किसान इस समय करें शीतकालीन गन्ने की बुवाई, बंपर हो जाएगी पैदावार, लाखों में कमाएंगे मुनाफा

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किसान इस समय करें शीतकालीन गन्ने की बुवाई, बंपर हो जाएगी पैदावार, लाखों में कमाएंगे मुनाफा


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Sugarcane Cultivation: लखीमपुर खीरी को चीनी का कटोरा कहा जाता है, यहां शीतकालीन गन्ने की बुवाई रेजर और ट्रेंच विधि से हो रही है, जिससे किसानों को 20 प्रतिशत अधिक उत्पादन और मुनाफा मिल रहा है.

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले को “चीनी का कटोरा” कहा जाता है। यहां के किसान बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती करते हैं, वर्तमान में शीतकालीन गन्ने की बुवाई का कार्य ज़ोरों पर है. अक्टूबर और नवंबर का महीना गन्ने की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. इस समय धान की फसल की कटाई पूरी हो चुकी होती है, जिससे किसान खाली पड़ी जमीन पर गन्ने की बुवाई कर सकते हैं. यह किसानों के लिए एक सुनहरा अवसर होता है कि वे एक ही खेत से साल में दो फसलें ले सकें और मुनाफा बढ़ा सकें.

गन्ने की शीतकालीन बुवाई की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सामान्य बुवाई की तुलना में अधिक उत्पादन देती है. कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप बिसेन बताते हैं कि शीतकालीन गन्ना लगाने से लगभग 20% तक अधिक उपज ली जा सकती है. यह खेती कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली सिद्ध हो रही है. किसानों को गन्ने की बुवाई से पहले बीजों का उपचार अवश्य करना चाहिए, जिससे लाल सड़न जैसे रोगों से बचाव हो सके और फसल की गुणवत्ता बनी रहे.

इस समय गन्ना विभाग और क्षेत्र की शुगर मिलों के अधिकारी भी किसानों को शीतकालीन बुवाई के लिए प्रेरित कर रहे हैं. किसानों को जागरूक करने के लिए विभिन्न शिविरों और कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है. इसमें किसानों को उन्नत किस्मों के बीज, आधुनिक बुवाई तकनीकों और खाद प्रबंधन की जानकारी दी जा रही है.

बुवाई की तकनीक की बात करें तो ‘रेजर’ और ‘ट्रेंच’ विधियां सबसे प्रभावशाली मानी जा रही हैं. इन विधियों में खेत में पहले गहरी नालियां बनाई जाती हैं, जिनमें गन्ने की बुवाई की जाती है. इसके ऊपर खाद डाली जाती है, जो बीज को पोषण देती है और तेज़ विकास में मदद करती है. इस विधि की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पानी की आवश्यकता को कम कर देती है. जिससे किसानों की सिंचाई पर होने वाली लागत भी घटती है. खासतौर पर उन इलाकों में जहां पानी की समस्या है, वहां यह विधि अत्यंत लाभकारी है. खेती की यह पद्धति किसानों के लिए कई मायनों में फायदेमंद साबित हो रही है. एक तो यह कम लागत में अधिक उत्पादन देती है, दूसरा जल संरक्षण में भी सहायक है. साथ ही गन्ने की कटाई का समय भी अगले साल की मिल अवधि के हिसाब से किया जाता है.

Lalit Bhatt

पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों में रिपोर्टिंग से ल…और पढ़ें

पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों में रिपोर्टिंग से ल… और पढ़ें

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