कुम्हारी कारीगरों के लिए दीवाली से पहले बड़ा तोहफा, 28 को मिला जमीन का पट्टा

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कुम्हारी कारीगरों के लिए दीवाली से पहले बड़ा तोहफा, 28 को मिला जमीन का पट्टा


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Kanpur News: कानपुर के माटीकला से जुड़े 28 कारीगर परिवारों के घर खुशियां दोगुनी हो गई हैं. बिठूर के तात्याटोपे नगर में सभी 28 पात्र परिवारों को उनकी कुम्हारी कला को आगे बढ़ाने के लिए ज़मीन का पट्टा सौंप दिया गया है

कानपुर

इस दिवाली, कानपुर के माटीकला (मिट्टी के काम) से जुड़े 28 कारीगर परिवारों के घर खुशियां दोगुनी हो गई हैं. बिठूर के तात्याटोपे नगर में सभी 28 पात्र परिवारों को उनकी कुम्हारी कला को आगे बढ़ाने के लिए ज़मीन का पट्टा (पक्की ज़मीन का अधिकार) सौंप दिया गया है. यह कदम इन कारीगरों के काम को बढ़ावा देने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है.डीएम की पहल से दूर हुई कारीगरों की सबसे बड़ी मुश्किल है.

दरअसल, यह पूरा मामला कुछ दिन पहले शुरू हुआ था.जब जिलाधिकारी (DM) जितेन्द्र प्रताप सिंह ने इन माटीकला कारीगरों से मुलाकात की थी.DM ने कारीगरों द्वारा बनाए गए सुंदर उत्पादों (Products) की बहुत तारीफ की.तारीफ के साथ ही, उन्होंने कारीगरों से उनकी मूल समस्याओं के बारे में विस्तार से पूछा. कारीगरों ने बताया कि उनके काम में सबसे बड़ी मुश्किल उपयुक्त मिट्टी की उपलब्धता है. यानी, उन्हें अपने बर्तन और खिलौने बनाने के लिए सही और अच्छी मिट्टी नहीं मिल पाती है. जिलाधिकारी ने इस बात को गंभीरता से लिया और तुरंत ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/उप जिलाधिकारी (सदर) अनुभव सिंह और तहसीलदार (सदर) विनय द्विवेदी को इस समस्या को हल करने के लिए ज़रूरी कार्रवाई करने का निर्देश दिया.

जाँच के बाद सौंपा गया ज़मीन का अधिकार
DM के निर्देश पर, प्रशासन की टीम ने फौरन काम शुरू किया. उन्होंने सबसे पहले एक पात्रता सत्यापन प्रक्रिया चलाई. इस जाँच में देखा गया कि कौन-कौन से परिवार इस योजना का लाभ पाने के हकदार हैं.सत्यापन पूरा होने के बाद, प्रशासन ने 28 पात्र माटीकला कारीगर परिवारों को ज़मीन का अधिकार देने वाले पट्टे वितरित किए. यह पट्टा उन्हें एक स्थायी जगह देता है.जहाँ वे बिना किसी रुकावट के अपना काम कर सकते हैं.

28 कारीगरों को मिला ज़मीन का पट्टा
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/उप जिलाधिकारी (सदर) अनुभव सिंह ने माटीकला हमारी परंपरा, प्रोत्साहन सबकी ज़िम्मेदारीपट्टा वितरण के मौके पर उन्होंने कहा कि माटीकला केवल एक व्यवसाय नहीं है. बल्कि यह हमारे समाज की परंपरागत धरोहरहै.उन्होंने आगे कहा कि इन कारीगरों को प्रोत्साहन और काम के लिए संसाधन उपलब्ध कराना हम सभी की साझी ज़िम्मेदारी है. जमीन का पट्टा मिलने से कारीगरों को स्थायी आधार मिल जाएगा, जिससे उनका काम और भी बेहतर होगा. इसके साथ ही, उनके उत्पादों को व्यापक पहचान मिलेगी. वे अपनी कला को और आगे ले जा सकेंगे। यह कदम कानपुर के इन कारीगरों के लिए एक बड़ा उत्सव जैसा है, जो उन्हें दिवाली से ठीक पहले मिला है.

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