इस दफा लगाएं ये वाली भिंडी, नहीं लगता येलो मोजेक रोग, एक पौधे से कर सकते हैं 40 बार तुड़ाई

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इस दफा लगाएं ये वाली भिंडी, नहीं लगता येलो मोजेक रोग, एक पौधे से कर सकते हैं 40 बार तुड़ाई


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Bhindi top variety : ये किस्म 40–50 दिन में तैयार हो जाती है. येलो मोजेक रोग से सुरक्षित है. उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ाने की वजह से किसान के लिए गेमचेंजर बन सकती है. इसकी भिंडी को बस हल्के से मोड़ने पर तोड़ा जा सकता है, जिससे तुड़ाई का काम भी तेज और आसान हो जाता है. पौधा 4 से 5 फीट तक का होता है.

गाजीपुर. भिंडी की सब्जी हमेशा से लुभाती रही है. गाजीपुर के भांवरकोल क्षेत्र के युवा किसान आशुतोष पांडे इसी की बदौलत प्रेरणा बन चुके हैं. एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट कोर्स पूरा करने के बाद उन्होंने पारंपरिक खेती की बजाय आधुनिक तकनीकों और उन्नत बीजों को अपनाने का फैसला किया. इसी सोच ने उन्हें भिंडी की एक नई और उन्नत किस्म VNR VBH 980 ने आकर्षित किया. आशुतोष बताते हैं कि ये भिंडी की एक अर्ली मच्योरिंग (जल्दी तैयार होने वाली) किस्म है, जो बीज बुवाई के 40 से 50 दिनों के भीतर तुड़ाई योग्य हो जाती है. यह एक ड्वार्फ (छोटी कद वाली) वैरायटी है, जिसके पौधे 4 से 5 फीट तक ऊंचाई प्राप्त करते हैं. इस किस्म की गांठ-गांठ की दूरी कम होती है, जिससे पौधों पर अधिक फल लगते हैं और कुल पैदावार बढ़ जाती है. इसके फल तोड़ने में भी आसानी होती है. आशुतोष बताते हैं कि इसकी भिंडी को बस हल्के से मोड़ने पर तोड़ा जा सकता है, जिससे तुड़ाई का काम तेज और आसान हो जाता है.

रोगों से सुरक्षित

किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या होती है भिंडी की फसल में येलो मोजेक वायरस (YMV) का संक्रमण, लेकिन VNR VBH 980 किस्म इस वायरस के प्रति टॉलरेंट (सहनशील) है. इसका मतलब है कि यह वैरायटी YMV से प्रभावित नहीं होती, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों सुरक्षित रहते हैं. आशुतोष बताते हैं कि अगर किसान नियमित सिंचाई, संतुलित खाद और जैविक देखभाल करते रहें, तो भिंडी की ये वैरायटी बहुत तेजी से बढ़ती है. यह भिंडी बाकी किस्मों की तुलना में 2 से 4 दिन पहले तैयार हो जाती है, जिससे बाजार में जल्दी माल पहुंचाकर अच्छा भाव मिल जाता है.

छत्तीसगढ़ तक सप्लाई

इस किस्म की एक और बड़ी विशेषता यह है कि अगर फसल की सही तरीके से देखभाल की जाए तो इससे 30 से 40 बार तक तुड़ाई की जा सकती है. आशुतोष बताते हैं कि मार्केट में इसका दाम 40 से 50 रुपए किलो चल रहा है. इससे किसान को एक ही खेत से लंबे समय तक निरंतर आमदनी मिलती है. मैं अभी छत्तीसगढ़ में इस भिंडी को बेच के आ रह हूं.

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Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें

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इस भिंडी में नहीं लगता येलो मोजेक रोग, एक पौधे से कर सकते हैं 40 बार तुड़ाई



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