इस्लाम में ‘खुला’ क्या होता है? तलाक और खुला में क्या होता है फर्क..यहां जानें
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Aligarh news: मौलाना इफराहीम हुसैन ने बताया कि इस्लाम में तलाक की कई कैटेगरी बताई गई हैं, जिनमें एक “खुला” भी शामिल है.
अलीगढ़: इस्लाम में शादी को एक पवित्र और अहम रिश्ता माना गया है, जो आपसी मोहब्बत, भरोसे और समझदारी पर आधारित होता है, लेकिन जब मियां-बीवी के बीच तालमेल खत्म हो जाए और सुलह की सारी कोशिशें नाकाम हो जाएं तब शरीयत में अलग होने की भी एक प्रक्रिया बताई गई है. इसी प्रक्रिया में “तलाक़” और “खुला” दोनों अहम शब्द हैं, जिनका मतलब और तरीका अलग-अलग है. इस विषय पर लोकल 18 की टीम ने अलीगढ़ के चीफ मुफ्ती मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन से खास बात चीत की.
क्या होता है इस्लाम में ‘खुला”
मौलाना इफराहीम हुसैन ने बताया कि इस्लाम में तलाक की कई कैटेगरी बताई गई हैं, जिनमें एक “खुला” भी शामिल है. तलाक और खुला दोनों ही जुदाई के तरीके हैं, लेकिन इनमें मुख्य अंतर यह है कि तलाक का अधिकार शौहर को दिया गया है, जबकि खुला का अधिकार बीवी को दिया गया है. खुला की स्थिति में बीवी अपनी मर्ज़ी से निकाह खत्म करने की पहल करती है, लेकिन इसमें वह मेहर (जो निकाह के वक्त शौहर ने दिया था) वापस करती है यानी अगर बीवी खुला लेना चाहती है, तो उसे वह मेहर अदा करना होगा जो शौहर ने निकाह के समय अदा किया था.
‘खुला’ में बीवी करती है तलाक की पहल
मौलाना ने बताया कि इसी तरह तलाक में पहल शौहर की होती है, जिसमे शोहर बीवी को तलाक दे सकता है, जबकि खुला में पहल बीवी की होती है. इसमें बीवी अपनी मर्ज़ी से शोहर से खुला ले सकती है और यही दोनों के बीच का मूल अंतर है यानी खुला और तलाक दोनों अलग अलग शब्द हैं और इनके तरीके भी अलग हैं.