कम मुनाफे से थे परेशान, ट्रेनिंग लेकर इस किसान ने शुरू की नई खेती, अब रोजाना..

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कम मुनाफे से थे परेशान, ट्रेनिंग लेकर इस किसान ने शुरू की नई खेती, अब रोजाना..


Agency:News18 Uttar Pradesh

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किसान धर्मेंद्र ने बहराइच में मशरूम की खेती से अपनी किस्मत बदली. पहले धान और गेहूं की खेती से कम मुनाफा होता था, अब रोजाना 5-6 हजार रुपये कमा रहे हैं.

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गेंहू के भूसे में मशरूम उत्पादन.

हाइलाइट्स

  • किसान धर्मेंद्र ने मशरूम की खेती से किस्मत बदली.
  • रोजाना 5-6 हजार रुपये का मुनाफा हो रहा है.
  • गेहूं के भूसे में मशरूम उगाकर अच्छा उत्पादन.

बहराइच: कहा जाता है कि मेहनत और लगन से किसी भी कठिनाई को पार किया जा सकता है. ऐसा ही कुछ कर दिखाया है बहराइच के नेपाल बॉर्डर इलाके में रहने वाले किसान धर्मेंद्र ने. एक समय था जब खेती में कम मुनाफा होने की वजह से वे परेशान थे, लेकिन उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से अपनी किस्मत बदल दी. अब वे मशरूम की खेती से शानदार मुनाफा कमा रहे हैं और अपनी किस्मत को नई दिशा दे रहे हैं.

मशरूम उत्पादन की यात्रा कैसे शुरू हुई?
किसान धर्मेंद्र ने बताया कि वे लंबे समय से धान, गेहूं और अन्य सब्जियों की खेती कर रहे थे, लेकिन सीमित जमीन के कारण अच्छा मुनाफा नहीं मिल पा रहा था. फिर एक दिन उन्हें बहराइच कृषि विज्ञान केंद्र में मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण मिला. वहां से जानकारी लेकर उन्होंने घर पर छोटी सी जगह पर इस ट्रेनिंग का इस्तेमाल करके मशरूम की खेती शुरू की. इसके बाद उन्होंने 45/16 आकार की झोपड़ी बनाई और मशरूम उत्पादन शुरू किया, जिससे उन्हें अच्छा लाभ मिला. अब उनके पास दो झोपड़ियां हैं और उनकी खेती से रोजाना 5 से 6 हजार रुपये का मुनाफा होता है. एक सीजन में लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये का मुनाफा हो जाता है और अब वे तीसरी झोपड़ी बनाने की तैयारी कर रहे हैं.

गेहूं के भूसे में करते हैं मशरूम उत्पादन 
किसान धर्मेंद्र ने बताया कि वे गेहूं के भूसे में मशरूम उगाते हैं. इसके लिए, भूसे को उपचारित कर उसमें बीज मिलाकर थैलियों में भर देते हैं. फिर इन थैलियों को छत से लटका दिया जाता है. धर्मेंद्र ने बताया कि गेहूं के भूसे में मशरूम का उत्पादन अच्छा होता है, बशर्ते इनकी सही देखरेख की जाए और पानी का ध्यान रखा जाए.
धर्मेंद्र की मेहनत और लगन ने न सिर्फ उनकी किस्मत बदली, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है.

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