किसानों का डिजिटल आधार! 1 ID से जुड़ेंगे जमीन के सारे रिकॉर्ड, खेती से जुड़ा काम होगा आसान

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किसानों का डिजिटल आधार! 1 ID से जुड़ेंगे जमीन के सारे रिकॉर्ड, खेती से जुड़ा काम होगा आसान


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1 ID से जुड़ेंगे जमीन के सारे रिकॉर्ड, खेती-बाड़ी से जुड़ा हर काम अब होगा आसान

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Agriculture News: उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटना बीते दौर की बात होने वाली है. प्रदेश सरकार द्वारा शुरू किया गया ‘किसान रजिस्ट्री’ अभियान खेती-बाड़ी की दुनिया में एक बड़ी डिजिटल क्रांति लेकर आया है. अब हर किसान के पास आधार कार्ड की तर्ज पर अपनी एक विशिष्ट ‘फार्मर आईडी’ होगी, जिसे कृषि जगत का गोल्डन कार्ड कहा जा रहा है. पीएम किसान सम्मान निधि की अगली किस्त पाने से लेकर बैंकों से कर्ज लेने और एमएसपी पर फसल बेचने तक, यह कार्ड अब हर जगह अनिवार्य होगा.

शाहजहांपुर: अब किसानों को अपनी खेती-बाड़ी के कागजों के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे. उत्तर प्रदेश सरकार किसानों की सुविधा के लिए ‘किसान रजिस्ट्री’ अभियान चला रही है, जो किसानों की एक खास डिजिटल पहचान बनेगी. जैसे आम नागरिक के पास आधार कार्ड होता है, वैसे ही अब किसानों के पास अपनी ‘फार्मर आईडी’ होगी. यह व्यवस्था न केवल लेखपाल और कचहरी की निर्भरता को खत्म करेगी, बल्कि पीएम किसान सम्मान निधि और एमएसपी पर फसल बेचने जैसी योजनाओं के लिए जरूरी साबित होगी. इस डिजिटल पहल से कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और गति आएगी.

उप निदेशक कृषि पुरुषोत्तम कुमार मिश्र ने बताया कि किसान रजिस्ट्री किसानों की प्रगति का आधार बनेगी. एक ऐसा डिजिटल ईकोसिस्टम तैयार हो रहा है, जहां किसान की जमीन के समस्त अभिलेख एक ही आईडी पर उपलब्ध होंगे. इसे आप किसान का ‘गोल्डन कार्ड’ कह सकते हैं. इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि किसान को बैंक लोन या सरकारी योजनाओं के लिए बार-बार खतौनी निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी. अगर किसान का मोबाइल नंबर आधार से लिंक है, तो वह घर बैठे पंजीकरण कर सकता है, अन्यथा बायोमेट्रिक सुविधा भी उपलब्ध है. पारदर्शी व्यवस्था के लिए सभी किसान जल्द से जल्द अपनी रजिस्ट्री पूर्ण कराएं.

डिजिटल एकीकरण और कागजी कार्रवाई से मुक्ति
किसान रजिस्ट्री का प्राथमिक उद्देश्य किसान बही और खतौनी जैसे पारंपरिक दस्तावेजों को डिजिटल स्वरूप प्रदान करना है. इस प्रणाली के तहत किसान के सभी जोत और अभिलेख एक ‘फार्मर आईडी’ में समाहित हो जाएंगे. इससे भविष्य में किसी भी सरकारी आवेदन या सत्यापन के लिए मूल दस्तावेजों की प्रति जमा करने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी. यह व्यवस्था डेटा को सुरक्षित और सुलभ बनाती है, जिससे किसान अपनी जानकारी कहीं भी, कभी भी एक्सेस कर सकेंगे.

आर्थिक लाभ और योजनाओं की अनिवार्यता
यह डिजिटल कार्ड केवल एक पहचान पत्र नहीं, बल्कि वित्तीय लाभों का द्वार है. अब पीएम किसान सम्मान निधि की अगली किस्तों के लिए किसान रजिस्ट्री जरूरी कर दी गई है. साथ ही, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल बेचने और बैंकों से त्वरित ऋण प्राप्त करने के लिए यह आईडी बेहद प्रभावशाली होगी. इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और सब्सिडी या राहत राशि सीधे पात्र किसान के खाते में बिना किसी देरी के पहुंच सकेगी.

पंजीकरण की सरल प्रक्रिया और पहुंच
पंजीकरण प्रक्रिया को बेहद सरल और समावेशी बनाया गया है. सक्षम किसान स्वयं upfr.agristack.gov.in पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा, तकनीकी रूप से कम जागरूक किसानों के लिए जन सेवा केंद्र, राजस्व लेखपाल और पंचायत स्तर पर कृषि विभाग के कर्मचारियों को तैनात किया गया है. आधार कार्ड और खतौनी के माध्यम से बायोमेट्रिक या ओटीपी वेरिफिकेशन करके यह ‘गोल्डन कार्ड’ आसानी से बनवाया जा सकता है, जो भविष्य की खेती को स्मार्ट बनाएगा.

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Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें



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