इटावा में जिंदा है होली पर फाग की ऐतिहासिक परम्परा, पुरबिया टोला में गूंजता है

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इटावा में जिंदा है होली पर फाग की ऐतिहासिक परम्परा, पुरबिया टोला में गूंजता है


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इटावा के पुरबिया टोला में होली की ऐतिहासिक परंपरा आज भी जीवित है. यहां फाग गायन और विशाल होलिका दहन समाज की एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है.

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holi celebration in etawah

हाइलाइट्स

  • इटावा के पुरबिया टोला में होली की ऐतिहासिक परंपरा जीवित है.
  • फाग गायन और विशाल होलिका दहन समाज की एकता का प्रतीक है.
  • नई पीढ़ी की रुचि कम, परंपरा जीवित रखने के प्रयास जारी.

Holi Celebration In Etawah: इटावा के पुरबिया टोला मोहल्ले में होली का रंग कुछ अलग ही चढ़ता है. यहां होली से एक हफ्ता पहले से ही ढोलक, झाल और मंजीरों की धुन पर फाग गायन शुरू हो जाता है. करीब 30 हजार की आबादी वाले इस मोहल्ले में ज्यादातर कुर्मी समाज के लोग रहते हैं जो आज भी अपनी परंपराओं को बचाए हुए हैं.

फाग गायन की परंपरा सदियों पुरानी
शहरों में जहां होली सिर्फ रंग लगाने और मिलने-जुलने तक सिमट कर रह गई है, वहीं पुरबिया टोला में आज भी यह त्यौहार संस्कृति, भाईचारे और प्यार का प्रतीक है. यहां की फाग गायन की परंपरा सदियों पुरानी है. होली से सात दिन पहले हर शाम को मोहल्ले के पुरुष और युवा एक साथ होली के गीत गाते हैं, जो आपसी प्रेम और सद्भाव का संदेश देते हैं.

होली गानों के साथ मनाई जाती है
कई सालों से फाग गायन से जुड़े श्याम वर्मा बताते हैं कि यहां होली गानों के साथ मनाई जाती है. ढोलक और मंजीरों की थाप पर जब पूरा मोहल्ला एक साथ गाता है तो उसकी गूंज दिल को छू जाती है. यह हमारे संस्कृति की पहचान है. हालांकि, आजकल के युवाओं की फाग गायन में रूचि कम होती जा रही है, लेकिन फिर भी कुछ युवा इसे ज़िंदा रखने की कोशिश कर रहे हैं.

इस परंपरा को आगे बढ़ाए
फाग गायक बॉबी वर्मा कहते हैं कि आज के समय में युवा सोशल मीडिया और मोबाइल में ज्यादा व्यस्त रहते हैं, लेकिन हमें अपनी जड़ें नहीं भूलनी चाहिए. हम चाहते हैं कि नई पीढ़ी भी फाग गायन से जुड़े और इस परंपरा को आगे बढ़ाए.

होलिका दहन भी बहुत धूमधाम से मनाया जाता है
पुरबिया टोला में होलिका दहन भी बहुत धूमधाम से मनाया जाता है. पूरे मोहल्ले के 30 हजार लोग तलैया मैदान में एक साथ इकट्ठा होकर होलिका दहन करते हैं. यहाँ एक बहुत बड़ा लकड़ियों का ढेर बनाया जाता है और मोहल्ले के बुजुर्गों और युवाओं की देखरेख में होलिका दहन किया जाता है.

पूरे मोहल्ले को एक सूत्र में बांधने का एक ख़ास मौका
स्थानीय पत्रकार नील कमल और डॉ. विशेष पटेल बताते हैं कि यहां एक साथ होलिका दहन करने की परंपरा बहुत पुरानी है. यह सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि पूरे मोहल्ले को एक सूत्र में बांधने का एक ख़ास मौका होता है, जिसमें सभी जाति और धर्म के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं.

बच्चे पिचकारी से खेलते
योगेन्द्र सिंह बताते हैं कि होली वाले दिन सुबह से ही पुरबिया टोला की गलियां रंगों और गुलाल से सराबोर हो जाती हैं. लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हैं, गले मिलते हैं और मिठाइयां खिलाते हैं. महिलाएं गुझिया, मालपुआ, ठंडाई जैसे कई स्वादिष्ट पकवान बनाती हैं. बच्चे पिचकारी से खेलते हैं और हर तरफ खुशी का माहौल होता है.

समाज में प्यार और भाईचारा बना रहेगा
रजत वर्मा बताते हैं कि समय के साथ फाग गायन और पारंपरिक तरीके से होली मनाने की परंपरा को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. नई पीढ़ी मोबाइल और इंटरनेट पर ज्यादा समय बिताती है, जिससे फाग गायन में उनकी रूचि कम हो रही है. लेकिन पुरबिया टोला के बुजुर्ग और कुछ युवा इस परंपरा को बचाने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि उनका मानना है कि जब तक ये परंपराएं जीवित रहेंगी, समाज में प्यार और भाईचारा बना रहेगा.

संस्कारों की एक अद्भुत तस्वीर पेश करता है
विकल्प पटेल कहते हैं कि पुरबिया टोला में होली सिर्फ रंगों का त्यौहार नहीं बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक भी है. यहां की फाग गायन परंपरा और विशाल होलिका दहन इसकी पहचान हैं. जब पूरा मोहल्ला एक साथ फाग गाता है, होलिका दहन करता है और रंगों में डूब जाता है, तो यह एकता और संस्कारों की एक अद्भुत तस्वीर पेश करता है.

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