आ गए ऋतुराज महाराज! बस कर लिया ये छोटा बदलाव तो बनी रहेगी डॉक्टर से दूरी, जाने रामबाण उपाय

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बसंत ऋतु में स्वास्थ्य का राज, आयुर्वेदिक टिप्स से बनाएं तंदुरुस्ती का खजाना

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बलिया में अब बसंत ऋतु का सुहाना मौसम चल रहा है, जिसे आयुर्वेद में विशेष महत्व दिया गया है. सर्दियों में भारी और तैलीय भोजन के बाद बसंत में हल्का, ताजा और सुपाच्य आहार लेना लाभकारी होता है. बासी चावल, गेहूं के उत्पाद, दही, चीनी, आइसक्रीम, ठंडी चीजें और फास्ट फूड बिल्कुल न खाएं.

बलिया. अब धीरे-धीरे सर्दियों की विदाई हो रही है और गर्मी की दस्तक के बीच का सुहाना मौसम चल रहा है. इसी बीच के आनंददाई मौसम को बसंत के नाम से जाना जाता है. बसंत ऋतु को यूं ही ऋतुराज नहीं कहा जाता है. हालांकि, आयुर्वेद में भी बसंत ऋतु का विशेष महत्व बताया गया है. अगर इस मौसम में खानपान और दिनचर्या में थोड़ा सा बदलाव कर लिया जाए, तो शरीर कई बीमारियों से खुद ही बचाव कर लेता है. इस मौसम में कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन जीवन को सुधार सकता हैं.  बलिया की फेमस सात साल अनुभवी आयुर्वेदाचार्य डॉ. प्रियंका सिंह के अनुसार, सर्दियों में लोग भारी और तैलीय भोजन का सेवन अधिक करते हैं. बसंत ऋतु के आते ही धूप तेज होने लगती है, जिससे शरीर में जमा कफ पिघलता है और सर्दी, खांसी व एलर्जी जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं. ऐसे में हल्का, ताजा और सुपाच्य भोजन करना लाभकारी होता है.

इस ऋतु में क्या नहीं खाना चाहिए
बासी चावल और गेहूं से बने खाद्य पदार्थों के सेवन से एकदम बचना चाहिए. दही का सेवन न करें, और अगर आदत हो तो उसमें काली मिर्च और सेंधा नमक मिलाकर ही खाएं. चीनी, आइसक्रीम और ठंडी चीजों से दूरी बना लेना चाहिए. फास्ट फूड तो बिल्कुल न लें, यह मौसम के हिसाब से बहुत जरूरी होता हैं. एक्सपर्टो के मुताबिक, मूंग दाल, चने की दाल और अरहर की दाल इस मौसम में बेहद लाभकारी और गुणकारी होता है. सब्जियों में मूली, गाजर, पालक, जिमीकंद, केले का फूल और हरे केले को शामिल करना चाहिए. आंवला, सोंठ, पिप्पली और काली मिर्च का सेवन भी फायदेमंद होता है. अदरक के रस में सेंधा नमक मिलाकर भोजन से पहले लेने से पाचन शक्ति बेहतर होती है. सरसों के शुद्ध और स्वच्छ तेल का उपयोग खाना बनाने में जरूर करना चाहिए.

इस मौसम में क्या करना उचित होता है
बसंत न केवल एक मौसम है, बल्कि सेहत सुधारने का अच्छा अवसर भी है. इस ऋतु में सही आहार-विहार पूरे साल तंदुरुस्त रहने का मजबूत आधार हो सकता है. आयुर्वेद में कहा गया है कि, “बसंते भ्रमणे पथ्यम” यानी सूर्योदय से पहले टहलना बेहद लाभकारी और गुणकारी है. रोज हल्का व्यायाम और सरसों के गुनगुने तेल से मालिश कर गुनगुने पानी से नहाने के कई फायदे हैं. सरसों के दानों का उबटन लगाना भी लाभदायक है. दिन में न सोएं, रात को जल्दी सोएं और सुबह जल्दी उठने से शरीर की कई समस्या दूर हो सकती है.

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Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें



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