गिरता पारा सरसों के लिए खतरनाक, तुरंत करें ये काम, जानें पाले और कीटों से बचाव की ट्रिक
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Mustard crops care winter : ठंड के मौसम में सरसों की खेती पर पाले और कीटों का खतरा काफी बढ़ जाता है. पाला पड़ने से पौधों की कोशिकाएं जम जाती हैं, जिससे फूल, फलियां और बढ़वार सीधे प्रभावित होते हैं. माहू यानी लाही जैसे कीट पौधे का रस चूसकर उत्पादन में भारी गिरावट ला सकते हैं. लेकिन कुछ आसान उपाय अपनाकर सरसों की खेती को बचाया जा सकता है. पीले या काले रंग का कीट पौधों का रस ही चूस लेता है. इसके नियंत्रण के लिए एजाडिरैक्टिन का छिड़काव करें.
सरसों की खेती को कड़ाके की ठंड पाले से बचाव करने के लिए हल्की सिंचाई सबसे सरल और प्रभावी उपाय है. सुबह के समय खेत में हल्की सिंचाई करने से मिट्टी में नमी बनी रहती है और रात में तापमान बहुत नीचे नहीं जाता है. इससे पौधों को प्राकृतिक गर्मी मिलती और पाले का असर कम होता है.

बलिया के कृषि वैज्ञानिक प्रो. अशोक कुमार सिंह के अनुसार, ठंडी रातों में खेत के चारों ओर पुआल, सूखी घास या कचरा जलाकर धुआं करना फसल के लिए बेहद लाभकारी है. धुआं वातावरण में एक परत बना देता है, जिससे तापमान गिरने से रुकता है और पाला नहीं जम पाता हैं. यह पारंपरिक तरीका आज भी उतना ही प्रभावी है.

सरसों की खेती में पाले से सुरक्षा के लिए सल्फर लिक्विड या थायोयूरिया का छिड़काव किया जा सकता है. 0.2% डाइमिथाईल सल्फोक्साइड + 0.1% थायोयूरिया + 0.1% गंधक के अम्ल का घोल बनाकर छिड़काव करने से पौधों की सहनशीलता बढ़ती है और ठंड से नुकसान कम होता है.
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पीले रंग की ओर लाही नामक कीट बड़ा आकर्षित होता है. सरसों में माहू यानी लाही पीले या काले रंग का कीट होता है, जो पौधों का रस चूस लेता है. इसके नियंत्रण के लिए नीम आधारित कीटनाशक या एजाडिरैक्टिन (Azadirachtin) का छिड़काव करें. यदि प्रकोप अधिक हो, तो डायोफेन्थ जैसे अनुशंसित कीटनाशक का सीमित प्रयोग करें.

ठंड और नमी में सफेद फफूंदी का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है. इसके लिए मेटालैक्सिल + मैन्कोजेब का घोल बनाकर छिड़काव करना कारगर होता है. संक्रमित पौधों या हिस्सों को खेत से ही निकालकर उखाड़कर नष्ट कर दें, ताकि रोग आगे न बढ़ सके.

फूल और फली बनने के समय NPK 05:23:24 और बोरोन का स्प्रे करने से उत्पादन बेहतर होता है. फसल की नियमित निगरानी करते रहें और समस्या दिखते ही तुंरत उसका समाधान करें. ध्यान रखें कि पाले के मौसम में निराई-गुड़ाई न करें.

सरसों की खेत में मल्चिंग के लिए प्लास्टिक शीट या जैविक कचरे का उपयोग मिट्टी की नमी और तापमान बनाए रखता है. सही समय पर देखभाल, संतुलित पोषण और वैज्ञानिक उपाय अपनाकर किसान ठंड के मौसम में भी सरसों की फसल को सुरक्षित रख और बेहतर पैदावार पा सकते हैं. सावधानी और सही तकनीक ही सरसों की फसल को ठंड में नुकसान से बचा सकता है.