किसान ने सिर्फ 25 डिसमिल जमीन पर शुरू की नर्सरी, बदल गई किस्मत, आज लाखों में हो रही कमाई

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किसान ने सिर्फ 25 डिसमिल जमीन पर शुरू की नर्सरी, बदल गई किस्मत, आज लाखों में हो रही कमाई


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Agriculture News: महराजगंज के प्रगतिशील किसान राममिलन ने निचलौल क्षेत्र के बनकट्टी में सिर्फ पच्चीस डिसमिल जमीन पर नर्सरी शुरू की थी और आज यह लाखों पौधों की उत्पादन क्षमता वाली बड़ी नर्सरी बन गई है. उनके व्यवसाय से स्थानीय मजदूरों को रोजगार मिला है. बीस साल के कठिन परिश्रम और समर्पण से राममिलन ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक नर्सरी व्यवसाय में सफलता हासिल की है, जो क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है.

महराजगंज: उत्तर प्रदेश का महराजगंज जिला पड़ोसी देश नेपाल के साथ सीमा साझा करता है और यहां की भूमि खेती के लिए बहुत ही अच्छी मानी जाती है. हिमालय के तराई क्षेत्र में स्थित यह जिला यहां के किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. महराजगंज जिले के ज्यादातर लोग खेती या खेती से जुड़े व्यवसाय करते हैं. वैसे तो जिले के किसान ज्यादातर लोग पारंपरिक खेती करते हैं. हालांकि यहां की जमीन सिर्फ पारंपरिक खेती ही नहीं बल्कि अलग अलग प्रकार की प्रगतिशिल खेती के लिए भी उपयुक्त है. समय के साथ साथ कुछ ऐसे युवा किसान भी हैं, जो अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर प्रगतिशील खेती की तरफ रुख कर रहे हैं. इसके साथ ही प्रगतिशील खेती करने वाले किसानों को इसका फायदा भी मिल रहा है. ऐसे ही एक प्रगतिशील किसान हैं महराजगंज जिले के निचलौल क्षेत्र के बनकट्टी के रहने वाले राममिलन, जो एक लंबे समय से नर्सरी का काम कर रहे हैं.

सिर्फ पच्चीस डिसमिल जमीन पर शुरू किया व्यवसाय
महराजगंज जिले के प्रगतिशील किसान राममिलन ने अपनी मेहनत और अलग प्रयास से अपने खुद के दम पर नर्सरी का व्यवसाय कर लोगों के बीच अपनी एक खास किसान के रूप में पहचान बनाई है. राममिलन बताते हैं कि उन्होंने बीस साल पहले पौधों को लगाने का काम शुरू किया था और इन बीस सालों में इस व्यवसाय से उन्हें बहुत ही अच्छा अनुभव मिला है. उन्होंने ने बताया कि उन्हें नर्सरी का व्यवसाय बहुत ही अच्छा लगाया है और देखने में बहुत ही हरा भरा लगता है जो काफी आकर्षक होता है. शुरुआती समय में उन्होंने सिर्फ पच्चीस डिसमिल जमीन में ही पौधों को लगाया था. हालांकि समय के साथ-साथ उन्होंने पौधों की सख्या को बढ़ाया. उन्होंने परिस्थितियों से हार नहीं मानी बल्कि इससे आगे जाकर उन्होंने अपने नर्सरी के व्यवसाय को आगे बढ़ाया और आज के समय में उनके नर्सरी में अलग अलग प्रकार के बहुत से पौधे मिल जाएंगे.

स्थानीय स्तर पर मजदूरों को मिलता है रोजगार
राममिलन के इस व्यवसाय की बात करें तो इससे सिर्फ उन्हें ही नहीं बल्कि अन्य दूसरों को भी रोजगार का साधन उपलब्ध हुआ है. उन्होंने बताया कि उनके गांव के 20-25 लोग लगभग उनके नर्सरी में हमेशा काम करते रहते हैं. इसके साथ ही गांव के लगभग सभी मजदूर समय-समय पर उनके यहां नर्सरी में काम करते हैं जिससे उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार भी मिलता है. राममिलन ने जिस नर्सरी को साल 2006 में सिर्फ पच्चीस डिसमिल जमीन पर शुरू किया था. वह आज एक बड़ा रूप ले चुका है. राममिलन बताते हैं कि उनके यहां वर्तमान समय में लगभग लाखों पौधे तैयार किए जाते हैं जो उनके व्यवसाय का विस्तारित होता रूप दिखाता है.

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Lalit Bhatt

पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें



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