काशी विश्वनाथ धाम में भव्य गंगा आरती की शुरुआत, अब हर शाम सजेगा ललिता घाट
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Kashi Vishwanath Dham Ganga Aarti: काशी विश्वनाथ धाम के ‘गंगा द्वार’ (ललिता घाट) पर चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर से भव्य गंगा आरती की ऐतिहासिक शुरुआत हो गई है. अब श्रद्धालुओं को बाबा विश्वनाथ के साथ माँ गंगा का आशीर्वाद भी एक ही स्थान पर मिलेगा. दशाश्वमेघ घाट की तर्ज पर सात अर्चकों द्वारा मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच होने वाली यह आरती अब प्रतिदिन शाम को आयोजित की जाएगी. इस पहल से न केवल भक्तों को सुविधा होगी, बल्कि काशी आने वाले लाखों पर्यटकों के लिए यह आकर्षण का नया केंद्र बनेगा.
विश्वनाथ धाम के गंगा द्वार पर पहली बार हुई भव्य गंगा आरती
वाराणसी: धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में चैत्र नवरात्रि और नव संवत्सर के पावन अवसर पर एक नए स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत हुई है. अब बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को मां गंगा की भव्य आरती के लिए कहीं दूर नहीं जाना होगा. श्री काशी विश्वनाथ धाम के विशाल ‘गंगा द्वार’ (ललिता घाट) पर अब हर शाम गंगा आरती की दिव्य छटा बिखरेगी. नवरात्रि के पहले दिन जब शंखनाद और डमरुओं की गूंज के साथ सात अर्चकों ने मां गंगा की वंदना की, तो पूरा परिसर ‘हर हर महादेव’ और ‘जय मां गंगा’ के जयघोष से सराबोर हो गया.
दशाश्वमेघ घाट जैसी भव्यता अब विश्वनाथ धाम में
अभी तक काशी की प्रसिद्ध गंगा आरती मुख्य रूप से दशाश्वमेघ घाट पर देखने के लिए लाखों की भीड़ उमड़ती थी. लेकिन अब ठीक वैसी ही भव्य आरती काशी विश्वनाथ धाम के ललिता घाट पर भी आयोजित की जाएगी. इसमें वही परंपरा, वही सात अर्चक, पारंपरिक धोती-कुर्ता, घंटा-घड़ियाल और मंत्रोच्चार का वैभव देखने को मिलेगा. मंदिर न्यास की इस पहल से न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा होगी, बल्कि दशाश्वमेघ घाट पर होने वाली भारी भीड़ का दबाव भी कम होगा और लोग सुकून से आरती का आनंद ले सकेंगे.
शिव और शक्ति का अनूठा संगम
नवरात्रि के पहले दिन से शुरू हुई इस परंपरा के पीछे गहरा आध्यात्मिक महत्व भी है. ललिता घाट पर मां ललिता गौरी का मंदिर है, जो नौ गौरी के स्वरूपों में से एक हैं. मंदिर न्यास के सीईओ विश्वभूषण मिश्रा ने बताया कि मां ललिता गौरी के आशीर्वाद से ही इस आरती की शुरुआत की गई है. अब बाबा विश्वनाथ के दरबार में आने वाले भक्तों को महादेव के साथ-साथ मां गंगा का भी साक्षात आशीर्वाद एक ही स्थान पर प्राप्त होगा.
विशालाक्षी मंदिर को भेजी गई श्रृंगार सामग्री
शक्ति उपासना के इस पर्व पर काशी विश्वनाथ मंदिर और शक्तिपीठ माता विशालाक्षी देवी के बीच भी एक अद्भुत मेल मिलाप देखने को मिला. परंपरा के अनुसार, नवरात्रि के पहले दिन बाबा के दरबार से माता विशालाक्षी को श्रृंगार सामग्री भेंट की गई. वहीं, भोर की मंगला आरती के समय माता विशालाक्षी के मंदिर से आए 11 कलश गंगाजल से बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक किया गया, जो शिव और शक्ति के अटूट संबंध को दर्शाता है.
सांस्कृतिक संध्या में मालिनी अवस्थी ने बांधा समां
नवरात्रि की पहली शाम सिर्फ आरती तक सीमित नहीं रही. विश्वनाथ धाम के प्रांगण में एक भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन भी किया गया. इसमें सुप्रसिद्ध लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने अपनी सुरीली आवाज और भजनों से ऐसा समां बांधा कि वहां मौजूद हजारों श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर झूमने लगे. धाम में कलश स्थापना के साथ ही दुर्गा सप्तशती का पाठ भी शुरू हो गया है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है.
महानवमी पर होगा विशेष आयोजन
आने वाले दिनों में भी धाम में उत्सव का माहौल रहेगा. महानवमी के दिन यहां एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया जाएगा, जिसकी सबसे खास बात यह है कि इसका नेतृत्व महिला शक्ति करेगी. इस यज्ञ में सैकड़ों महिलाएं शामिल होंगी. इसके साथ ही अखंड रामायण का पाठ भी किया जाएगा, जिससे काशी विश्वनाथ धाम शिव, शक्ति और राम की भक्ति के त्रिवेणी संगम का गवाह बनेगा.
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राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें