इस्लाम में हराम और हलाल क्या है? खाने को लेकर हैं बेहद सख्त नियम, यहां जानिए सबकुछ

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इस्लाम में हराम और हलाल क्या है? खाने को लेकर हैं बेहद सख्त नियम, यहां जानिए सबकुछ


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Halal And Haram In Islam: अलीगढ़ के चीफ मुफ्ती मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने लोकल 18 को बताया कि इस्लाम में हलाल खाना और हलाल कमाई जरूरी है. हराम तरीके से कमाया या खाया खाना नाजायज़ है.जानवरों के मामले में भी इस्लाम ने साफ़ तौर पर हलाल और हराम की हदें भी तय की हैं. जैसे कि बकरी, भैंस, ऊंट, भेड़ और मुर्गा हलाल जानवरों में आते हैं.

अलीगढ़. इंसान के जीवन में खाने-पीने की चीज़ों का गहरा असर होता है. क्या खाना चाहिए और क्या नहीं यह बात बहुत अहम होती है. सेहत और धार्मिक दृष्टि से भी यह बेहद जरूरी माना जाता है. यही वजह है कि इस्लाम ने हलाल और हराम की हदें बेहद वाज़ेह तौर पर यानी कि साफ तौर पर तय की हैं. हलाल सिर्फ़ एक खाना नहीं, बल्कि एक पाक कमाई और सही तरीके से हासिल की गई नेमत का नाम है. तो वहीं हराम उस चीज़ को कहा गया है जो अल्लाह तआला की नाफरमानी या किसी नाजायज़ ज़रिये से हासिल की गई हो. इसी सिलसिले में अधिक जानकारी के लिए लोकल 18 की टीम ने अलीगढ़ के चीफ मुफ्ती मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन से खास बातचीत की.

जानकारी देते हुए अलीगढ़ के मुस्लिम धर्मगुरु चीफ मुफ्ती मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने बताया कि इस्लाम में वही खाना हलाल माना जाता है, जो अल्लाह तआला के बताए गए उसूलों के अनुसार हो. जिन चीज़ों से अल्लाह तआला ने खाने-पीने से रोका है, उन्हें हराम करार दिया गया है. जैसे कि बेईमानी करके खाना, किसी का हक़ मारकर खाना, चोरी या सूद (इंटरेस्ट) के कारोबार से कमाई गई रकम से खाना. ये सब हराम है.

उन्होंने कहा कि वहीं हलाल कमाई का मतलब है कि इंसान अपनी मेहनत और ईमानदारी से कमाए, बिना किसी ज़ुल्म, नाइंसाफी या धोखे के. अगर किसी माल या खाने की कमाई हराम तरीके से हुई हो, तो वो खाना भी हराम हो जाता है. जानवरों के मामले में भी इस्लाम ने साफ़ तौर पर हलाल और हराम की हदें भी तय की हैं. जैसे कि बकरी, भैंस, ऊंट, भेड़ और मुर्गा हलाल जानवरों में आते हैं. बशर्ते उन्हें इस्लामी तरीके से जिबह किया गया हो. वहीं सूअर, कुत्ता, कौवा और दूसरे नापाक या नुकसानदेह जानवर हराम हैं.

मौलाना ने कहा कि इस्लाम में ज़ोर दिया गया है कि सिर्फ़ जानवर का हलाल होना ही काफी नहीं, बल्कि उसकी कमाई का ज़रिया भी हलाल होना चाहिए. तभी वह खाना इंसान के लिए जायज़ और मुबारक माना जाता है. ऐसा न करने पर और हराम तरीके से या हराम चीजों का इस्तेमाल करके कमाई हुई दौलत से खाना खाना इस्लाम में हराम है. इसलिए मुस्लिम भाइयों से मैं यही अपील करूंगा कि हलाल कमाई से कमाया हुआ खाना और हलाल खाना खाएं.

Lalit Bhatt

पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों में रिपोर्टिंग से ल…और पढ़ें

पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों में रिपोर्टिंग से ल… और पढ़ें

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