ऑर्डर होल्ड, कच्चा माल महंगा! जंग ने मुरादाबाद के व्यापार को कैसे झकझोरा?
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अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब देश के उद्योगों पर भी दिखाई देने लगा है. मुरादाबाद की मशहूर पीतल नगरी में स्क्रैप की बढ़ती कीमतों ने कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है. कच्चा माल महंगा होने और निर्यात ऑर्डर प्रभावित होने से उद्योग मंदी की ओर बढ़ता नजर आ रहा है.
मुरादाबाद. अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर अब मुरादाबाद की पीतल नगरी पर भी दिखने लगा है. विदेशों से आयात होने वाले स्क्रैप की कीमतों में तेजी आई है. कारोबारियों के अनुसार एल्युमिनियम और पीतल स्क्रैप के दाम में प्रति किलो 15 से 20 रुपये तक की बढ़ोतरी हो चुकी है. यदि युद्ध लंबा चला तो कीमतों में और उछाल आ सकता है.
निर्यातकों को दोहरी मार
मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट्स डेवलपमेंट सोसाइटी के अध्यक्ष और स्क्रैप कारोबारी मोहम्मद नोमान मंसूरी का कहना है कि पहले से ही निर्यातक कम ऑर्डर और बढ़ती लागत से परेशान हैं. डॉलर की मजबूती और टैरिफ जैसे मुद्दों ने व्यापार को प्रभावित किया है. अब युद्ध के कारण समुद्री मार्गों पर अनिश्चितता बढ़ गई है, जिससे कंटेनर मूवमेंट और सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है.
ऑर्डर हो रहे होल्ड
कई विदेशी खरीदारों ने मौजूदा हालात को देखते हुए ऑर्डर रोक दिए हैं. टैरिफ का मुद्दा अभी सुलझा नहीं है और युद्ध की स्थिति ने अनिश्चितता और बढ़ा दी है. इससे पीतल उद्योग में कामकाज धीमा पड़ गया है और कारोबारियों को घाटे का सामना करना पड़ रहा है.
बढ़ती लागत से बढ़ेगी महंगाई
पीतल कारोबारी मोहम्मद बिलाल का कहना है कि स्क्रैप पहले से महंगा हो रहा था, लेकिन युद्ध ने स्थिति और बिगाड़ दी है. कच्चे माल की लागत बढ़ने से तैयार माल भी महंगा होगा, जिससे बाजार में मांग प्रभावित हो सकती है. कई पार्टियों ने माल होल्ड कर दिया है, जिससे भुगतान और सप्लाई दोनों पर असर पड़ा है.
आयात रुका तो गहराएगा संकट
कारोबारी अमित जायसवाल के अनुसार यदि विदेशों से स्क्रैप आयात बाधित हुआ तो सप्लाई चेन पूरी तरह प्रभावित हो जाएगी. इससे उत्पादन लागत बढ़ेगी और व्यापार मंदी की ओर जा सकता है. उनका कहना है कि यदि युद्ध लंबा चला तो पीतल नगरी का कारोबार गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर सकता है.
सीजनल होता जा रहा धंधा
कारोबारियों का मानना है कि पहले ही पीतल उद्योग सीजनल हो चुका है. अब कच्चे माल की अनिश्चितता और बढ़ती कीमतें इस उद्योग के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं. युद्ध का लंबा असर रहा तो मुरादाबाद की पहचान माने जाने वाले हस्तशिल्प और बर्तन उद्योग पर गहरा संकट खड़ा हो सकता है.
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