कम लागत, तगड़ा मुनाफा…, मेथी की खेती बनी किसानों की नई पसंद, ये टॉप तीन किस्में देंगी रिकॉर्ड उत्पादन
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Methi Ki Kheti: रबी सीजन में मेथी की खेती किसानों के लिए कमाई का शानदार मौका बन सकती है. यह फसल ठंडे और शुष्क मौसम में कम लागत व कम समय में तैयार हो जाती है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पूसा अर्ली बंचिंग, पूसा कसूरी और पंत रागिनी जैसी किस्में उगाकर किसान 1000 क्विंटल तक हरी पत्ती का उत्पादन ले सकते हैं. मेथी की बढ़ती मांग और औषधीय गुण इसे किसानों की पसंदीदा फसल बना रहे हैं.
शाहजहांपुर: रबी सीजन में मेथी की खेती किसानों के लिए अच्छी कमाई का सुनहरा मौका साबित हो सकती है. ठंडे और शुष्क मौसम में उगाई जाने वाली यह फसल कम लागत और कम समय में तैयार हो जाती है, जिससे किसान बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं. मेथी का उपयोग सब्जी और मसाले दोनों रूपों में किया जाता है, इसलिए इसकी बाजार में मांग पूरे साल बनी रहती है. किसान यदि उन्नत किस्मों का चयन करें, खेत की अच्छी तैयारी करें और सही समय पर बुवाई करें, तो रिकॉर्ड उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. इसके साथ ही, इसके औषधीय गुण इसे और भी खास बनाते हैं.
कम लागत में ज्यादा मुनाफा देती है मेथी की खेती
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पुनीत कुमार पाठक ने बताया कि मेथी एक पत्तेदार सब्जी है, जो कई औषधीय गुणों से भरपूर होती है. मेथी की फसल बहुत कम समय में तैयार हो जाती है और एक बार बुवाई के बाद किसान इससे कई बार कटाई (कटिंग) कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि मेथी की कई ऐसी किस्में हैं जो डाउनी मिल्ड्यू रोग-प्रतिरोधी हैं. इन उन्नत किस्मों की खेती कर किसान बेहतर उत्पादन और ज्यादा लाभ प्राप्त कर सकते हैं.
मेथी की टॉप 3 उन्नत किस्में जिनसे बढ़ेगी कमाई
अगर आपके पास अच्छी जल निकासी वाली भूमि है, तो मेथी की खेती आपके लिए एक शानदार विकल्प है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, किसान निम्नलिखित किस्मों की बुवाई कर सकते हैं
पूसा अर्ली बंचिंग (Pusa Early Bunching):
डाउनी मिल्ड्यू रोग-प्रतिरोधी किस्म
उत्पादन क्षमता: 1000–1200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर (हरी पत्ती)
पूसा कसूरी (Pusa Kasuri):
5 से 7 बार कटिंग संभव
उत्पादन क्षमता: 800–900 क्विंटल प्रति हेक्टेयर (हरी पत्ती)
पंत रागिनी (Pant Ragini):
डाउनी मिल्ड्यू रोग-प्रतिरोधी किस्म
अच्छी उपज और उच्च गुणवत्ता वाली हरी पत्तियां