किसान भाई… अक्टूबर में उगा लीजिए ये हरी सब्जी, कम समय में होगी तैयार, ताबड़तोड़ होगी कमाई!
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Cultivation of green vegetables: सर्दियों के मौसम में पत्तेदार सब्जियों की काफी डिमांड रहती है. ऐसे में आप अक्टूबर और नवंबर महीने में पालक, मेथी, सरसों, बथुआ और चौलाई के सांग की खेती कर सकते हैं. जिससे कम लागत में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है.
हरी पत्तेदार सब्जियां खाना हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है. वहीं, सर्दियों के मौसम में कई बीमारियों का भी प्रकोप फैला है. ऐसे में आप सर्दियों के मौसम में हरे पत्तेदार सब्जियों का सेवन कर सकते हैं. अक्टूबर के महीने में आप मेथी की खेती कर सकते हैं. कम लागत में अधिक मुनाफा मेथी की खेती से कमाया जा सकता है. बुवाई के करीब 35 से 40 दिन बाद मेथी तैयार हो जाती है.

अक्टूबर का महीना पालक की खेती करने के लिए बेस्ट माना जाता है, क्योंकि पालक की डिमांड बाजारों में अधिक रहती है. पालक की खेती करते समय पूसा पालक, ऑलग्रीन, पूसा हरित, पूसा ज्योति किस्म का चयन कर सकते हैं. बुवाई के करीब 35 से 40 दिन बाद पालक तैयार हो जाती है.

सर्दियों के मौसम में आप बथुआ की भी खेती कर सकते हैं क्योंकि बथुआ हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है. जिस कारण सर्दियों के मौसम में बथुआ के साग की डिमांड अधिक रहती है. बथुआ में कई औषधीय गुण भी जाते हैं, जो कि साथ-साथ कई तरह के रोगों से भी हमारे शरीर को बचाता है. इसकी खेती से किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं. बथुआ की खेती करना बहुत ही आसान है बथुआ की बुवाई के सर्दी के मौसम में की जाती है.

सरसों का साग की डिमांड बाजार में अधिक रहती है अगर आप भी सरसों के साग खेती करना चाहते हैं तो अक्टूबर का महीना बेस्ट माना जाता है. बुवाई के करीब 40 से 45 दिन बाद सरसों का साग तैयार हो जाएगा. इसके बाद आप मार्केट में इसकी बिक्री भी कर सकते हैं. इसकी खेती के लिए 15 से 25 सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है.

सर्दियों के मौसम में बाजारों में साग की डिमांड अधिक बढ़ जाती है क्योंकि साग लोगों को खाना बेहद पसंद होता है. वहीं कई पोषक तत्व भी पाए जाते हैं. ऐसे में आप सर्दियों के मौसम में चौलाई की खेती कर सकते हैं. कम लागत नहीं अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है. चौलाई में कई तरह विटामिन्स और पोषक तत्व पाए जाते हैं. इसमें कार्बोहाइड्रेट, विटामिन-ए, फॉस्फोरस, प्रोटीन, कैल्शियम और मिनिरल प्रचूर मात्रा में पाए जाते हैं. यह एक तरह से आयरन का भंडार है. चौलाई का साग खाने से आंखों की रोशनी सही रहती है.