कड़कड़ाती ठंड में भी आलू की फसल नहीं होगी खराब! बस अपनाएं ये 5 जबरदस्त उपाय, मिलेगा बंपर उत्पादन
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Potato Crop Frost Protection: सर्दियों में आलू की फसल पाले और ठंड से सबसे ज्यादा प्रभावित होती है, जिससे किसान की मेहनत पर असर पड़ सकता है. लेकिन कुछ आसान और असरदार उपाय अपनाकर किसान अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं और उत्पादन बढ़ा सकते हैं. इस खबर में जानिए किन तरीकों से आलू की फसल ठंड से बचाई जा सकती है. साथ ही बंपर उत्पादन सुनिश्चित कर सकते हैं.
सर्दियों के मौसम में आलू की खेती सबसे ज्यादा प्रभावित होती है. जब तापमान बहुत नीचे गिर जाता है या पाला पड़ता है, तो आलू के पौधे झुलसने लगते हैं. पत्तियां काली होकर सूख जाती हैं, और कंद बनने की प्रक्रिया रुक जाती है. इससे किसान की पूरी फसल खराब हो सकती है, लेकिन अच्छी बात यह है. कि कुछ आसान उपाय अपना कर किसान अपनी आलू की फसल को ठंड के नुकसान से बचा सकते हैं आइए इस खबर में समझते हैं. कि ठंड से कैसे करें बचाव और कैसे पाएं बंपर उत्पादन.

खेत में हल्की सिंचाई जरूर करें: पाले से बचाव का सबसे आसान तरीका है, सिंचाई रात में मिट्टी में नमी रहने से तापमान गिरता नहीं है. पाला पड़ने की संभावना कम हो जाती है. हल्की सिंचाई से पौधों को गर्मी मिलती है और ऊपरी सतह पर नमी बनी रहती है ध्यान रहे कि अधिक सिंचाई न करें इससे कंद सड़ सकते हैं.

पौधों पर मल्चिंग करें: मल्चिंग फसल को ठंड से बचाने का सबसे अच्छा तरीका है. पुआल, सूखी पत्तियां या घास को पौधों के आसपास फैला दें. इससे खेत की नमी बनी रहती है. और जमीन का तापमान नीचे नहीं जाता मल्चिंग पौधों को ठंडी हवा से हवा के सीधे असर से बचाती है. यह तरीका न केवल फसल को ठंड से बचाता है बल्कि उत्पादन भी बढ़ता है.
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सुबह के समय फसल को धूप जरूर मिले: रात में धुंध और पाला जम जाता है, और अगर अगली सुबह पौधे धूप ना ले तो नुकसान बढ़ जाता है. इसलिए पौधों के आसपास से अनावश्यक खरपतवार और झाड़ियां को साफ रखें. ताकि धूप आसानी से पौधों तक पहुंचे धूप मिलने से पत्तियां जल्दी सूखती हैं, और फसल पर कम नुकसान होता है.

सल्फर का छिड़काव करें: डॉ. अवनीश कुमार मिश्रा बताते हैं कि सल्फर ठंड और फफूंदी दोनों से बचाव करता है. 2 से 3 ग्राम सल्फर प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें यह पौधों को गर्माहट देता है और पाले के असर को काम करता है. सल्फर का स्प्रे फसलों को रोगों से भी बचाता है.

खेत के चारों तरफ हेजिंग या अवरोध लगाएं : तेज और ठंडी हवा सीधे फसल पर असर डालती है. खेत की सीमा पर अरहर मक्का या सरसों जैसी ऊंची फैसले लगाएं हवा की गति कम करके आलू को सुरक्षा देता है. इससे पाला पड़ने की संभावना भी कम होती है.

डॉक्टर अवनीश कुमार मिश्रा बताते हैं की मौसम का पूर्वानुमान रोज देखते रहे. तापमान कम होने की सूचना मिले तो रात में सिंचाई या धुएं का प्रबंध करें पौधे जब छोटे हो तभी ज्यादा ध्यान दें, क्योंकि वे इस समय सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं. अगर किसान इन आसान और प्रयोग किए हुए तरीकों को अपनाते हैं, तो ठंड और पाले से उनकी आलू की फसल सुरक्षित रहेगी और खेत में भरपूर उत्पादन मिलेगा.