‘एक तो दाम बढ़ गया, दूसरा मशीन भी आ गई’, कड़ा में कभी चमकता था चांदी के वर्क का कारोबार, आज बेरोजगारी की मार
कौशाम्बी: उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले के कड़ा क्षेत्र में कभी चांदी के वर्क का कारोबार अपनी अलग पहचान रखता था. कौशांबी जिले का कड़ा कस्बा एक अलग पहचान रखता है. यहां पर कुछ वर्ष पहले लोग बड़ी संख्या में चांदी के वर्क तैयार करने का काम करते थे. उनके लिए एक यही रोजगार था. लोग चांदी के वर्ग को तैयार करके बेचने का काम करते थे. चांदी का वर्क मिठाइयों में इस्तेमाल किया जाता था.
कड़ा कस्बे की मिठाई की दुकानदार चांदी का लेप कारोबारी से खरीदने का काम करते थे. उस वर्क को मिठाइयों पर लेप लगाकर बेचने के काम से जुड़े हुए थे. कड़ा की मिठाइयों की पहचान ही चांदी के वर्क से सजी मिठास मानी जाती थी, क्योंकि कड़ा की मिठाइयां बहुत ही प्रसिद्ध मिठाइयां मानी जाती थी, लेकिन जैसे-जैसे चांदी के दामों में महंगाई होती गई, वैसे ही कारोबारी लोग इस काम को छोड़ने लगे हैं, जिससे अब वह बेरोजगार हो चुके हैं.
परिवारों के सामने आजीविका का संकट
इस कारोबार से सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी चलती थी. कारीगर दिन-रात मेहनत कर चांदी के वर्क बनाते थे, जिसे मिठाई दुकानदार उपयोग में लाते थे. लेकिन समय के साथ नियमों में सख्ती, बढ़ती लागत और बाजार में आए बदलावों के कारण यह परंपरागत कारोबार धीरे-धीरे खत्म हो गया.
आज हालत यह है कि चांदी के वर्क का कारोबार लगभग पूरी तरह बंद हो चुका है. कभी इस काम से जुड़े लोग अब बेरोजगार हो गए हैं और रोजगार की तलाश में इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं. कई परिवार ऐसे हैं, जिनके सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है.
विदेशों तक पहुंचती है यहां की मिठाई
कड़ा कस्बे के निवासी मोहम्मद शमी व राजेंद्र कुमार मौर्य जो कभी चांदी के वर्क का कारोबार करते थे, उन्होंने बताया कि कड़ा में चांदी के वर्क का कारोबार बड़े पैमाने में किया जाता था. इस चांदी के वर्ग का इस्तेमाल सबसे अधिक मिठाइयों के लिए किया जाता था, क्योंकि कड़ा कस्बे की बनी हुई मिठाई विदेश तक में प्रसिद्ध थी. इसलिए यहां पर चांदी के वर्ग का कारोबार बड़े पैमाने में किया जाता था.
महाराष्ट्र और गुजरात तक सप्लाई
मोहम्मद शमी ने बताया कि यहां पर एक चौरा भी बनता था, जिसे तैयार करके लोग महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों पर भेजने का काम करते थे. जैन के मंदिरों में चांदी चढ़ाई जाती थी. वह चौरस वर्क मशीन के जरिए मंदिरों में सजावट के लिए भी चढ़ाया जाता था. यह कारोबार मुगल काल के पहले से ही यहां पर हुआ करता था.
इसलिए चांदी के वर्क के कारण कौशांबी का कड़ा काफी प्रसिद्ध कस्बा माना जाता था. लेकिन नई-नई तकनीकियों और चांदी की महंगाई के कारण लोग इस कारोबार को पूरी तरह से अब खत्म कर चुके हैं. कड़ा कस्बे के रहने वाले लोग काफी बेरोजगार देखने को मिल रहे हैं.