कौशांबी का सकरा बाबा मंदिर, जहां बाबा के दरबार में पहुंचते हैं रेलवे कर्मचारी
उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के अझुहा गांव में स्थित सैकड़ों साल पुराना प्रसिद्ध शकरा बाबा मंदिर है. इस मंदिर का महत्व यह है कि यहां शकरा चढ़ाने से लोगों के दुख-दर्द दूर हो जाते हैं. इसलिए कहा जाता है कि भक्त यहां रोते हुए आते हैं और हंसते हुए जाते हैं. इसी आस्था के कारण दूर-दूर से श्रद्धालु भैरव बाबा के इस मंदिर में पहुंचते हैं, श्रद्धा भाव से दर्शन करते हैं और अपनी मनोकामनाओं के लिए आशीर्वाद मांगते हैं.
मंदिर परिसर में मौजूद बरगद का पेड़ भी काफी पुराना बताया जाता है. आज स्थिति यह है कि बरगद की जड़ लगभग समाप्त हो चुकी है, लेकिन उसकी शाखाएं पूरे परिसर में फैली हुई हैं. मंदिर में बरगद का मुख्य तना नहीं बचा है, फिर भी उसकी फैली हुई शाखाएं आज भी श्रद्धालुओं को छांव और राहत देती हैं.
क्यों पहुंचते हैं हर साल मंदिर में रेलवे कर्मचारी
सबसे खास बात यह है कि यहां हर साल रेलवे कर्मचारी सामूहिक रूप से पहुंचते हैं और शकरा चढ़ाकर बाबा का आशीर्वाद लेते हैं. पुजारी बताते हैं कि यह मंदिर प्राचीन काल से स्थापित है. जब पहली बार इस रूट पर ट्रेन का संचालन शुरू हुआ था, तब मंदिर के सामने से गुजरते समय ट्रेन अचानक रुक गई थी और आगे नहीं बढ़ पा रही थी. रेलवे कर्मचारी परेशान हो गए. तब लोगों ने बताया कि जब तक रेलवे कर्मचारी मंदिर में शकरा चढ़ाकर बाबा से आशीर्वाद नहीं लेंगे, तब तक ट्रेन आगे नहीं बढ़ेगी. कहा जाता है कि जब रेलवे कर्मचारियों ने मंदिर में शकरा चढ़ाकर प्रार्थना की, तब ट्रेन आगे बढ़ सकी. इसी मान्यता के चलते आज भी हर साल रेलवे कर्मचारी यहां आकर शकरा चढ़ाते हैं और अपनी मनोकामना मांगते हैं. इसी कारण कौशांबी जिले का अझुहा स्थित शकरा बाबा मंदिर बहुत प्रसिद्ध माना जाता है.
मनोकामनाएं होती हैं पूरी
मंदिर में शकरा चढ़ाने के साथ-साथ बकरे की बलि भी दी जाती है. मान्यता है कि जिन महिलाओं को पुत्र प्राप्ति नहीं होती, वे यहां एक धरोहर रखते हैं. भक्त जब यह धरोहर रखते हैं, तो तब तक मंदिर में दर्शन के लिए नहीं आते जब तक उनकी मनोकामना पूरी नहीं हो जाती. मनोकामना पूरी होने के बाद वे खुशी-खुशी डीजे और बाजे के साथ मंदिर परिसर में पहुंचकर अपनी मन्नत पूरी करते हैं. इसलिए श्रद्धालु दूर-दूर से आकर भैरव बाबा मंदिर में अर्जी लगाते हैं.
शकरा बाबा मंदिर परिसर में हर सप्ताह मंगलवार को भव्य मेले का आयोजन होता है. इस दिन भक्त बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचते हैं और डीजे-बाजे के साथ अपनी मनोकामनाएं चढ़ाते हैं. खासतौर पर चैत्र नवरात्रि और अन्य त्योहारों के दौरान यहां काफी भीड़ देखने को मिलती है. इसके अलावा भी प्रतिदिन श्रद्धालु, भैरव बाबा के दर्शन करने के लिए मंदिर परिसर में आते रहते हैं.
मंदिर प्राचीन काल से स्थापित है
पुजारी बछराज पांडा और राजू पांडा ने बताया कि भैरव बाबा का यह मंदिर प्राचीन काल से स्थापित है और यह कई सौ साल पुराना है. यह मंदिर अंग्रेजों के समय का माना जाता है. यहां जो भी भक्त सच्चे मन से अपनी मनोकामना मांगता है, उसकी इच्छा भैरव बाबा पूरी करते हैं, ऐसी मान्यता है. श्रद्धालु यहां प्रसाद के रूप में शकरा चढ़ाते हैं और कई लोग बकरे की बलि भी देते हैं. मंदिर परिसर में जगह-जगह शकरा लटकते हुए दिखाई देते हैं.