गांव की कला पहुंची अमेरिका-जर्मनी तक, नेताओं की पहली पसंद बनीं अनोखी नेम प्लेट

0
गांव की कला पहुंची अमेरिका-जर्मनी तक, नेताओं की पहली पसंद बनीं अनोखी नेम प्लेट


Last Updated:

Bahraich Latest News : बहराइच में ओडीओपी के तहत गेहूं के डंठल से बनी कलाकृतियां नई पहचान बना रही हैं. करीब 80 महिलाएं इससे जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं. आकर्षक नेम प्लेट और सजावटी फ्रेम की मांग देश ही नहीं बल्कि 30 से अधिक देशों तक है. राजनीतिक हस्तियां भी इस अनूठी कला को खास पसंद कर रही हैं.

बहराइच : जिले का ओडीओपी प्रोडक्ट अब नई पहचान बना रहा है. गेहूं के डंठल से तैयार की जाने वाली मनमोहक कलाकृतियां देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक पसंद की जा रही हैं. इस पहल से करीब 80 महिलाओं को रोजगार मिला है. खास बात यह है कि राजनीतिक हस्तियां भी इन आकर्षक नेम प्लेट और सजावटी वस्तुओं की दीवानी हैं.

ओडीओपी में गेहूं के डंठल को मिली खास जगह
बहराइच में ओडीओपी योजना के तहत गेहूं के डंठल से कलाकृतियां तैयार की जाती हैं. इस अनूठे प्रोडक्ट को स्थानीय स्तर पर नई पहचान मिली है. साधारण समझे जाने वाले गेहूं के डंठल को हुनरमंद हाथों ने खूबसूरत कला में बदल दिया है. यह पहल न केवल परंपरागत कला को बढ़ावा दे रही है बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही है.

80 महिलाओं को मिला रोजगार, घर बैठे बढ़ी आमदनी
इस प्रोडक्ट की ट्रेनिंग देने वाले गोपाल गुप्ता ने बताया कि करीब 80 महिलाएं इससे जुड़कर काम कर रही हैं. महिलाएं अपने घरेलू कार्यों के साथ खाली समय में कलाकृतियां बनाती हैं. इससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त होती है. इस कला को सीखना कठिन नहीं है. थोड़ी ट्रेनिंग और धैर्य के साथ महिलाएं सुंदर नेम प्लेट और सजावटी फ्रेम तैयार कर लेती हैं.

राजनीतिक हस्तियों में भी खास लोकप्रियता
गेहूं के डंठल से बनी नेम प्लेट की मांग राजनीतिक क्षेत्र में भी खूब है. राज्यपाल, मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री सहित कई प्रमुख नेताओं को यह नेम प्लेट भेजी जा चुकी है. हाल ही में राहुल गांधी को भी नेम प्लेट भेजे जाने की तैयारी है. इससे पहले अखिलेश यादव और सीएम योगी समेत कई हस्तियों तक यह कलाकृतियां पहुंच चुकी हैं. इसकी खासियत यह है कि समय के साथ इसकी चमक और निखार बढ़ता जाता है.

विदेशों तक पहुंची बहराइच की कला
यह प्रोडक्ट भारत के साथ लगभग 30 देशों में पसंद किया जा रहा है. अमेरिका, जर्मनी, यूरोप और बांग्लादेश सहित कई देशों में इसकी मांग है. लोग इसे घरों और कार्यालयों में सजावट के लिए उपयोग करते हैं. स्थानीय स्तर की यह कला अब अंतरराष्ट्रीय पहचान बना रही है.

कैसे तैयार होती है यह अनोखी कलाकृति
सबसे पहले गेहूं के डंठल की अच्छी तरह सफाई की जाती है. फिर उसे बीच से फाड़कर जरूरत के अनुसार अलग किया जाता है. धुलाई और सुखाने के बाद ब्लेड से काटकर चिपक की मदद से फ्रेम में सजाया जाता है. इस प्रक्रिया में समय और मेहनत दोनों लगते हैं. इन कलाकृतियों की कीमत 100 रुपये से लेकर हजारों रुपये तक होती है. नेम प्लेट की कीमत 200 रुपये से शुरू होकर आकार के अनुसार बढ़ती है.

कहां से खरीदें यह खास प्रोडक्ट
अगर कोई ग्राहक इस अनूठे प्रोडक्ट को खरीदना चाहता है तो बहराइच के बशीरगंज क्षेत्र में संपर्क किया जा सकता है. यादव मिष्ठान भंडार के पास गोपाल गुप्ता का निवास है. वहीं से सीधे प्रोडक्ट खरीदा जा सकता है. यह पहल जिले की पहचान को नई ऊंचाई दे रही है.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *