कानपुर में ‘रंगीन आतिशबाजी’ का क्रेज, होली पर दिखेगा दीपावली जैसा नजारा

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कानपुर में ‘रंगीन आतिशबाजी’ का क्रेज, होली पर दिखेगा दीपावली जैसा नजारा


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इस बार होली पर सबसे ज्यादा चर्चा ‘गुलाल कैन’ की हो रही है. यह देखने में तो आम स्प्रे जैसी लगती है. लेकिन जैसे ही इसका ढक्कन खोलकर इसे चलाते है. ऑर्गेनिक गुलाल का फव्वारा निकलता है, जो हवा में काफी ऊंचाई तक जाता है. यह अनुभव बिल्कुल वैसा ही देता है. जैसे दीपावली पर अनार चलाने पर होता है. बस फर्क यह है कि इसमें से आग नहीं बल्कि प्यारे और सुरक्षित रंग निकलते है. इसके अलावा, बाजार में खास ‘होली पाइप’ भी मौजूद है.

कानपुरः रंगों का त्योहार होली अब सिर्फ गालों पर गुलाल मलने या पानी की बौछारों तक सीमित नहीं रह गया है. इस साल होली के बाजार में एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है. जिसे देखकर लोग हैरान है. बाजार में इस बार ‘रंगीन आतिशबाजी’ आई है, जिसे देखकर लग रहा है कि मार्च के महीने में ही दीपावली आ गई हो. बाजारों में ऐसी रौनक है कि हर कोई इन खास पटाखों को खरीदने के लिए उतावला नजर आ रहा है.

इस बार होली पर सबसे ज्यादा चर्चा ‘गुलाल कैन’ की हो रही है. यह देखने में तो आम स्प्रे जैसी लगती है. लेकिन जैसे ही इसका ढक्कन खोलकर इसे चलाते है. ऑर्गेनिक गुलाल का फव्वारा निकलता है, जो हवा में काफी ऊंचाई तक जाता है. यह अनुभव बिल्कुल वैसा ही देता है. जैसे दीपावली पर अनार चलाने पर होता है. बस फर्क यह है कि इसमें से आग नहीं बल्कि प्यारे और सुरक्षित रंग निकलते है. इसके अलावा, बाजार में खास ‘होली पाइप’ भी मौजूद है. इन पाइपों की खासियत यह है कि इन्हें चलाने पर आसमान में गुलाल के बादल बन जाते है. यह नजारा इतना शानदार होता है कि मोहल्ले की सड़कें और आसमान पूरी तरह रंगीन नजर आने लगते है.

चकरी और अनार का ‘रंगीन’ अवतार
दीपावली के सबसे पसंदीदा पटाखों चकरी और अनार को भी होली के रंग में ढाल दिया गया है.  कलर अनार. यह अनार जलाने पर आग की लपटें नहीं, बल्कि सतरंगी गुलाल ऊपर की तरफ फेंकता है. रंगीन चकरी- जब यह जमीन पर घूमती है, तो इसके चारों तरफ से अलग-अलग रंगों की धूल उड़ती है, जो बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है. मैजिक गन- एक गन भी आई है जो एक बार ट्रिगर दबाने पर कई मीटर दूर तक गुलाल की बौछार कर देती है. जिससे सामने वाला पूरी तरह रंगों में सराबोर हो जाता है. इन पटाखों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि ये पूरी तरह से ‘इको-फ्रेंडली’ और ‘ऑर्गेनिक’ होने का दावा करते है. इनसे न तो धुएं का प्रदूषण होता है और न ही त्वचा को कोई नुकसान पहुंचने का डर रहता है.

बाजार में दीपावली जैसा नजारा
दुकानदारों का कहना है कि इस बार लोग साधारण पिचकारी और रंगों के बजाय इन ‘होली पटाखों’ की मांग ज्यादा कर रहे है. लोगों का मानना है कि इस बार होली की शाम को जब ये रंगीन पटाखे चलेंगे, तो नजारा बिल्कुल दीपावली जैसा होगा. आसमान में लाल, नीले, पीले और गुलाबी गुलाल की छटा बिखरेगी, जो त्योहार के आनंद को दोगुना कर देगी. इस बार की होली तकनीक और परंपरा का बेहतरीन संगम होने वाली है. जहां एक ओर हर्बल गुलाल से सेहत का ध्यान रखा जा रहा है, वहीं इन पटाखों से त्योहार में नया रोमांच जुड़ गया है.



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