घर और वातावरण दोनों को शुद्ध करने वाली धूप, तुलसी और गोबर से बनी, जानें खासियत

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घर और वातावरण दोनों को शुद्ध करने वाली धूप, तुलसी और गोबर से बनी, जानें खासियत


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कन्नौज के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की छात्राओं ने नेचुरल धूपबत्ती बनाने में अपनी रचनात्मकता दिखाई है. रसायनों से मुक्त यह धूपबत्ती न केवल घर में सुगंध फैलाती है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है. इस पहल ने बालिकाओं की हुनर और आत्मनिर्भर बनने की क्षमता को उजागर किया है.

कन्नौज. कन्नौज में शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि हुनर से भविष्य संवारने का माध्यम भी है. इसी सोच को हकीकत में बदलते हुए कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की छात्राओं ने एक अनोखी पहल की है. यहां पढ़ने वाली बालिकाओं ने प्राकृतिक सामग्रियों से खास तरह की धूपबत्ती तैयार की है, जिसकी चर्चा अब पूरे जिले में हो रही है.

क्या है खासियत
मार्केट में उपलब्ध अधिकांश धूपबत्तियों में रसायनों का प्रयोग होता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है. इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए छात्राओं ने नेचुरल धूपबत्ती बनाने का निर्णय लिया. उन्होंने तुलसी की सूखी पत्तियों को बुरादे के रूप में इस्तेमाल करके ‘तुलसी धूप’ तैयार की, जबकि दूसरी किस्म में तुलसी के बुरादे को गोबर के साथ मिलाकर एक विशिष्ट प्राकृतिक धूपबत्ती बनाई. छात्राओं का कहना है कि यह धूप न केवल घर में सुगंध फैलाएगी, बल्कि वातावरण को भी शुद्ध करेगी और रासायनिक धूपबत्तियों से होने वाले दुष्प्रभावों से लोगों को बचाएगी.

क्या बोले छात्रा
धूप बनाने वाली छात्रा सरिता ने बताया कि उनकी बनाई धूपबत्ती मच्छरों, मक्खियों और अन्य कीड़ों को दूर रखने में भी असरदार है. प्रयोग के आधार पर उन्होंने इसके छोटे-छोटे पैकेट तैयार कर बिक्री की योजना बनाई है, जिससे उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा.

क्या बोले बीएसए
छात्राओं की इस नवाचार क्षमता को देखकर बेसिक शिक्षा अधिकारी संदीप कुमार ने उनकी सराहना की. उन्होंने कहा कि विद्यालय में बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा के साथ-साथ जीवनोपयोगी कौशल भी सिखाए जा रहे हैं. यह पहल छात्राओं की रचनात्मक सोच और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम है. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह नेचुरल धूप लोगों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी सिद्ध होगी और बालिकाओं के इस नवाचार को व्यापक पहचान मिलेगी. कस्तूरबा विद्यालय की इस पहल ने न सिर्फ बालिकाओं की प्रतिभा को उजागर किया है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना को भी मजबूत किया है.

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