गाजियाबाद: 8 साल बाद भी नहीं बनी झंडापुर की सड़क, कोर्ट को जलभराव से राहत
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Ghaziabad News: साहिबाबाद के झंडापुर में पिछले 8 वर्षों से सड़क निर्माण अधूरा पड़ा है, जिससे हजारों निवासी कीचड़ और गहरे गड्ढों के बीच नर्क जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं. जन शिकायत पोर्टल पर शिकायत के बावजूद प्रशासन मौन है. वहीं दूसरी ओर, गाजियाबाद नगर निगम ने जिला न्यायालय परिसर में जलभराव की समस्या खत्म करने के लिए 75.36 लाख रुपये के विकास कार्यों को मंजूरी दी है.
फोटो-AI
गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के साहिबाबाद इलाके में विकास के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है. वार्ड-43 के कड़कड़ मॉडल इलाके में बुनियादी सुविधाओं का इस कदर अकाल है कि स्थानीय निवासी अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. सबसे बुरा हाल झंडापुर 12 नंबर रोड का है, जो पिछले 8 वर्षों से अधूरी पड़ी है. आलम यह है कि सड़क पर पैदल चलना भी दूभर हो गया है, लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही.
8 साल का लंबा इंतजार और प्रशासन की बेरुखी
झंडापुर के निवासियों का कहना है कि वे पिछले 8 सालों से एक अदद पक्की सड़क के लिए तरस रहे हैं. स्थानीय निवासी अरुण तोमर ने बताया कि इस सड़क के निर्माण को लेकर कई बार गुहार लगाई गई, लेकिन नतीजा सिफर रहा. बीच में एक बार मरम्मत का काम शुरू भी हुआ था, लेकिन उसे आधे में ही रोक दिया गया.
अरुण तोमर ने बताया कि उन्होंने ‘जन शिकायत पोर्टल’ पर भी अपनी शिकायत दर्ज कराई है, जो फिलहाल लंबित दिखा रही है. 24 मार्च को दर्ज कराई गई इस शिकायत पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है और न ही निर्माण कार्य शुरू करने का कोई संकेत मिला है. इससे क्षेत्र के लोगों में प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी है.
कीचड़ और गड्ढों के बीच ‘खतरनाक’ सफर
सड़क की हालत इतनी बदतर है कि जगह-जगह गहरे गड्ढे हो गए हैं. हल्की सी बारिश होते ही पूरी सड़क कीचड़ और गंदे पानी के तालाब में तब्दील हो जाती है. इस गंदगी के बीच से गुजरने की वजह से लोगों में इंफेक्शन और बीमारियों का खतरा बना रहता है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों और बुजुर्गों को हो रही है, जो आए दिन इन गड्ढों और फिसलन के कारण गिरकर चोटिल हो रहे हैं.
गाजियाबाद कोर्ट परिसर के लिए खुशखबरी: जलभराव से मिलेगी मुक्ति
जहां एक तरफ साहिबाबाद के लोग सड़क के लिए जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ गाजियाबाद जिला न्यायालय परिसर से राहत भरी खबर आई है. नगर निगम ने कोर्ट परिसर में सालों से चली आ रही जलभराव और कीचड़ की समस्या को जड़ से खत्म करने का बीड़ा उठाया है.
75.36 लाख रुपये से चमकेगा कोर्ट परिसर
नगर निगम ने जिला कोर्ट परिसर में फुटपाथ, सड़क और नालियों जैसी बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करने के लिए 75.36 लाख रुपये का बजट आवंटित किया है. इन विकास कार्यों की शुरुआत भी कर दी गई है.
- इंटरलॉकिंग टाइल्स: कोर्ट कैंपस की साइड पटरी पर करीब 11.35 लाख रुपये की लागत से इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाई जा रही हैं.
- पिंक शौचालय रोड: महिलाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ‘पिंक टॉयलेट’ वाली सड़क का निर्माण 8.25 लाख रुपये की लागत से कराया जाएगा.
- नाली निर्माण: जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए करीब 25.86 लाख रुपये से नई नालियां बनाई जाएंगी.
- पार्किंग व्यवस्था: पार्किंग स्थल को व्यवस्थित करने के लिए 29.88 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे.
चीफ इंजीनियर ने दिया आश्वासन
निगम के चीफ इंजीनियर एनके सिंह ने बताया कि इन कार्यों के पूरा होने के बाद कोर्ट आने वाले हजारों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी. विशेष रूप से बारिश के मौसम में जो जलभराव की गंभीर समस्या पैदा होती थी, उसका समाधान इन नालियों के निर्माण और सड़कों के सुधारीकरण से हो जाएगा.
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राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें