चिड़ियाघर के एक बाड़े में साथ क्यों नहीं रहते बाघ-बाघिन? गोरखपुर में अमर और गीता के बीच सबसे बड़ी दीवार यही

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चिड़ियाघर के एक बाड़े में साथ क्यों नहीं रहते बाघ-बाघिन? गोरखपुर में अमर और गीता के बीच सबसे बड़ी दीवार यही


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Gorakhpur Zoo : गोरखपुर के शहीद अशफाक उल्ला का प्राणी उद्यान में इन दिनों बाघ-बाघिन के एक नए जोड़े के लिए सुर्खियों में है. बाघिन मैलानी के जाने के बाद अब दर्शकों के मनोरंजन की जिम्मेदारी अमर और गीता पर आ गई है. लेकिन दोनों को अलग रखा जा रहा है. कई लोगों को ये बात खटक रही है. लोकल 18 ने इस बारे में चिड़ियाघर के डॉक्टर से बात की.

गोरखपुर. शहीद अशफाक उल्ला का प्राणी उद्यान (गोरखपुर) की एक कहानी भी दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. यहां की बाघिन मैलानी जो चिड़ियाघर की स्टार आकर्षण थी, अब इस दुनिया में नहीं रही है. करीब 1 साल पहले उम्र दराज होने और तबियत बिगड़ने के बाद उसे मुख्य बाड़े से निकालकर चिड़ियाघर के अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया था. कुछ दिन पहले उसकी मौत हो गई जिसके बाद दर्शकों के बीच मायूसी भी देखने को मिली. मैलानी के जाने के बाद अब दर्शकों के मनोरंजन की जिम्मेदारी, दो नए बाघों अमर और गीता पर आ गई. इन दोनों को देखने के लिए रोज बड़ी संख्या में लोग चिड़ियाघर पहुंचते हैं. उनकी हरकतें मस्ती और एग्रेसिव नेचर दर्शकों को खूब रोमांचित करता है.

बारी-बारी से अंदर-बाहर

हालांकि, एक बात जो कई दर्शकों को हैरान करती है वह यह है कि, अमर और गीता को एक साथ एक ही बाड़े में नहीं रखा जाता. इस बारे में लोकल 18 ने चिड़ियाघर के डॉक्टर योगेश से बात की. उन्होंने बताया कि बाघ एक बेहद एग्रेसिव प्रजाति है. अगर दो बाघ या बाघिन को एक ही बाडे़ में रखा जाए तो उनके बीच लड़ाई होने की पूरी आशंका रहती है. इसी कारण एक दिन गीता को दर्शकों के लिए बाड़े में रखा जाता है और दूसरे दिन अमर को. डॉ. योगेश बताते हैं कि कई बार दर्शन दोनों को एक साथ देखने की मांग करते हैं. लेकिन यह पूरी तरह संभव नहीं है. यह उनके लिए जोखिम भरा हो सकता है. बाघों का नेचर उन्हें एक साथ एक बाड़े में नहीं रहने देता.

अस्पताल में तीन और बाघ 

फिलहाल चिड़ियाघर में इन दिनों दर्शकों के लिए बाघ अमर और बाघिन गीता काफी पसंद की जा रही हैं. वह उन्हें एंटरटेन भी कर रहे हैं. लेकिन इन दिनों चिड़ियाघर के अस्पताल में तीन रेस्क्यू किए गए बाघ भी मौजूद हैं. जो डॉक्टर की निगरानी में हैं. इन्हें इन्हें अलग-अलग जगह से रेस्क्यू कर लाया गया है. डॉक्टर बताते हैं कि अगर सब कुछ सामान्य रहा तो जल्द दर्शकों को इन बाघों के भी दर्शन हो सकते हैं.

बुढ़ापे में पकड़ लेते हैं कोना

चिड़ियाघर में मौजूद अमर और गीता की देखभाल के लिए टीम बेहद खास तरीके अपनाती है. उन्हें रोजाना पौष्टिक भोजन दिया जाता है. खेलने, फिरने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराई जाती है. अमर और गीता की जोड़ी सुपरहिट मानी जाती है. डॉ. योगेश बताते हैं कि मैलानी उम्र दराज हो चुकी थी, इसलिए 1 साल पहले उसे निकाल लिया गया. जब बाघ बूढ़े होते हैं तो अक्सर बाड़े के कोने में जाकर बैठ जाते हैं. ऐसे में अगर उनकी तबीयत खराब हो जाए तो, उन्हें निकाल कर इलाज करना मुश्किल हो जाता है. मैलानी उम्र दराज हो चुकी थी, इसलिए उसे समय रहते अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया था. चिड़ियाघर के कर्मचारी बताते हैं कि मैलानी भले इस दुनिया में न हो लेकिन उसकी यादें आज भी चिड़ियाघर की पूरी टीम के दिल में बसी हुई है.

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Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें

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चिड़ियाघर के एक बाड़े में क्यों नहीं रहते बाघ-बाघिन? गोरखपुर में सामने आई वजह



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