गेहूं की बुवाई के बाद किसान पहली सिंचाई पर दें विशेष ध्यान, विशेषज्ञों ने बताया सही समय, उपज में मिल सकता है 20% तक लाभ
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Gehun Ki Sinchai: कन्नौज के किसान गेहूं की बुवाई पूरी कर चुके हैं, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल है पहली सिंचाई कब और कैसे की जाए? कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि गेहूं की जड़ मजबूत करने और दाने की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए पहली सिंचाई का सही समय बेहद महत्वपूर्ण है. कृषि विशेषज्ञों की सलाह के साथ पढ़ें पूरा वैज्ञानिक गाइड, जिससे उपज बढ़ेगी और खेत की सेहत भी बरकरार रहेगी.
Kannauj News: कन्नौज कृषि प्रधान जिले के रूप में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है. यहां आलू और मक्का की कटाई के बाद किसान बड़े पैमाने पर गेहूं की बुवाई करते हैं. वर्तमान समय में जिले के लगभग सभी किसानों ने गेहूं की बुवाई पूरी कर ली है. अब किसानों के सामने बड़ा सवाल यह है कि पहली सिंचाई कब और कैसे की जाए, क्योंकि यही फसल की गुणवत्ता और उत्पादन को सबसे अधिक प्रभावित करती है.
कैसे और कब करें पहली सिंचाई?
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, गेहूं की फसल में सबसे ज़रूरी उसकी पहली सिंचाई होती है, क्योंकि यही पौधे की जड़ और आधार को मजबूत बनाती है. वैज्ञानिकों ने बताया कि बुवाई के 21 से 25 दिनों के भीतर पहली सिंचाई अवश्य कर देनी चाहिए, जिससे पौधे का विकास संतुलित और तेज हो सके. समय पर पहली सिंचाई न होने पर फसल की ग्रोथ धीमी पड़ सकती है और दाने की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है.
सिंचाई के साथ उर्वरक का सही उपयोग
सिंचाई के साथ-साथ उर्वरकों के उपयोग को लेकर भी कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी है. विशेषज्ञों के अनुसार, पहली सिंचाई के दौरान यूरिया या अन्य रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग बिल्कुल न करें, क्योंकि इससे पौधे असंतुलित रूप से तो लंबे हो जाते हैं लेकिन दाना कमजोर पड़ने की संभावना रहती है.
पहली सिंचाई के बाद जब खेत में ओट दिखाई देने लगे, तब पहली बार यूरिया और अन्य फर्टिलाइजर का छिड़काव करना सबसे लाभकारी होता है. वहीं, दूसरी सिंचाई के बाद किसानों को दूसरी बार यूरिया और अन्य उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी गई है. इससे गेहूं के दाने भरपूर आकार में विकसित होते हैं और उसकी चमक व गुणवत्ता बेहतर होती है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि निर्धारित तरीके से जल प्रबंधन और उर्वरक प्रयोग करने पर किसानों को पैदावार में अच्छा-खासा लाभ मिल सकता है.
क्या बोले कृषि वैज्ञानिक?
कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुशील कुमार ने किसानों से अपील की है कि वे समय पर पानी और उर्वरकों का संतुलित उपयोग करते हुए वैज्ञानिक तरीके से खेती करें, जिससे लागत कम हो और उपज अधिक प्राप्त हो सके. उनका कहना है कि यदि किसान सिंचाई का सही समय और तरीका अपनाएंगे तो फसल के साथ-साथ खेतों की सेहत भी बेहतर बनी रहेगी.
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मैं राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहा हूं. मुझे हिंदी मीडिया में 16 साल से ज्यादा का अनुभव है. मैंने प्रिंट में रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल मीड…और पढ़ें