खेल का मैदान बना ‘डेंजर जोन’, ग्रेटर नोएडा वेस्ट में कुत्तों का आतंक, एक के बाद एक लोगों ने बयां किया दर्द
ग्रेटर नोएडा: ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित अजनारा होम्स सोसाइटी में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या अब आम जनजीवन के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है. हालात ऐसे हो चुके हैं कि बच्चों का खेलना, स्कूल जाना या सोसाइटी के भीतर अकेले आना-जाना भी जोखिम भरा हो गया है. आए दिन कुत्तों के हमलों की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे पूरे परिसर में दहशत का माहौल है.
स्थानीय निवासी धीरेन्द्र राय ने बताया कि सोसाइटी में कुत्तों की समस्या अब बहुत बड़ी समस्या बन चुकी है. यहां नौकरी के बाद अगर किसी एक चीज पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, तो वह बच्चों को कुत्तों से बचाने का है. धीरेन्द्र राय ने बताया कि करीब 15 दिन पहले उनके बेटे को चार-पांच कुत्तों ने घेर लिया और काट लिया.
6 कुत्तों का हमला बन सकता था अनहोनी
उन्होंने कहा कि जब एक कुत्ते ने काटा तो सामने वाले टावर से लोगों ने पत्थर फेंके, तब जाकर कुत्तों ने बच्चे को छोड़ा. जिस तरह 6 कुत्तों ने मिलकर हमला किया, वह एक बड़ी अनहोनी में बदल सकता था. इसके तीन दिन बाद सामने ए टावर में भी ऐसी ही घटना हुई और बीते तीन दिन पहले खुद उन्हें भी कुत्तों ने दौड़ा लिया.
बच्चों को अकेला छोड़ना संभव नहीं
सोसाइटी की रहने वाली श्वेता ने बताया कि यहां सबसे बड़ी समस्या कुत्तों की ही है. उनके छोटे-छोटे बच्चे हैं और जब बच्चे ट्यूशन जाते हैं, तो उन्हें साथ जाना पड़ता है. उन्होंने कहा कि बच्चों को अकेला छोड़ना अब संभव नहीं रह गया है. अगर बच्चा पार्क में खेल रहा हो, तो वहां भी बहुत सारे कुत्ते रहते हैं. हर टावर में कुत्तों की संख्या बढ़ चुकी है, जो आए दिन बड़ी समस्या बन रही है. श्वेता ने साफ कहा कि वे कुत्तों को भगाना या नुकसान पहुंचाना नहीं चाहतीं, बल्कि चाहती हैं कि कुत्तों को कोई स्पेसिफिक जगह मिले, ताकि बच्चे भी खुलकर खेल सकें.
कुत्तों को किया जाए शिफ्ट
स्थानीय निवासी ऋतू ने बताया कि सोसाइटी में कुत्तों की संख्या बहुत ज्यादा हो चुकी है. उन्होंने कहा कि सिर्फ गार्डन में ही लगभग 80 कुत्ते हो गए हैं और कुल मिलाकर यह संख्या करीब 120 तक पहुंच चुकी है. उन्होंने बताया कि रोज किसी न किसी को ये कुत्ते अपना शिकार बना रहे हैं और आम लोग डर के साए में जीने को मजबूर हैं. उनका कहना है कि इन कुत्तों को यहां से शिफ्ट किया जाना चाहिए, ताकि लोग चैन से रह सकें.
बच्चे और कुत्ते, दोनों रहें सुरक्षित
दीप्ति, जो सोसाइटी की निवासी हैं, उन्होंने बताया कि वे कुत्तों के खिलाफ नहीं हैं. उनका कहना है कि वे बस इतना चाहती हैं कि बच्चे भी सुरक्षित रहें और कुत्ते भी सुरक्षित रहें. उन्होंने कहा कि बच्चों की उम्र बहुत छोटी है और आए दिन डॉग अटैक की घटनाएं हो रही हैं, जिससे मन में हमेशा डर बना रहता है. उनका मानना है कि कुत्तों को ऐसी जगह शिफ्ट किया जाना चाहिए, जहां बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.
सोसाइटी निवासी पार्थ ने बताया कि एक दिन स्कूल से आते वक्त उसके पीछे कुत्ते पड़ गए और वह गिरते-गिरते बच गया. उसकी मां प्रियंका ने बताया कि उन्होंने छाते की मदद से किसी तरह अपने बच्चे को कुत्तों से बचाया. इस घटना के बाद से बच्चा डरा हुआ है और अकेले बाहर निकलने से डरता है.
डराने वाली घटना का जिक्र
अलका सिंह ने बताया कि जिस दिन धर्म जी के बच्चे को कुत्ते ने काटा, उस समय वह अपनी बालकनी में खड़ी थीं. उन्होंने कहा कि जब उन्होंने नीचे देखा, तो एक बच्चे पर छह कुत्ते हमला कर रहे थे. उन्होंने ऊपर से चप्पल फेंकी और जोर-जोर से चिल्लाईं, तब जाकर कुत्ते पीछे हटे. उन्होंने बताया कि अगर उस वक्त लोग मदद के लिए नहीं आते, तो बड़ी अनहोनी हो सकती थी.
स्थानीय निवासी दीपक माथुर ने बताया कि उनका 8 साल का बेटा है और सोसाइटी में इतने कुत्ते हो गए हैं कि बच्चों के लिए पार्क में खेलना मुश्किल हो गया है. उन्होंने कहा कि बच्चा चाहे साइकिल से जाए या पैदल, कुत्ते उसके पीछे दौड़ने लगते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में दो बच्चों को कुत्तों ने बहुत बुरी तरह काटा है.
पीछा करके हमला कर रहे
सोसाइटी की छोटी बच्ची आरोही ने बताया कि जब वह अपने घर से दोस्त के घर जा रही थी, तो बिना किसी वजह कुत्ते उसके पीछे चलने लगे. जैसे ही वह टावर के पास पहुंची, कुत्ते उसके पीछे दौड़ने लगे और उनके साथ कई और कुत्ते भी आ गए. उसने बताया कि अगर वह झाड़ियों में छिपकर अपनी जान नहीं बचाती, तो कुत्ते उसे काट लेते.