कभी एक जून की रोटी के थे लाले, पर आज कमा रहीं करोड़ों, ऐसी है बाबुल निशा की कहानी
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Success story of Babul Nisha. अगर आप ठान लो कि कुछ करके दिखाना है तो आपको आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता. यह बात एक बार फिर बहराइच की एक महिला ने साबित कर दी है. कभी एक जून की रोटी के लाले थे, आज वो सालाना 3 करोड़ कमा रही है. आइए जानते हैं बाबुल निशा की सक्सेस कहानी.
बहराइच: कई दफा होता है कि हम छोटी सी मुसीबत आने पर हार मान लेते हैं. मगर, हार न मानकर कुछ करने का जज्बा हो तो आप एक मिसाल पेश कर सकते हैं. ऐसी ही एक कहानी हम यूपी के बहराइच जिले के छोटे से गांव से निकालकर लाए हैं, जिसे जानकर आप भी आगे बढ़ने का सोचेंगे. 12 साल पहले एक महिला की जिंदगी बद से बदत्तर थी, ना तो घर में खाने को रोटी और ना ही रहने का ठिकाना… पति बीमार, किसी तरह मांग कर परिवार का पेट पलता था. मगर, उस महिला ने जिंदगी के सामने घुटने नहीं टेके बल्कि उठी और अपना जीवन संवार लिया. यह महिला कोई और नहीं बल्कि बाबुल निशा हैं. उनका आज सालाना लगभग 3 करोड़ का टर्नओवर है. आइए जानते हैं उनकी सक्सेस स्टोरी.
आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं बाबुल
बहराइच जिले के रसिया क्षेत्र के ग्राम भुलपुरवा की रहने वाली बाबुल निशा आत्मनिर्भरता की एक मिसाल है. उन्होंने सिर्फ संघर्ष करके अपनी जिंदगी में उजाला ही नही फैलाया बल्कि अपने साथ अन्य बहुत सारी महिलाओं को भी जोड़कर रास्ता दिखाया. आज बाबुल निशा के पास वह सब कुछ है जो एक आम इंसान की जरूरत होती है. उन्होंने मेहनत करके अपना घर बनवाया, गाड़ी और घोड़ा खरीदा, बच्चों की शादी की और जिले में अपनी एक अलग पहचान बनाई. आज न सिर्फ बाबुल निशा को उनके मोहल्ले के लोग जानते हैं बल्कि बहराइच जिले के अधिकतर लोग इनको इनके नाम और काम से जानते हैं.
यहां से शुरू हुआ तरक्की का सफर!
बाबुल निशा ने लोकल 18 की टीम से खास बातचीत की. बताया कि परेशानियों ने इस कदर घेर रखा था कि कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था. तब सरकार की एक छोटी सी योजना ने रास्ता दिखाया. एकता महिला किसान मंडल में सीआरपी दीदी बनकर 50 हजार रुपये का लोन लिया. फिर बकरी पालन शुरू किया. पहले तो बकरा बेचकर 50 रुपये मिले. मगर, इस धनराशि को जमा कर ऋण मुक्त हो गईं. आगे चलकर यह योजना बंद हो गई. फिर दूसरे समूह से जुड़ गईं.
एक योजना बंद होने के बाद भी नहीं मानी हार
उन्होंने बताया कि सबसे पहले जिस योजना से जुड़ी थीं वो आगे चलकर बंद हो गई. पहले तो समझ नहीं आया कि क्या करें, लेकिन फिर उद्यमी महिला उत्पादक(टीसीएल) से जुड़कर काम किया. धीरे-धीरे इसकी अध्यक्ष बन गईं. उनके अंदर तमाम महिलाएं काम करने लगीं और देखते ही देखते तरक्की उनके कदमों को चूमने लगी. यहां तक कि उनके काम और मेहनत लगन को देखते हुए शुबे के मुखिया सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी सराहना की और उनको अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया. समूह को एक बड़ा लोन (एक करोड़ 80 लाख रुपये) दिया. इसके बाद से अब बाबुल निशा शायद ही ऐसा कोई काम हो जो ना करती हों.
आज उनके अंदर में होते हैं इतने काम!
आज की डेट में बाबुल निशा न सिर्फ बकरी पालन का काम करती हैं. बल्कि सीजन में अनाजों की खरीद बिक्री बड़े पैमाने पर गेहूं, मक्का, धान, उर्द, मूंग, चना करती हैं. इसके अलावा किसानों को मिर्च, भिंडी, धनिया आदि साग सब्जी लगाने की सलाह देती हैं और लगवाती हैं. कृषि क्षेत्र में शायद ही कोई ऐसा काम हो जो बाबुल निशा अपने समूह से करती ना हों. यहां तक की पशुओं का चारा भी बेचती हैं. शायद यही वजह है जो आज इनकी अध्यक्षता में 3 करोड़ जैसी बड़ी धनराशि का सालाना टर्नओवर है.
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Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें