चित्रकूट का यह रिटायर्ड फौजी फ्री में दे रहा आर्मी-पुलिस की ट्रेनिंग, खुद की पेंशन से चला रहा एकेडमी

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चित्रकूट का यह रिटायर्ड फौजी फ्री में दे रहा आर्मी-पुलिस की ट्रेनिंग, खुद की पेंशन से चला रहा एकेडमी


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Chitrakoot News: चित्रकूट के मारकुंडी पाठा में आर्मी रिटायर्ड प्रदीप शुक्ला अपनी पेंशन से 470 से अधिक युवाओं को सेना व पुलिस भर्ती की निशुल्क ट्रेनिंग देकर क्षेत्र की सोच बदल रहे हैं.

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चित्रकूट: चित्रकूट का पाठा क्षेत्र में लंबे समय तक दस्यु प्रभावित इलाका रहा है. एक समय यहां बंदूक की आवाजें आम थीं, जिससे शिक्षा और विकास का स्तर बुरी तरह प्रभावित हुआ था. ऐसे में आज भी कई परिवार बेहतर भविष्य की तलाश में पलायन को मजबूर हैं. लेकिन इसी पाठा भूमि से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र की सोच बदल दी है. यह कहानी है मारकुंडी पाठा के रहने वाले आर्मी रिटायर्ड प्रदीप शुक्ला की, जो अब अपनी पेंशन से गरीब और ग्रामीण युवाओं को सेना व पुलिस भर्ती की निशुल्क ट्रेनिंग और शिक्षा दे रहे हैं.

2019 में की निशुल्क एकेडमी की शुरुआत

जानकारी के लिए बता दें  कि प्रदीप शुक्ला भारतीय सेना की मिसाइल रेजीमेंट से वर्ष 2017 में रिटायर हुए थे. रिटायरमेंट के बाद जब वह वर्दी पहनकर अपने गांव लौटे तो उन्होंने देखा कि युवाओं में रोजगार की भारी कमी है. कई युवा दिशा विहीन होकर समय बर्बाद कर रहे थे. तभी उन्होंने ठाना कि अब इस दस्यु प्रभावित क्षेत्र को वीर भूमि बनाना है और वर्ष 2019 में उन्होंने अपने गांव में निशुल्क एकेडमी की शुरुआत की. शुरुआत में सिर्फ एक विद्यार्थी आया, लेकिन उसकी मेहनत और प्रदीप शुक्ला की ट्रेनिंग से उसका चयन भारतीय सेना में हो गया था. इसके बाद से क्षेत्र के युवाओं का उत्साह बढ़ गया और धीरे-धीरे बच्चों की संख्या बढ़ती गई.

रनिंग किट से लेकर फॉर्म भरने तक सब निशुल्क

बता दें कि वर्तमान में प्रदीप शुक्ला की एकेडमी में 470 से अधिक छात्र-छात्राएं निशुल्क ट्रेनिंग ले रहे हैं. उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि बच्चों को भर्ती की तैयारी के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने पर भी ध्यान दिया जाता है. यहां एडमिशन लेने वाले छात्रों को रनिंग किट से लेकर फॉर्म भरने तक का खर्च मैं खुद उठाता हूँ और ट्रेनिंग का समय शनिवार और रविवार रखा गया है, ताकि बच्चों की नियमित पढ़ाई प्रभावित न होने पाए.

इतने बच्चों का हुआ चयन

उन्होंने आगे की जानकारी में बताया कि अब तक हमारी एकेडमी से 80 से अधिक बच्चे भारतीय सेना में भर्ती हो चुके हैं. इनमें 18 बच्चे इंडियन आर्मी, 4 यूपी पुलिस, और 1 एमपी पुलिस में चयनित हुए हैं. इसके अलावा इस वर्ष 32 बच्चों ने आर्मी भर्ती की रिटन परीक्षा भी पास की और यह सब वह अपनी सेना की पेंशन से ही कर रहे हैं.

हालांकि सुविधा की कमी अब भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है. प्रदीप ने आगे कि जानकारी में बताया कि रनिंग ग्राउंड न होने से बच्चों को अभ्यास में दिक्कत आती है. उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से स्थायी बड़े खेल मैदान की मांग की है, ताकि बच्चे सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण में तैयारी कर सकें.उन्होंने बताया कि मेरा सपना है कि जिस पाठा क्षेत्र को कभी डकैतों की धरती कहा जाता था, वह अब पाठा वीर भूमि के नाम से जाना जाए.

Lalit Bhatt

पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों में रिपोर्टिंग से ल…और पढ़ें

पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों में रिपोर्टिंग से ल… और पढ़ें

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