क्या बीएलओ ड्यूटी का दबाव बना टीचर की मौत की वजह? परिजनों का आरोप- OBC वोटरों का नाम काटने का था दबाव!
जौनपुर: गोंडा जिले में बीएलओ ड्यूटी निभा रहे जौनपुर निवासी सहायक अध्यापक बिपिन यादव की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत से पूरा क्षेत्र सदमे में है. उनका शव जब पैतृक गांव मल्हनी पहुंचा तो माहौल गमगीन हो गया. घरवाले रो-रोकर बेसुध हैं और ग्रामीणों में आक्रोश साफ दिख रहा है. गांव में हर कोने पर सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है-“एक शिक्षक ऐसी नौबत तक कैसे पहुंच गया?”
परिजनों का गंभीर आरोप-“ओबीसी वोटरों के नाम कटवाने का दबाव”
परिजनों ने प्रशासन पर चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं. मृतक के साले प्रतीक यादव ने बताया कि बिपिन यादव कई दिनों से बेहद तनाव में थे. बीएलओ ड्यूटी के दौरान उन पर बार-बार दबाव बनाया जा रहा था कि ओबीसी मतदाताओं के नाम SIR सूची से कटवाए जाएं. प्रतीक का दावा है कि उनके बहनोई को लगातार धमकियां मिल रही थीं और काम का बोझ इतना बढ़ा दिया गया था कि वह मानसिक रूप से टूटने लगे थे.
प्रतीक यादव ने बताया, “आखिरी बार रात में बात हुई थी. उन्होंने साफ कहा कि ‘हमसे गलत काम करवाने की कोशिश हो रही है, ऊपर के अधिकारी नाम कटवाने के लिए दबाव डाल रहे हैं.’ लेकिन सुबह दुखद खबर मिली कि उन्होंने जहर खाकर जान दे दी.” परिवार का कहना है कि यह व्यक्तिगत कदम नहीं, बल्कि प्रशासनिक दबाव और मजबूरी का परिणाम है.
कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय पहुँचे गांव
घटना ने राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ा दी है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय बुधवार को मृतक शिक्षक के आवास पहुंचे और परिजनों से मिलकर ढांढस बंधाया. उन्होंने परिवार को हर संभव सहायता का भरोसा दिया और पूरी घटना को गंभीर लोकतांत्रिक संकट बताया.
क्या बोले अजय राय
“सरकार और चुनाव आयोग की लापरवाही ने एक और कर्मचारी की जान ले ली. बीएलओ और शिक्षकों पर ओबीसी वोटरों के नाम काटने का दबाव बनाया जा रहा है. यह अत्याचार और उत्पीड़न का नतीजा है. बिपिन यादव की मौत सिर्फ आत्महत्या नहीं, बल्कि व्यवस्था द्वारा की गई मजबूरी है. इसकी निष्पक्ष जांच हो और दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए.”
निष्पक्ष जांच की मांग तेज
परिजनों ने मांग उठाई है कि इस पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए. परिवार ने स्पष्ट कहा है कि यदि अधिकारियों का दबाव नहीं होता तो बिपिन आज जीवित होते. पिता का कहना है कि बीएलओ ड्यूटी में मनमानी, धमकी और अनुचित दबाव अब आम हो चुका है, जिसे रोकना बेहद जरूरी है.
शिक्षक की मौत ने व्यवस्था की कई परतें खोल दी हैं. एक परिवार टूट गया, एक गांव सदमे में है, और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. परिजनों का आरोप अगर सच है, तो यह सिर्फ एक घटना नहीं बल्कि लोकतंत्र के बुनियादी ढांचे पर सीधा हमला है. ऐसी त्रासदी दोबारा न हो, इसके लिए निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई अब अनिवार्य है.