कम जगह, कम खर्च… पर कमाई दमदार! गोंडा के इस युवा ने बताया गुलाब की नर्सरी से हर महीने तगड़ा मुनाफा कमाने का राज

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कम जगह, कम खर्च… पर कमाई दमदार! गोंडा के इस युवा ने बताया गुलाब की नर्सरी से हर महीने तगड़ा मुनाफा कमाने का राज


गोंडा: आज के समय में युवाओं में पढ़ाई के साथ कुछ अतिरिक्त करने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है, और गोंडा का एक छात्र इसकी बेहतरीन मिसाल बन गया है. यह युवा न सिर्फ अपनी पढ़ाई पर फोकस कर रहा है बल्कि साथ ही गुलाब की नर्सरी चलाकर अच्छी आमदनी भी कमा रहा है. उसकी नर्सरी में विभिन्न किस्मों के गुलाब के पौधे मिलते हैं, जिन्हें आसपास के गांवों और बाजारों में लोग खूब पसंद कर रहे हैं. उसकी मेहनत और लगन देखकर कई युवा भी इससे प्रेरित हो रहे हैं.

कैसे हुई नर्सरी की शुरुआत
लोकल 18 से बातचीत में सत्यम शुक्ला बताते हैं कि उन्होंने नर्सरी की शुरुआत बहुत कम पैसे से की थी. घर के पास मौजूद खाली जगह में छोटे-छोटे पॉलीबैग रखकर गुलाब की कटिंग से पौधे तैयार करने शुरू किए. शुरुआत में पौधों की संख्या कम थी, लेकिन जैसे-जैसे पौधों की क्वालिटी अच्छी होती गई, खरीदारों की संख्या बढ़ती चली गई. लोगों को पौधे पसंद आने लगे और मांग लगातार बढ़ने लगी.

क्या है सत्यम की क्वालिफिकेशन
सत्यम शुक्ला बताते हैं कि वह बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई कर रहे हैं. पढ़ाई के साथ-साथ वह समय निकालकर गुलाब की नर्सरी भी चलाते हैं और दोनों कामों को संतुलित तरीके से करते हैं.

किस तरह होती है गुलाब की नर्सरी की तैयारी
सत्यम बताते हैं कि गुलाब की नर्सरी शुरू करना उतना मुश्किल नहीं है जितना लोग सोचते हैं. बस कुछ जरूरी बातों का सही तरीके से पालन किया जाए तो अच्छी नर्सरी तैयार की जा सकती है.
1. कटिंग तैयार करना
गुलाब की 6 से 8 इंच लंबी स्वस्थ टहनी काटकर कटिंग तैयार की जाती है.
2. मिट्टी तैयार करना
मिट्टी, गोबर खाद, वर्मी कंपोस्ट और रेत को मिलाकर हल्की और उपजाऊ मिट्टी बनाई जाती है.
3. पॉलीबैग भरना
तैयार मिट्टी को छोटे पॉलीबैग में भरकर उसमें कटिंग लगाई जाती है.
4. नमी बनाए रखना
पौधों को हल्की सिंचाई दी जाती है ताकि नमी बनी रहे और पौधे जल्दी जड़ पकड़ें.
5. छाया नेट का प्रयोग
सीधे धूप से बचाने के लिए शेड नेट लगाया जाता है जिससे पौधे सुरक्षित रहते हैं.
6. नियमित देखभाल
पौधों को समय-समय पर कीटनाशक और पोषक तत्व दिए जाते हैं.
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2 महीनों में हो जाती है तैयार
सत्यम का कहना है कि यदि सही देखभाल की जाए तो कटिंग लगभग 25 से 30 दिनों में जड़ पकड़ लेती है और धीरे-धीरे पौधे बनने लगते हैं. पूरी नर्सरी तैयार होने में करीब डेढ़ से 2 महीने का समय लगता है. उनका कहना है कि अक्टूबर का महीना गुलाब की कटिंग और नर्सरी तैयार करने के लिए सबसे बेहतर होता है. देसी गुलाब में खुशबू ज्यादा होती है और फूल भी काफी अधिक आते हैं.

युवाओं के लिए इंस्पिरेशन बने सत्यम
सत्यम शुक्ला बताते हैं कि अगर युवा पढ़ाई के साथ थोड़ा समय बागवानी या नर्सरी को दें तो घर बैठे अच्छी आय कर सकते हैं. कम पूंजी, कम जगह और थोड़ी मेहनत से गुलाब की नर्सरी शुरू की जा सकती है. सत्यम का यह प्रयास आज कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन रहा है कि अगर मन में चाह और मेहनत हो तो पढ़ाई और खेती दोनों को साथ-साथ किया जा सकता है और सफलता भी हासिल की जा सकती है.



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