उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल….इस एक पौधे में छिपा है इलाज का पूरा खजाना, जानें
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उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में कई ऐसे पौधे पाए जाते हैं, जिनमें औषधीय गुण भरपूर होते हैं, लेकिन उनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. इन्हीं में से एक है भटवास का पौधा, जो गांवों के किनारे आसानी से मिल जाता है. साधारण दिखने वाला यह पौधा सेहत के लिए कितना फायदेमंद है, इसका अंदाज़ा ग्रामीणों की पारंपरिक उपयोग विधियों से लगाया जा सकता है.
उत्तर प्रदेश के तराई इलाके में कई तरह के पौधे पाए जाते हैं, जिनमें से कई में औषधीय गुण होते हैं, लेकिन इनके बारे में आम लोगों को जानकारी नहीं होती. गांव के किनारे आसानी से मिलने वाला भटवास का पौधा भी ऐसा ही एक पौधा है, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है.

अगर आप भी दांतों की समस्याओं से परेशान हैं तो भटवास का पौधा दांतों के लिए रामबाण साबित हो सकता है. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग भटवास की टहनियों का इस्तेमाल दातुन के रूप में करते हैं, जिससे उनके दांत मजबूत रहते हैं और किसी प्रकार का रोग नहीं होता. भटवास की टहनियों में ऐसे कई गुण होते हैं जो दांतों को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं.

भटवास दांतों के रोगों, जैसे पायरिया और दांत दर्द, में बेहद फायदेमंद माना जाता है. भटवास के दातुन का इस्तेमाल करने से न केवल दांत मजबूत होते हैं, बल्कि यह शरीर के अन्य रोगों में भी लाभ पहुंचा सकता है. नियमित रूप से भटवास का दातुन करने से मधुमेह (शुगर) के रोगियों को भी फायदा मिल सकता है.

अगर शुगर लेवल नियंत्रित नहीं होता, तो भटवास की पत्तियों का सेवन स्वरस रूप में करने की सलाह दी जाती है. भटवास की पत्तियों को क्रश करके सुबह–शाम खाली पेट 50 से 100 मि.ग्रा. की मात्रा में लेना चाहिए. इससे शुगर स्तर काफी हद तक नियंत्रित रहता है. भटवास के औषधीय गुण सिर्फ शुगर तक ही सीमित नहीं हैं.

भटवास, जिसे अंग्रेज़ी में Clerodendrum के नाम से जाना जाता है, सफेद रंग के सुंदर फूलों वाला पौधा है. इसी वजह से कुछ लोग इसे व्हाइट बटरफ्लाई भी कहते हैं. यह पौधा कई गंभीर बीमारियों से बचाने में बेहद कारगर माना जाता है, क्योंकि इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-इन्फ्लेमेटरी, एंटी-डायबिटिक, एंटी-हाइपरटेंसिव, हाइपोग्लाइसेमिक और हाइपोलिपिडमिक जैसे अनेक शक्तिशाली गुण पाए जाते हैं.

भटवास के पौधे की पत्तियों को पीसकर लिवर डिज़ीज, डायरिया और सिरदर्द में उपयोग किया जाता है. वहीं, बालों में डैंड्रफ, पायरिया, मलेरिया, स्किन डिज़ीज, घाव, सूजन, सांप के काटने और बिच्छू के डंक पर इसकी जड़ का लेप बनाकर लगाया जाता है. इसमें मौजूद कई औषधीय गुण हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और अर्थराइटिस जैसी बीमारियों में भी बेहद कारगर माने जाते हैं.