कभी जौनपुर मक्का और मूली की खेती के लिए जाना जाता था, लेकिन कैसे बदली इसकी तस्वीर
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Jaunpur news: मक्का यहां की मुख्य फसल मानी जाती थी. कम लागत और बेहतर उत्पादन के कारण किसान इसे बड़े रकबे में बोते थे. वहीं, मूली नगदी फसल के रूप में किसानों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत थी. जौनपुर की मिट्टी और जलवायु मूली की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती रही है, जिसके कारण यहां की मूली स्वाद और आकार में अलग पहचान रखती थी.
जौनपुर: जौनपुर की पहचान मक्का और मूली की खेती से होती थी. जिले के ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर मक्का की फसल लहलहाती थी, तो सर्दियों के मौसम में यहां की मूली दूर-दूर तक मशहूर रहती थी. स्थानीय मंडियों में जौनपुर की मूली की विशेष मांग रहती थी और कई जिलों तक इसकी आपूर्ति की जाती थी. कृषि प्रधान इस जिले में एक समय ऐसा था जब सबसे अधिक खेती मक्का की ही होती थी.
कम लागत में अधिक मुनाफा
बदल गई जौनपुर के खेती की तस्वीर
हालांकि समय के साथ खेती की तस्वीर बदली है. अब धान और गेहूं जैसी फसलों का रकबा बढ़ा है, जबकि मक्का और मूली की खेती पहले की तुलना में कम हुई है. बदलती बाजार व्यवस्था, नई कृषि नीतियां और फसलों के दाम में उतार-चढ़ाव ने किसानों को फसल चक्र बदलने के लिए प्रेरित किया है.डिप्टी पीडी आत्मा डॉ. रमेश चंद्र यादव ने बताया कि जौनपुर की भूमि मक्का और सब्जी उत्पादन के लिए आज भी उपयुक्त है. उन्होंने कहा, “एक समय जिले में मक्का की खेती सबसे अधिक क्षेत्रफल में की जाती थी. मूली भी यहां की प्रमुख सब्जी फसल रही है. अगर किसान आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज और वैज्ञानिक तरीके अपनाएं तो फिर से इन फसलों को बढ़ावा दिया जा सकता है.
प्रशिक्षण से होगा लाभ
डॉ. रमेश चंद्र यादव ने आगे कहा कि कृषि विभाग किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन दे रहा है, जिससे पारंपरिक फसलों को फिर से बढ़ावा मिले और किसानों की आय में वृद्धि हो. उन्होंने किसानों से अपील की कि वे फसल विविधीकरण अपनाएं और बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए खेती करें.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें