समझौते या बायबैक एग्रीमेंट किए जा सकते हैं. इससे किसानों की फसल सीधे कंपनियों तक पहुंचती है और बाजार में कीमत गिरने का जोखिम कम हो जाता है. यदि आलू का सामान्य बाजार भाव कम भी हो जाए, तो भी जिन किसानों का कंपनियों से करार होता है, उनका आलू तय शर्तों पर खरीदा जाता रहता है. यह व्यवस्था किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है.
मार्केटिंग चुनौतियों से निपटने की सलाह
बलजीत सिंह के अनुसार अलीगढ़ के किसान खेती की तकनीक में काफी अनुभवी हैं, लेकिन असली चुनौती मार्केटिंग की होती है. किसानों को मंडी के भाव, दूसरे राज्यों के बाजार और अंतरराष्ट्रीय मांग पर नजर रखनी चाहिए. आज के समय में मोबाइल पर मंडियों के रेट आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं. यदि किसान रोजाना थोड़ा समय भी बाजार की जानकारी लेने में लगाएं, तो उन्हें अपनी फसल के बेहतर दाम मिल सकते हैं. सही समय पर सही बाजार का चुनाव करना ही मुनाफे की कुंजी है.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें