किसान भाई! सर्दियों में कमाना है मुनाफा? तो इस तरीके से बनाएं बिना केमिकल वाला ऑर्गेनिक गुड़, हर कोई खरीदेगा

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किसान भाई! सर्दियों में कमाना है मुनाफा? तो इस तरीके से बनाएं बिना केमिकल वाला ऑर्गेनिक गुड़, हर कोई खरीदेगा


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Organic Jaggery Production: सर्दियों में बाजार में मिलने वाले गुड़ में अक्सर मिलावट और केमिकल होते हैं. ऐसे में शुद्ध और सेहतमंद गुड़ बनाना बहुत जरूरी है. किसान भाई अगर अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं तो सही तरीके और प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल करके असली गुड़ बना सकते है, जो स्वाद में बढ़िया और सेहत के लिए भी सुरक्षित हो. इस खबर में हम आपको बताएंगे कि कैसे आप बिना मिलावट वाला गुड़ बना सकते हैं. जो लंबे समय तक खराब नहीं होता और बाजार में भी इसका अच्छा दाम मिलेगा है.

शाहजहांपुर: सर्दियों के सीजन में गुड़ की मांग बढ़ते ही बाजार में मिलावटी और केमिकल युक्त गुड़ की बाढ़ आ गई है. सुंदर और सफेद दिखने के चक्कर में कुछ गुड़ उत्पादक ‘हाइड्रो सल्फाइड’ जैसे खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो सीधे हमारे लीवर और किडनी पर बुरा असर डालते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि चमकता हुआ पीला गुड़ सेहत के लिए जहर समान हो सकता है. शुद्ध गुड़ की पहचान उसकी गहरी रंगत और प्राकृतिक स्वाद से होती है. किसान अगर गन्ने की सही किस्म और प्राकृतिक शोधकों का चयन करें, तो न केवल वे बेहतर दाम पा सकते हैं, बल्कि उपभोक्ताओं को एक स्वास्थ्यवर्धक विकल्प भी दे सकते हैं.

आर्गेनिक गुड़ की मार्केट में तगड़ी डिमांड
डॉ. संजीव कुमार पाठक ने बताया कि गुड़ का औषधीय महत्व तभी तक है जब तक वह रसायनों से मुक्त रहे. अक्सर किसान रस को साफ करने के लिए जिन ब्लीचिंग एजेंट्स का उपयोग करते हैं, उनमें सल्फर डाइऑक्साइड की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो सांस की बीमारियों और एलर्जी का कारण बनती है. अच्छी गुणवत्ता का गुड़ बनाने के लिए किसानों को एक प्राकृतिक वनस्पति ‘देवला’ जैसे शोधकों का इस्तेमाल करना चाहिए. यह न केवल गन्ने के रस की अशुद्धियों को गहराई से निकालता है, बल्कि गुड़ के प्राकृतिक खनिजों को भी सुरक्षित रखता है. ऑर्गेनिक विधि से तैयार गुड़ लंबे समय तक खराब नहीं होता और उसकी बाजार में कीमत भी अधिक मिलती है.

इस तरह बनाएं आर्गेनिक गुड़  
बेहतर गुड़ बनाने के लिए सबसे पहले पके हुए गन्ने कोलख 14201 या कोशा 13235 की पिराई करें. गन्ने के रस को कड़ाहे में डालकर 50°C तक गरम करें. इस तापमान पर इसमें 4 लीटर रस के लिए 150-200 ग्राम देवला डालें. इससे रस की मैली ऊपर आ जाएगी, जिसे अलग कर लें. आंच बढ़ाकर तापमान 70°C करें और फिर से देवला डालकर बची हुई अशुद्धियां साफ करें. रस को तब तक उबालें जब तक तापमान 120°C से 122°C तक न पहुंच जाए. इस स्तर पर रस गाढ़ा होकर ‘चाक’ बनने की स्थिति में आ जाता है. अंत में, इस गाढ़े रस को ठंडा होने के लिए लकड़ी के सांचे या समतल जगह पर निकालें और मनचाहा आकार दें.

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Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें

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